बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पंचायत बिहार आजतक में दावा किया है कि राज्य में सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार पहले से ज्यादा असरदार और आम जनता के प्रति जवाबदेह हो गई है. उन्होंने कहा कि एनडीए के पांच दल मिलकर बिहार में सरकार चला रहे हैं और नीतीश कुमार के नेतृत्व में जो सुशासन शुरू हुआ था, अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में वह समृद्धि की तरफ बढ़ रहा है. उन्होंने विकास, शिक्षा, कानून व्यवस्था और रोजगार से जुड़े कई आंकड़े गिनाए.
बहस की शुरुआत में जब आजतक के साहिल जोशी ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री बदलता है तो सरकार चलाने के तरीके में भी बदलाव आना चाहिए. उन्होंने पूछा कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की इच्छा जताते ही भाजपा ने अपना मुख्यमंत्री कैसे बना दिया और इससे बिहार की जनता के लिए असल में क्या बदला. इसके जवाब में संजय सरावगी ने कहा कि भाजपा और गठबंधन के दलों को आपस में लड़ाने की कोशिश बंद होनी चाहिए, क्योंकि सभी पांच दल मिलकर एकजुट होकर काम कर रहे हैं.
उन्होंने बिहार की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 और 2026-27 के दौरान बिहार की जीडीपी 13 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गई है और इसकी वृद्धि दर 14.9 प्रतिशत रही है, जो देश की औसत वृद्धि दर से भी बेहतर है. उन्होंने बताया कि 2026-27 की पहली तिमाही में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है, जो दुनिया के किसी भी बड़े देश से बेहतर मानी जा रही है.
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प्रति व्यक्ति आय की बात करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में यह आंकड़ा अब लगभग 74 हजार रुपये तक पहुंच गया है, जबकि 2005 में यह करीब सात हजार रुपये ही था. उन्होंने यह भी दावा किया कि देश में करीब 25 करोड़ लोग और बिहार में लगभग चार करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले हैं.
रोजगार के सवाल पर उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एक करोड़ नए रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है. उन्होंने सम्राट चौधरी सरकार की कुछ खास पहलों का भी जिक्र किया. हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को सहयोग शिविर लगाए जाते हैं, जहां लोग अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं और तीस दिन के भीतर उनका समाधान करना अनिवार्य है. अगर कोई अधिकारी इक्कीस दिन में शिकायत का निपटारा नहीं करता तो उसे निलंबित कर दिया जाता है. जो आवेदक निपटारे से संतुष्ट नहीं होते, उनकी सुनवाई दूसरे मंगलवार को खुद मुख्यमंत्री करते हैं.
शिक्षा के क्षेत्र में हर प्रखंड में विद्या निकेतन शुरू किए गए हैं, जहां रात 11-12 बजे भी बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं का समाधान जीवित शिक्षकों के जरिए ऑनलाइन किया जाता है. 321 में से 221 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोले गए हैं और वहां तेजी से शिक्षकों की भर्ती भी हुई है. छात्रों और शिक्षकों के लिए अलग-अलग शिकायत पोर्टल भी शुरू किए गए हैं. शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए मिथिला, पाटलिपुत्र और अंग सहित तेरह ग्रीन फील्ड सिटी बनाने का फैसला लिया गया है. कानून व्यवस्था पर उन्होंने बताया कि डीजीपी ने हाल ही में इससे जुड़े आंकड़े पेश करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी.