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15 से 30 हजार तक सैलरी... काम- लोगों से ठगी करना... पटना में पकड़े गए फ्रॉड गैंग की कहानी

पटना में ऑनलाइन गेमिंग के जरिए ठगी करने वाले गैंग का पर्दाफाश हुआ है. युवाओं को 15 से 30 हजार रुपये की सैलरी पर रखकर देशभर के लोगों, खासकर साउथ इंडिया के लोगों को निशाना बनाया जा रहा था. पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को पकड़ लिया है, जबकि मास्टरमाइंड फरार है.

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ऑनलाइन गेमिंग के जरिए की जाती थी ठगी. (Photo: Screengrab)
ऑनलाइन गेमिंग के जरिए की जाती थी ठगी. (Photo: Screengrab)

पटना की एक सोसायटी... बाहर से सब सामान्य. लेकिन चौथी मंजिल के एक फ्लैट में ठगी का ऐसा खेल चल रहा था, जिसे जानकर कोई भी हैरान रह जाए. दरवाजा खुलता है... अंदर 5-6 युवा, सामने लैपटॉप, कई मोबाइल फोन, कुछ कोड नेम- और हर कॉल के साथ एक नई कहानी. ये कोई कॉल सेंटर नहीं था, ये थी एक 'फ्रॉड फैक्ट्री.' इस गैंग का काम करने का तरीका जितना चौंकाने वाला है, उतना ही खतरनाक भी- युवाओं को 15 से 30 हजार रुपये की सैलरी पर जॉब दी जाती थी और उनका असली काम होता था लोगों को ऑनलाइन गेमिंग के जरिए फंसाकर ठगी करना.

ये कहानी पटना के शास्त्री नगर थाना क्षेत्र की है. पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. यहां शिवपुरी स्थित कार्बन फैक्ट्री के पास एक बिल्डिंग के फ्लैट नंबर 404 में छापेमारी कर पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया. हालांकि गिरोह का मुख्य सरगना अंकित कुमार मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है.

छापेमारी के दौरान जो सामान बरामद हुआ, वह इस पूरे नेटवर्क के पैमाने को दिखाने के लिए काफी है. पुलिस को फ्लैट से 21 मोबाइल फोन, 24 सिम कार्ड, कई एटीएम कार्ड, चेक बुक, पासबुक और दो लैपटॉप मिले हैं. इससे साफ है कि यह गिरोह बड़े स्तर पर संगठित तरीके से ठगी का काम कर रहा था.

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पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह का सरगना अंकित कुमार बिहार के अलग-अलग जिलों से युवाओं को लाकर उन्हें इस नेटवर्क में शामिल करता था. इन युवाओं को 15 से 30 हजार रुपये तक की सैलरी दी जाती थी और उन्हें एक फ्लैट में रखकर काम कराया जाता था.

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पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि वे ऑनलाइन गेमिंग और जुए के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे. सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और कॉल के जरिए लोगों को गेमिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ने का लालच दिया जाता था. 

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गिरोह के लोग देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों को निशाना बनाते थे, खासकर दक्षिण भारत के लोगों को. पुलिस के मुताबिक, इसके पीछे वजह यह थी कि भाषा और दूरी का फायदा उठाकर पहचान छिपाना आसान होता था. गैंग के लोग अलग-अलग कोड नेम का इस्तेमाल करते थे, ताकि उनकी असली पहचान सामने न आए.

हर सदस्य की एक तय भूमिका होती थी- कोई कॉल करता, कोई चैट के जरिए लोगों को फंसाता, तो कोई बैंकिंग ट्रांजेक्शन संभालता. इस तरह पूरे ऑपरेशन को एक संगठित कॉरपोरेट स्ट्रक्चर की तरह चलाया जा रहा था.

इस मामले में सचिवालय एसडीपीओ-2 साकेत कुमार ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर जालसाजी करने वाले इस गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है. फरार सरगना की गिरफ्तारी के लिए भी लगातार छापेमारी जारी है.

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पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य कनेक्शन खंगाल रही है. आशंका है कि इस गिरोह के तार दूसरे राज्यों और बड़े साइबर क्राइम नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं. बरामद मोबाइल, सिम कार्ड और लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, जिससे और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.

यह घटना आम लोगों के लिए भी चेतावनी है कि ऑनलाइन गेमिंग, जुए या इनवेस्टमेंट के नाम पर मिलने वाले किसी भी ऑफर पर बिना जांच-परख के भरोसा न करें. साइबर ठग लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं, ऐसे में सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव है. फिलहाल, इस मामले को लेकर पुलिस की कार्रवाई जारी है.

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