केंद्रीय पंचायती राज और मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह के नई पंचायती राज योजना को लेकर दिए बयान पर आरजेडी ने सवाल खड़े किए हैं. आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि भारत सरकार ने अपनी योजनाओं के लिए आधार को मान्यता दी है. ऐसे में सवाल उठता है कि केंद्रीय मंत्री ललन सिंह वोटर आईडी कार्ड को क्यों जोड़ना चाहते हैं.
एजाज अहमद ने सवाल किया कि आखिर ललन सिंह की मंशा क्या है? क्या इसका मकसद लाभार्थियों को योजनाओं से वंचित करना है? उन्होंने ललन सिंह के उस ऐलान को लेकर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने कहा था कि आगे सरकारी योजनाओं के लाभ और भुगतान के लिए आधार को प्राथमिक पहचान के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने शुक्रवार (30 अक्तूबर) को नई पंचायती राज योजना का ऐलान किया था. उन्होंने कहा था कि अब लाभार्थियों को भुगतान और सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए आधार को प्राथमिक पहचान के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. इसकी जगह बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के साथ वोटर आईडी कार्ड नंबर यानी ईपीआईसी नंबर का इस्तेमाल किया जाएगा.
पहचान का मुख्य आधार नहीं
ललन सिंह ने कहा था कि अभी लाभार्थियों को भुगतान देने के लिए आधार का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन आगे यह पहचान का मुख्य आधार नहीं रहेगा. उन्होंने कहा था कि आधार कार्ड जारी करने वाली संस्थाएं हर इलाके में मौजूद हैं. ऐसे में अब लाभार्थियों की पहचान आधार कार्ड के आधार पर नहीं की जाएगी.
बीजेपी ने फैसले को बताया पारदर्शी शासन की दिशा में कदम
वहीं, बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार शर्मा ने केंद्रीय मंत्री के फैसले का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि केंद्रीय पंचायती राज मंत्री ललन सिंह का यह फैसला प्रधानमंत्री मोदी के पारदर्शी शासन की दिशा में बड़ा कदम है.
नीरज कुमार शर्मा ने कहा कि आधार कार्ड आजकल आसानी से बन जाता है, इसलिए फर्जी लाभार्थी बढ़ जाते थे. अब पंचायती राज योजनाओं में ईपीआईसी नंबर यानी वोटर आईडी और बायोमेट्रिक अनिवार्य होगा, जिससे लाभ सिर्फ असली और योग्य लोगों तक पहुंचेगा. उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना के तहत ग्राम पंचायतों को मजबूत करने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का प्रयास है.