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बिहार में बड़ा सियासी खेला! दो निर्दलीय MLC बीजेपी में शामिल, राहुल राज की भी पार्टी में वापसी; NDA में बढ़ा तनाव

बिहार में निर्दलीय MLC राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी बीजेपी में शामिल हो गए हैं. राहुल राज ने सारण शिक्षक सीट पर JDU उम्मीदवार को हराया था और पार्टी से निष्कासित किए गए थे.

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तिरहुत के निर्दलीय MLC बंशीधर भी BJP के साथ आए.(Photo:ITG)
तिरहुत के निर्दलीय MLC बंशीधर भी BJP के साथ आए.(Photo:ITG)

बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. दो निर्दलीय विधान पार्षद (MLC) भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए हैं. इनमें सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले राहुल राज और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीते बंशीधर ब्रजवासी शामिल हैं. वहीं, बीजेपी के आधिकारिक बयान की मानें तो दोनों विधान परिषद सदस्यों ने पार्टी को अपना समर्थन दिया है. अब इस सियासी घटनाक्रम से  NDA में तनाव बढ़ गया है.

राहुल राज की बीजेपी में वापसी इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने सारण शिक्षक सीट पर NDA के सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के उम्मीदवार आनंद पुष्कर के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ा था. इसके बाद बीजेपी ने उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था.

सम्राट चौधरी से मिले राहुल राज, रूडी भी रहे मौजूद

BJP में वापसी से पहले राहुल राज मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात करने पहुंचे थे. इस दौरान सारण से बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी भी मौजूद थे. राहुल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं.

CM हाउस से निकलने के बाद राहुल राज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने शिक्षकों के मुद्दे रखे. सम्राट चौधरी ने शिक्षकों की मांगों और समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने का सकारात्मक आश्वासन दिया है.

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JDU प्रत्याशी को हराने वाले राहुल राज फिर BJP में लौटे

JDU उम्मीदवार को हराने पर राहुल राज ने क्या कहा?

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में JDU उम्मीदवार आनंद पुष्कर को हराने के सवाल पर राहुल राज ने कहा, "मैंने NDA को नहीं हराया, बल्कि कम्युनिस्ट विचारधारा के प्रत्याशी को हराया. कोई व्यक्ति 10 दिन के अंदर कम्युनिस्ट विचारधारा से आकर एनडीए का उम्मीदवार बन जाता है, तो कार्यकर्ता उसको स्वीकार नहीं कर पाएंगे."

राहुल राज ने आनंद पुष्कर पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने पिछला चुनाव वामपंथी पार्टी CPI के टिकट पर लड़ा था. चुनाव से 10-15 दिन पहले उन्होंने JDU जॉइन की थी. ऐसे में पार्टी कार्यकर्ता उन्हें स्वीकार नहीं कर पाए.

आनंद पुष्कर को NDA का उम्मीदवार बनाए जाने पर राहुल राज ने कहा कि इसमें जेडीयू और गठबंधन की कोई मजबूरी रही होगी. देखें VIDEO:- 

तिरहुत से निर्दलीय जीते बंशीधर ब्रजवासी भी BJP में शामिल

BJP में शामिल होने वाले दूसरे विधान पार्षद बंशीधर ब्रजवासी हैं. उन्होंने तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीता था.

चुनाव की मतगणना में बंशीधर ब्रजवासी को कुल 31 हजार 832 वोट मिले थे, जबकि एनडीए उम्मीदवार अभिषेक झा को 22 हजार 685 मत प्राप्त हुए. इस तरह बंशीधर ने 9,147 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी. दोनों निर्दलीय विधान पार्षदों के बीजेपी में शामिल होने से बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है.

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बीजेपी ने दी यह जानकारी

उधर, आधिकारिक तौर पर बीजेपी ने बताया कि दोनों निर्दलीय विधान परिषद सदस्यों ने पार्टी को अपना समर्थन दिया है. वहीं, निर्दलीय एमएलसी बंशीधर बृजवासी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी बीजेपी को समर्थन देने की बात कही है.

NDA में बढ़ा तनाव; आनंद पुष्कर ने रूडी और राधा मोहन पर उठाए सवाल
 
एनडीए के अंदर बीजेपी और जेडीयू के बीच तनाव की चर्चा तेज हो गई है. जेडीयू के हारे हुए उम्मीदवार आनंद पुष्कर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर बीजेपी के कुछ नेताओं पर गठबंधन धर्म नहीं निभाने का आरोप लगाया है.

आनंद पुष्कर ने बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी और राधा मोहन सिंह की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि जब बीजेपी के नेता अपने चुनाव में वोट मांगते हैं तो नीतीश कुमार के विकास कार्यों और उनके नेतृत्व का हवाला देते हैं, लेकिन जब सहयोगी दल के उम्मीदवार को समर्थन देने की बारी आती है तो गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया जाता.

पुष्कर ने लिखा कि सारण शिक्षक सीट के चुनाव में बीजेपी के कुछ नेताओं की भूमिका पर गंभीर सवाल हैं. उन्होंने राजीव प्रताप रूडी का नाम लेते हुए पूछा कि क्या गठबंधन धर्म केवल अपने चुनाव के समय याद आता है या सहयोगी दल के उम्मीदवारों के समर्थन के समय भी इसका पालन होना चाहिए? उन्होंने मोतिहारी के सांसद राधा मोहन सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाए.

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पुष्कर ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान उन्हें लगातार भरोसा दिया गया कि मौजूदा विधान पार्षद को चुनाव लड़ने से रोक लिया जाएगा और वह गठबंधन के फैसले को मान लेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ और वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतर गए. आनंद पुष्कर ने सवाल उठाया कि गठबंधन के दूसरे नेताओं को इस भरोसे में क्यों रखा गया? क्या निर्दलीय उम्मीदवार को बीजेपी में शामिल कराने की बात पहले से तय थी?

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एनडीए की बैठक में सभी नेताओं और जनप्रतिनिधियों को स्कूलों में जाकर शिक्षकों से मिलने और गठबंधन उम्मीदवार के पक्ष में समर्थन जुटाने का फैसला हुआ था. लेकिन बीजेपी के कई सांसदों और विधायकों ने इस फैसले के मुताबिक काम नहीं किया. न तो स्कूलों का अपेक्षित दौरा हुआ और न ही शिक्षकों के बीच वैसी सक्रियता दिखाई दी.

अपने पोस्ट में आनंद पुष्कर ने खुद को जेडीयू का पुराना कार्यकर्ता बताया. उन्होंने कहा कि वह पहले भी जेडीयू के सिपाही थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे. उन्होंने नीतीश कुमार के नेतृत्व और बिहार के विकास में उनके योगदान की तारीफ की. साथ ही अपने पिता स्वर्गीय केदारनाथ पांडेय के शिक्षक समाज के लिए किए गए कामों का भी जिक्र किया.

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बता दें सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय राहुल राज ने जेडीयू के आनंद पुष्कर को हराया था. वहीं, तिरहुत स्नातक सीट से निर्दलीय बंशीधर बृजवासी ने जेडीयू के अभिषेक झा को चुनाव में मात दी थी. चुनाव जीतने के बाद शनिवार को दोनों निर्दलीय उम्मीदवार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिले और बीजेपी में शामिल हो गए.
 

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