scorecardresearch
 

भरत तिवारी एनकाउंटर में CM सम्राट चौधरी को लेना पड़ा एक्शन, बैकफुट पर आई पुलिस

 भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बढ़ते विवाद और जनदबाव के बीच सरकार को बड़ा एक्शन लेना पड़ा. भरत की मां की शिकायत पर हत्या का मुकदमा दर्ज होने के एक दिन बाद जगदीशपुर के एसडीपीओ को हटा दिया गया. महापंचायत से पहले हुई इस कार्रवाई को पुलिस के बैकफुट पर आने के तौर पर देखा जा रहा है. अब पूरे मामले की न्यायिक जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं.

Advertisement
X
भरत तिवारी एनकाउंट केस में पुलिस पर लगातार कार्रवाई हो रही है (Photo:  ITG)
भरत तिवारी एनकाउंट केस में पुलिस पर लगातार कार्रवाई हो रही है (Photo: ITG)

भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है. जिस मामले को लेकर कुछ दिन पहले तक पुलिस अपनी कार्रवाई को सही ठहरा रही थी, उसी मामले में अब हालात ऐसे बन गए हैं कि प्रशासन को लगातार सफाई देनी पड़ रही है. परिजनों के आरोप, लोगों में बढ़ता जनाक्रोश, सोशल मीडिया पर उठते सवाल और राजनीतिक दबाव के बीच आखिरकार सरकार को एक के बाद एक कई प्रशासनिक फैसले लेने पड़े हैं. 

भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर उठे विवाद के बीच सीएम सम्राट चौधरी के निर्देश के बाद जगदीशपुर के एसडीपीओ राजेश वर्मा को उनके पद से हटा दिया गया है. उन्हें अगले आदेश तक पुलिस मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है. उनकी जगह पंकज मिश्रा को नया एसडीपीओ बनाया गया है. यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब एक दिन पहले ही भरत तिवारी की मां आशा देवी के आवेदन पर एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों और जवानों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था. 

पहले एनकाउंटर, फिर सवाल और अब कार्रवाई

17 जून को भोजपुर के शाहपुर इलाके में हुई पुलिस एनकाउंटर में भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई थी. लेकिन घटना के बाद से ही परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस की कहानी पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. भरत तिवारी की मां आशा देवी लगातार यह आरोप लगाती रही हैं कि उनके बेटे की मौत किसी मुठभेड़ में नहीं हुई, बल्कि पुलिस ने उसे घेरकर गोली मारी. मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब सोशल मीडिया पर भरत तिवारी के समर्थन में बड़ी संख्या में पोस्ट और वीडियो सामने आने लगे. देखते ही देखते यह मुद्दा भोजपुर से निकलकर पूरे बिहार में चर्चा का विषय बन गया.

Advertisement

मां की शिकायत पर दर्ज हुआ हत्या का मुकदमा

मंगलवार को मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी के आवेदन पर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. एफआईआर में जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार और अन्य पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया है. आशा देवी का आरोप है कि पुलिस टीम भरत तिवारी को अपने साथ जवइनियां गांव लेकर गई थी. वहां भरत ने फेसबुक लाइव के जरिए अपनी बात रखी और फिर हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया था. परिवार का दावा है कि आत्मसमर्पण के बाद भी उसे नहीं छोड़ा गया और कथित रूप से गोली मार दी गई. आवेदन में यह भी कहा गया है कि घटना के बाद भरत के पिता काशीनाथ तिवारी को पूरे दिन थाने में रखा गया और बाद में परिवार को मौत की सूचना दी गई. यह इस पूरे प्रकरण की चौथी एफआईआर बताई जा रही है, लेकिन पहली बार एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों और जवानों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ है.

क्या दबाव में आया प्रशासन 

एफआईआर दर्ज होने के अगले ही दिन एसडीपीओ को हटाने का फैसला सामने आ गया. राजनीतिक गलियारों में इस कदम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह सही थी तो फिर इतने बड़े स्तर पर बदलाव और जांच की जरूरत क्यों पड़ी? वहीं दूसरी ओर सरकार का कहना है कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जा रहा है.

Advertisement

आज बिलौटी गांव में महापंचायत

भरत तिवारी के गांव बिलौटी में बुधवार को महापंचायत बुलाई गई है. कुंडेश्वर महादेव मंदिर के पास आयोजित होने वाली इस महापंचायत में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना है. गांव के लोगों के अलावा भरत तिवारी के समर्थक, सामाजिक कार्यकर्ता और कई स्थानीय संगठन भी इसमें शामिल हो सकते हैं. प्रशासन की नजर भी इस महापंचायत पर टिकी हुई है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों में यह मामला लगातार भावनात्मक और राजनीतिक रंग लेता गया है.

कौन थे भरत भूषण तिवारी?

28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड स्थित बिलौती गांव के रहने वाले थे. सोशल मीडिया पर उनकी अच्छी पहचान थी. खासकर फेसबुक पर वह काफी सक्रिय रहते थे. ग्रामीण बताते हैं कि भरत सड़क, बिजली, पेयजल, बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और सोन नदी के किनारे बसे गांवों की समस्याओं को लगातार उठाते थे. उनके समर्थकों का कहना है कि वह गरीबों और विस्थापित परिवारों की आवाज बन चुके थे. कई बार वह प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ भी खुलकर लिखते और वीडियो बनाते थे. हालांकि उनके आलोचक यह भी कहते हैं कि सोशल मीडिया पर उनकी भाषा कई बार बेहद आक्रामक हो जाती थी. यही वजह थी कि भरत समर्थकों और विरोधियों, दोनों के बीच चर्चा का विषय बने रहते थे.

Advertisement

मंत्रियों ने भी जारी किया बयान 

मामला बढ़ने के बाद सरकार की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई. मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने साफ कहा कि केवल घटना ही नहीं, बल्कि पुलिस की भूमिका की भी जांच होगी. साथ ही यह भी देखा जाएगा कि भरत तिवारी के पास कथित रूप से हथियार कहां से आया था. सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. भोजपुरी फिल्म जगत के चर्चित अभिनेता और गायक और एमएलसी पवन सिंह ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भरत भूषण तिवारी समाज के लिए संघर्ष करने वाले जागरूक और संवेदनशील व्यक्ति थे. पवन सिंह ने कहा कि यदि वायरल वीडियो और सामने आ रही जानकारियां सही हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायसंगत जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement