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भोजपुर एनकाउंटर पर बिहार DGP ने CM को दी गलत जानकारी? BJP विधायक ने उठाए सवाल

भोजपुर के शाहपुर में हुए भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पुलिस के बयानों में आए बड़े विरोधाभास के बाद अब सत्तारूढ़ BJP के विधायक आनंद मिश्रा ने भी इस पूरी घटना पर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है.

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भोजपुर एनकाउंटर पर बिहार DGP ने CM को दी गलत जानकारी?. (photo: ITG)
भोजपुर एनकाउंटर पर बिहार DGP ने CM को दी गलत जानकारी?. (photo: ITG)

बिहार में भोजपुर एनकाउंटर में मारे गए भारत भूषण तिवारी मामले में नया विवाद खड़ा हो गया है. सवाल उठने लगे हैं कि क्या राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को घटना की गलत जानकारी दी? अब BJP विधायक आनंद मिश्रा ने घटना की हैंडलिंग पर सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की कराने की मांग की है. इसके बाद से ये विवाद और बढ़ गया है.

ये मामला तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री ने बुधवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि मानसिक रूप से अस्थिर भरत भूषण तिवारी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें इलाज के लिए मानसिक स्वास्थ्य संस्थान भेजा जाएगा. हालांकि, पुलिस का आधिकारिक बयान बिल्कुल अलग है.

पुलिस का कहना है कि शाहपुर में एनकाउंटर के दौरान भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई, जब उन्होंने कथित तौर पर पुलिस टीम पर गोली चलाई थी.

पुलिस और सीएम के बयान में अंतर

सीएम के बयान के बाद इस एनकाउंटर को लेकर हड़कंप मच गया. अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि अगर एनकाउंटर में तिवारी की मौत पहले ही हो चुकी थी तो मुख्यमंत्री ने क्यों कहा कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है और इलाज के लिए भेजा जा रहा है?

मुख्यमंत्री के बयान और पुलिस की कहानी में इस बड़े अंतर के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या राज्य के शीर्ष नेतृत्व को इस गंभीर घटना के बारे में सही और पूरी जानकारी नहीं दी गई थी. ये विवाद इसलिए भी ज्यादा बड़ा हो गया है क्योंकि अब सत्ताधारी गठबंधन के अंदर से ही इसके खिलाफ आवाज उठने लगी है.

BJP विधायक आनंद मिश्रा ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतक भारत तिवारी के परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है. मिश्रा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर स्थानीय पुलिस समय रहते व्यावहारिक और उचित कदम उठाती तो इस पूरी स्थिति को और भी बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था और ये दुखद परिणाम रुक सकता था.

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पुलिस अधिकारी पर एक्शन

मामले की गंभीरता को देखते हुए इस घटना में शामिल संबंधित पुलिस अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है. विधायक आनंद मिश्रा ने बताया कि एक उच्च स्तरीय जांच और राज्य मानवाधिकार आयोग की टीम इस पूरे मामले की गहनता से पड़ताल करेगी, जिससे घटना से जुड़े हर पहलू की पारदर्शिता दुनिया के सामने आ सके.

एनकाउंटर को लेकर कई सवाल

पुलिस के अनुसार, भरत भूषण तिवारी के पास हथियार था और उन्होंने अधिकारियों पर कई बार गोली चलाई. पुलिस का कहना है कि उन्होंने कई बार उन्हें सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने गोलीबारी जारी रखी, जिससे उन्हें आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी.

हालांकि, सवाल ये भी पूछा जा रहा है कि क्या उन्हें जिंदा गिरफ्तार करने का कोई मौका था. अगर पुलिस उन्हें सरेंडर करने के लिए मनाने की कोशिश कर रही थी तो गोलीबारी से ठीक पहले के आखिरी पलों में क्या हुआ? क्या उन्हें पकड़ने के लिए गैर-घातक तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता था या क्या पुलिस बातचीत करने वालों (नेगोशिएटर्स) के जरिए उनसे बात कर सकती थी?

पुलिस को पता थी मृतक की मानसिक स्थिति

तिवारी की मानसिक स्थिति के बारे में भी सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि पुलिस ने मंगलवार को घटना के बारे में पहला प्रेस बयान जारी करते वक्त तिवारी को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया था. इसके बाद बुधवार को मुख्यमंत्री का इलाज को लेकर आया बयान इस बात पर बहस छेड़ता है कि क्या अधिकारियों को मुठभेड़ से पहले ही उसकी मानसिक स्थिति की पूरी जानकारी थी.

इस समय स्थानीय लोग और मृतक के परिजन पूरे मामले की एक स्वतंत्र जांच कराने की मांग पर अड़े हुए हैं. उनका मानना है कि केवल एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच ही इस कथित मुठभेड़ के पीछे के असली तथ्यों को स्थापित कर सकती है और परिवार के मन में तैर रहे सभी संदेहों को पूरी तरह दूर कर सकती है.

इस पूरे मामले के केंद्र में मुख्यमंत्री का वह बयान ही है, जिसने पूरी पुलिसिया कार्रवाई को कटघरे में खड़ा कर दिया है. सवाल यह है कि यदि मुख्यमंत्री को गलत जानकारी दी गई तो वह जानकारी किसने और क्यों दी और यदि मुठभेड़ के बाद उन्हें अपडेट नहीं किया गया तो सरकार और पुलिस के बीच का यह संवाद तंत्र कितना कमजोर है.

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