बिहार के भागलपुर में सोमवार तड़के एक बड़ा हादसा टल गया, जब विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा अचानक ढह गया. गंगा नदी पर बना यह पुल दक्षिण और उत्तर बिहार को जोड़ने वाला बेहद अहम रास्ता है. अधिकारियों के मुताबिक, रात करीब 1 बजे पुल के पिलर नंबर 133 के पास लगभग 25 मीटर लंबा स्लैब नदी में गिर गया. शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि पुल में पहले से दरारें आ गई थीं, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि नुकसान धीरे-धीरे बढ़ रहा था. हालांकि, प्रशासन की सतर्कता से समय रहते पुल पर यातायात रोक दिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया.
जनसंपर्क विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि घटना आधी रात को हुई, लेकिन भागलपुर प्रशासन की मुस्तैदी से बड़ी त्रासदी टल गई. उन्होंने यह भी कहा कि पुल के रखरखाव के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पहले ही भेजी जा चुकी थी, जो अभी मंजूरी के इंतजार में है.
ट्रैफिक डायवर्ट किया गया
इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंच गए हैं. क्षतिग्रस्त हिस्से को सील कर दिया गया है और ट्रैफिक को दूसरे रास्तों पर डायवर्ट किया गया है. हालांकि, इससे रोजाना आने-जाने वाले लोगों और ट्रांसपोर्टरों को काफी दिक्कत हो रही है.
2001 में शुरू हुआ था पुल
करीब 4.7 किलोमीटर लंबा यह पुल साल 2001 में शुरू हुआ था और यह गंगा पर बने बिहार के सबसे लंबे पुलों में से एक है. यह पुल नवगछिया, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जैसे जिलों को भागलपुर और दक्षिण बिहार से जोड़ता है. रोजाना हजारों वाहन, जिनमें ट्रक, बसें और निजी गाड़ियां शामिल हैं, इस पुल से गुजरते हैं.
3 महीने में हो सकता है चालू
इस बीच राज्य सरकार अब पुल की मरम्मत के लिए सेना की मदद लेने पर विचार कर रही है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बात कर बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन और सेना की मदद लेने की पहल की है. अधिकारियों का कहना है कि करीब 3 महीने में मरम्मत कर पुल को फिर से चालू करने की योजना है.
विक्रमशिला विश्वविद्यालय के नाम पर रखा गया पुल का नाम
विक्रमशिला सेतु का नाम ऐतिहासिक विक्रमशिला विश्वविद्यालय के नाम पर रखा गया है. पूर्वी बिहार के लिए यह पुल जीवन रेखा माना जाता है, क्योंकि व्यापार, यातायात और माल ढुलाई का बड़ा हिस्सा इसी पर निर्भर है. पहले भी इस पुल की खराब हालत को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं. लोगों ने रखरखाव की कमी, दिखने वाले नुकसान और भारी ट्रैफिक लोड को लेकर चिंता जताई थी. इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि समय पर जांच और मरम्मत क्यों नहीं की गई.
हादसे के कारणों की होगी जांच
सरकार ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है. विशेषज्ञ यह पता लगाएंगे कि पुल का हिस्सा पुराना होने, ज्यादा भार, कमजोर सामग्री या रखरखाव की कमी की वजह से गिरा या नहीं. साथ ही गंगा के तेज बहाव और पिलरों पर उसके असर की भी जांच की जाएगी.
इस घटना ने एक बार फिर बिहार के पुराने पुलों की हालत पर चिंता बढ़ा दी है, खासकर गंगा जैसे बड़े नदी पर बने पुलों को लेकर. विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित जांच और समय पर मरम्मत बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके.
फिलहाल प्रशासन ट्रैफिक को संभालने और लोगों की परेशानी कम करने की कोशिश कर रहा है. मरम्मत में समय लग सकता है, जिससे आने वाले दिनों में यात्रा और व्यापार दोनों प्रभावित हो सकते हैं.