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बिहार राज्यसभा चुनाव में एनडीए का पलड़ा भारी, पवन सिंह और नितिन नबीन को लेकर सियासी अटकलें तेज

बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के चुनाव की तारीख़ का ऐलान हो गया है. अधिसूचना 26 फरवरी को जारी होगी, मतदान 16 मार्च को और उसी दिन काउंटिंग होगी. वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल 9 अप्रैल समाप्त हो रहा है. एनडीए में पवन सिंह या नितिन नबीन को लेकर अटकलें तेज हैं.

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पवन सिंह। और नितिन नवीन पर अटकलें तेज (Photo: PTI/ ITG)
पवन सिंह। और नितिन नवीन पर अटकलें तेज (Photo: PTI/ ITG)

बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है. चुनाव आयोग ने अधिसूचना 26 फरवरी को जारी करने की घोषणा की है, जबकि वोटिंग 16 मार्च को होगा और उसी दिन वोटों की गिनती भी पूरी होगी. 

इन पांच सीटों का कार्यकाल 9 अप्रैल को पूरा होने वाला है. वर्तमान सदस्यों में जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर, आरजेडी के अमरेंद्र धारी सिंह, प्रेमचंद गुप्ता और उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं, जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है.

विधानसभा में मौजूदा आंकड़ों के आधार पर एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है. संख्या बल के लिहाज से सत्ताधारी गठबंधन एनडीए की स्थिति मजबूत दिख रही है. माना जा रहा है कि भाजपा और जेडीयू के खाते में दो- दो सीटें जा सकती हैं. वहीं, विपक्षी महाठबंधन के पास केवल एक सीट जीतने की स्थिति है, जिसके लिए आरजेडी और कांग्रेस के बीच सहमति आवश्यक होगी.

सियासी चर्चा बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन को लेकर भी जोरों पर है. हाल ही में दिल्ली में उन्हें टाइप-8 बंगला आवंटित किया गया है, जो आमतौर पर सांसद या कैबिनेट मंत्रियों को मिलता है. फिलहाल वे बिहार के विधायक हैं, लेकिन संगठन में उनकी बढ़ती भूमिका को देखते हुए अब राज्यसभा भेजे जाने की संभावना कम नजर आ रही है.

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वहीं, भोजपुरी अभिनेता-गायक और बीजेपी समर्थक पवन सिंह के राज्यसभा भेजे जाने की भी अटकलें तेज हो गई हैं. विधानसभा चुनाव में उनकी सक्रिय भागीदारी के चलते यह चर्चा है कि उन्हें पार्टी पदभार बढ़ाने के लिए राज्यसभा भेजा जा सकता है.

जेडीयू से हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर की दोबारा उम्मीदवारी पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आमतौर पर दो से अधिक कार्यकाल देने से कतरा जाते हैं. उपेंद्र कुशवाहा की राह भी आसान नहीं दिख रही, खासकर परिवारवाद के आरोपों के कारण.

कुल मिलाकर, इन पांच सीटों के चुनाव बिहार की राजनीति के साथ-साथ राज्यसभा में दलों की ताकत पर भी असर डालेंगे.

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