प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ऑनलाइन गेमिंग ऐप WinZO और उसके प्रमोटरों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है. आरोप है कि कंपनी ने बॉट्स और AI का इस्तेमाल कर प्लेटफॉर्म पर खिलाड़ियों को 734 करोड़ रुपए का चूना लगाया. इस मामले में WinZO के निदेशक पावन नंदा और सौम्या सिंह राठौर के साथ कंपनी की विदेशी सहायक कंपनियों को भी आरोपी बनाया गया है.
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ED के बेंगलुरु ज़ोनल ऑफिस ने 23 जनवरी को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामले की सुनवाई के लिए स्थानीय अदालत में चार्जशीट दायर की है. आरोप है कि कंपनी ने 100 से अधिक गेम पेश किए, जिनके करीब 25 करोड़ यूज़र थे. ये सभी यूजर अधिकांश टियर-3 और टियर-4 शहरों के रहने वाले थे.
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि मई 2024 से अगस्त 2025 तक, WinZO ने अपने कोड-आधारित बॉट्स का इस्तेमाल कर निष्क्रिय खिलाड़ियों के डेटा को असली यूज़र्स के खिलाफ बिना उनकी सहमति के इस्तेमाल किया. शुरुआती समय में यूज़र्स को छोटे बोनस देकर विश्वास में लिया गया और आसान बॉट्स के खिलाफ जीतने दिया गया.
जैसे ही खिलाड़ियों ने बड़े दांव खेलना शुरू किया, कठिन बॉट्स को तैनात किया गया, जिससे उन्हें भारी वित्तीय नुकसान हुआ. ED ने कहा कि कंपनी ने केंद्र सरकार द्वारा अगस्त 2025 में रियल-मनी गेमिंग (RMG) ऐप्स पर बैन लगाने के बाद भी 47.66 करोड़ रुपए की असली जीत और डिपॉजिट वापस नहीं किए.
एजेंसी ने आरोप लगाया कि WinZO ने 2021-22 और 2025-26 के बीच 3522.05 करोड़ रुपए कमाया और इसे अमेरिका और सिंगापुर में बनाई गई शेल कंपनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग किया. जांच में यह भी सामने आया कि इस मैनिपुलेटिव गेमिंग स्ट्रक्चर से गरीब वित्तीय पृष्ठभूमि वाले यूज़र्स को गंभीर वित्तीय परेशानियों का सामना करना पड़ा.
कुछ मामलों में मानसिक तनाव और आत्महत्या की प्रवृत्ति तक देखने को मिली. ED ने पिछले साल WinZO और उसके प्रमोटरों के ठिकानों पर छापे मारे थे. पावन नंदा और सौम्या सिंह राठौर को गिरफ्तार किया गया था. फिलहाल सौम्या सिंह जमानत पर बाहर हैं. इस केस की गंभीरता और व्यापकता को देखते हुए इसकी जांच ED को सौंपी गई थी.