पटना में टेंडर माफिया रिशु श्री से जुड़े सिंडिकेट पर स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. इस पूरे मामले में एक आईएएस (IAS) अधिकारी समेत तीन प्रभावशाली लोगों को गिरफ्तार किया गया है. छापेमारी के दौरान इन लोगों के पास से करीब 11 करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी बरामद की गई है. इसके साथ ही आईएएस संजीव हंस के ठिकानों पर भी लगातार दबिश दी जा रही है.
स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने इस मामले में तीन बड़ी गिरफ्तारियां की हैं. इसमें सबसे बड़ा नाम आईएएस अधिकारी मुमुक्षु चौधरी का है, जो वर्तमान में वित्त विभाग में जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर तैनात हैं. इनके अलावा नगर विकास विभाग में तैनात इंजीनियर उमेश कुमार सिंह और भवन निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर तारिणी दास को भी गिरफ्तार किया गया है. इन तीनों अधिकारियों पर टेंडर माफिया रिशु श्री के साथ मिलकर सरकारी ठेकों में हेरफेर करने का गंभीर आरोप है.
क्या है पूरा मामला?
जांच एजेंसियों का मानना है कि ये मामला सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं है. इस पूरे महाघोटाले के तार बिहार के बेहद सीनियर आईएएस अधिकारी संजीव हंस से भी जुड़े हुए हैं, जिनके ठिकानों पर एसवीयू की टीम लगातार दबिश दे रही है. फिलहाल, वे राज्य से बाहर बताए जा रहे हैं. रिशु श्री की गिरफ्तारी के बाद सरकारी टेंडरों में कथित गड़बड़ियों का बड़ा नेटवर्क सामने आया था.
छापेमारी के दौरान कई सरकारी दस्तावेज, लेन-देन के रिकॉर्ड, मोबाइल चैट और कॉल डिटेल्स मिली थीं. इन दस्तावेजों के आधार पर कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच शुरू की गई थी. पहले भी कुछ अधिकारियों के नाम सामने आने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी. जांच में ये भी देखा जा रहा है कि टेंडर मंजूर कराने और सरकारी भुगतान जारी कराने की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही.
दरअसल, रिशु श्री ने अपने परिजनों, कर्मचारियों और करीबियों के नाम पर कई कंपनियां बना रखी थीं. आरोप है कि इन कंपनियों के जरिए सरकारी ठेके हासिल किए जाते थे. एजेंसियां इन कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड और लेन-देन की भी जांच कर रही हैं. इसके साथ ही रिशु श्री की विदेश यात्राओं और कथित फंड ट्रांसफर की भी पड़ताल की जा रही है.
ईडी और SVU दोनों इस पूरे मामले की जांच में जुटी हैं. अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं.