बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए सियासी पारा चढ़ गया है. नामांकन दाखिल करने के बाद मीडिया से बातचीत में प्रशांत किशोर ने इस चुनाव को लेकर एक बड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सीट का उपचुनाव नहीं, बल्कि पूरे बिहार में नेतृत्व बदलने की लड़ाई है. इस दौरान उन्होंने कहा कि 'यह चुनाव बीजेपी के अहंकार को खत्म करने का एक बड़ा मौका है. बांकीपुर किसी का गढ़ नहीं है, बल्कि यहां की जनता ही सबसे बड़ी ताकत है'.
बांकीपुर का यह उपचुनाव इस बार कई मायनों में बेहद दिलचस्प हो गया है. चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर इस बार खुद पहली बार चुनावी मैदान में उतरे हैं, यानी चुनावी राजनीति में यह उनका डेब्यू है. उनके चुनावी मैदान में उतरने से यहां का मुकाबला बेहद कड़ा होने की उम्मीद है.
पर्चा भरने के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर का चुनाव पूरे बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम है. इसका असर सिर्फ एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहने वाला. उन्होंने कहा कि यह चुनाव बिहार में नए नेतृत्व की शुरुआत का मौका है. जनता बदलाव चाहती है, वही इस चुनाव का फैसला करेगी. उनका मानना है कि लोकतंत्र में कोई भी सीट किसी पार्टी या नेता की स्थायी जागीर नहीं होती.
क्यों खाली हुई बांकीपुर सीट?
बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की नौबत इसलिए आई, क्योंकि यहां से विधायक रहे नितिन नवीन राज्यसभा चले गए. राज्यसभा पहुंचने पर उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद यह सीट खाली हो गई. अब इस सीट पर आगामी 30 जुलाई को वोट डाले जाएंगे, जबकि इस विधानसभा सीट के चुनाव नतीजे 3 अगस्त को आने हैं. बता दें कि बांकीपुर सीट से वीणा मानवी भी चुनावी डेब्यू कर रही है.