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बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश अब बने MLC, आठ महीने से नहीं थे किसी भी सदन के सदस्य

बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को राज्यपाल ने विधान परिषद के लिए मनोनीत कर दिया है. सरकार के प्रस्ताव पर मंजूरी मिलने के बाद उनका मनोनयन हुआ. वह अब तक विधानसभा या विधान परिषद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे. देवेश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर उन्हें MLC बनाया गया है.

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सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला.(photo: ITG)
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला.(photo: ITG)

बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद के लिए मनोनीत कर दिया गया है. राज्यपाल ने सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए उनके मनोनयन पर मुहर लगा दी. इसके साथ ही अब वह विधान परिषद के सदस्य बन जाएंगे.

दीपक प्रकाश को उस सीट पर मनोनीत किया गया है, जो बीजेपी एमएलसी देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी. सरकार ने इस रिक्त सीट के लिए उनका नाम प्रस्तावित किया था, जिस पर राज्यपाल की सहमति मिलने के बाद मनोनयन की प्रक्रिया पूरी हुई.

यह भी पढ़ें: बिहार: बिना विधायक बने दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाने को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में 15 जुलाई को सुनवाई

दीपक प्रकाश फिलहाल बिहार सरकार में पंचायती राज विभाग के मंत्री हैं. वह राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं. लंबे समय से उनके किसी सदन का सदस्य न होने को लेकर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर चर्चा होती रही थी.

बिना किसी सदन के सदस्य बने थे मंत्री

दीपक प्रकाश नवंबर 2025 में पहली बार बिहार सरकार में मंत्री बने थे. इसके बाद 8 महीने से ज्यादा समय तक वह विधानसभा और विधान परिषद, दोनों में से किसी भी सदन के सदस्य नहीं रहे. इसके बावजूद वह मंत्री पद की जिम्मेदारी निभाते रहे.

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बाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद गठित सम्राट कैबिनेट में भी दीपक प्रकाश को मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई. हालांकि, उस दौरान भी वह किसी सदन के निर्वाचित या मनोनीत सदस्य नहीं थे.

भारतीय संविधान के तहत कोई व्यक्ति मंत्री तो बन सकता है, लेकिन उसे निर्धारित अवधि के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना आवश्यक होता है. ऐसे में उनके विधान परिषद के लिए मनोनयन को इसी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला

दीपक प्रकाश की मंत्री के तौर पर नियुक्ति का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था. उनकी नियुक्ति को लेकर कानूनी सवाल उठाए गए थे, क्योंकि वह उस समय किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे.

अब राज्यपाल की मंजूरी के बाद उनके विधान परिषद का सदस्य बनने का रास्ता साफ हो गया है. इससे मंत्री के रूप में उनकी संवैधानिक स्थिति भी मजबूत होगी और पहले से चल रही चर्चाओं पर भी विराम लगने की संभावना है.

दीपक प्रकाश के मनोनयन को बिहार की राजनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है. सरकार के प्रस्ताव पर राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद अब वह औपचारिक रूप से बिहार विधान परिषद के सदस्य के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे.

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