देश में पेट्रोल के विकल्प के तौर पर इथेनॉल को बढ़ावा देने की तैयारी चल रही है. सरकार ने हाल ही में ऐसी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को मंजूरी देने के लिए नियमों में बदलाव किया है, जो 100% तक इथेनॉल से चल सकती हैं. लेकिन इस फैसले के साथ ही एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि अगर गाड़ियां पूरी तरह इथेनॉल पर चलने लगीं, तो देश में इतनी बड़ी मात्रा में फ्यूल की सप्लाई कैसे होगी? अब सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से यही सवाल पूछा है. कोर्ट ने यह भी कहा कि इथेनॉल पॉलिसी पर चर्चा करते समय किसानों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट ने बीते गुरुवार, को इथेनॉल से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से पूछा कि अगर देश में 100% इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों को अनुमति दी जा रही है, तो उनके लिए पर्याप्त फ्यूल की व्यवस्था कैसे की जाएगी.
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जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान हाल ही में आई मीडिया रिपोर्ट्स का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले अखबारों में खबरें आई थीं कि सरकार ने 100% इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों को परमिशन दे दी है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि इतनी बड़ी संख्या में गाड़ियों के लिए इथेनॉल की सप्लाई कैसे की जाएगी.
कोर्ट के सवाल पर अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने जवाब दिया कि, इसके लिए बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्शन सिस्टम में बदलाव करने होंगे. यानी अगर भविष्य में 100% इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों का इस्तेमाल बढ़ता है, तो देश को इसके लिए बड़े पैमाने पर तैयारी करनी होगी.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इथेनॉल पॉलिसी को केवल फ्यूल और पर्यावरण तक सीमित रखने के बजाय किसानों के हितों से जोड़ने की जरूरत बताई. जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि इस पूरे मामले को आम लोगों के फायदे के नजरिए से देखने की जरूरत है. इसमें पर्यावरण के साथ-साथ देश के किसानों को सशक्त बनाने का पहलू भी बेहद अहम है.
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उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी आज भी गांवों में रहती है और किसानों को मजबूत बनाने के मुद्दे पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है. बेंच ने कहा कि आम लोगों, खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को सशक्त बनाने की जरूरत है.
इस पर अटॉर्नी जनरल ने भरोसा दिलाया कि, वह मामले में अपनी दलीलों के दौरान किसानों से जुड़े पहलुओं को भी रखेंगे. सुनवाई में मौजूद एक वकील ने कहा कि इथेनॉल को बढ़ावा देने से किसी न किसी रूप में किसानों को फायदा मिलेगा. वहीं, एक अन्य वकील ने दलील दी कि केंद्र सरकार की मौजूदा पॉलिसी में किसानों के हितों को पहले से शामिल किया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई अगले महीने तय की है.
इथेनॉल सप्लाई को लेकर चल रहा विवाद
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला इथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) 2025-26 के लिए इथेनॉल डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया. इससे पहले 30 जून को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस निर्देश पर स्टेटस को बनाए रखने का आदेश दिया था, जिसमें इथेनॉल सप्लाई बढ़ाने की मांग पर विचार करने को कहा गया था. दरअसल, एक ऑयल मार्केटिंग कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि हाईकोर्ट के आदेश से पेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी प्रभावित हो सकती है.
सरकार ने E100 फ्यूल के लिए बदले नियम
दरअसल, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर 2026 को सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 में बदलाव की अधिसूचना जारी की थी. इसके तहत फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E100 यानी लगभग शुद्ध इथेनॉल से चलने वाले वाहनों का रास्ता साफ कर दिया गया है. इसका मतलब है कि, आने वाले समय में देश में ऐसे वाहनों की संख्या बढ़ेंगी जो प्योर इथेनॉल पर चलती हैं.
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इससे पहले मंत्रालय ने वाहनों के एमिशन सर्टिफिकेशन से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है. अब इसमें E85 के साथ E100 को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है. E85 फ्यूल में 85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल होता है, जबकि E100 में लगभग पूरी मात्रा इथेनॉल की होती है. फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को इस तरह तैयार किया जाता है कि वे पेट्रोल के साथ इथेनॉल के ज्यादा ब्लेंडिंग वाले फ्यूल पर भी चल सकें. हालांकि, सामान्य पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले इनके इंजन और फ्यूल सिस्टम में कुछ खास बदलाव किए जाते हैं.