
अगर आप यूपी से हैं और आपके घर में कोई पुरानी कार या बाइक खड़ी सिर्फ धूल खा रही है, तो ये खबर आपके काम की है. क्योंकि उत्तर प्रदेश में ऐसी गाड़ियों की गिनती अब सिर्फ उम्र से नहीं, फिटनेस से होगी. जो वाहन टेस्ट में फेल होंगे, उनका अगला पड़ाव सड़क नहीं, सीधे स्क्रैपिंग सेंटर होगा. राज्य में अब तक 1.95 लाख से ज्यादा पुरानी गाड़ियां कबाड़ बन चुकी हैं. सरकार का दावा है कि इससे सड़कें सुरक्षित होंगी, प्रदूषण घटेगा और नई गाड़ी खरीदने वालों को टैक्स में भी राहत मिलेगी.
दरअसल, राज्य सरकार की व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी (Scrappage Policy) का असर साफ दिखाई देने लगा है. 30 जून तक पूरे प्रदेश में 1.95 लाख से ज्यादा पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप किया जा चुका है. सरकार का कहना है कि इस कदम से न केवल रोड सेफ्टी बढ़ेगी, बल्कि प्रदूषण कम होगा और राज्य का ट्रांसपोर्ट सिस्टम पहले से ज्यादा मॉडर्न बनेगा. साथ ही इस पॉलिसी से निवेश और रोजगार के नए मौके भी पैदा होने की उम्मीद है.
सरकारी बयान के मुताबिक, 30 जून तक उत्तर प्रदेश में 1.85 लाख से ज्यादा प्राइवेट व्हीकल्स और 10 हजार से अधिक सरकारी वाहनों को अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटरों के जरिए स्क्रैप किया जा चुका है. इस तरह कुल मिलाकर 1.95 लाख से ज्यादा पुरानी गाड़ियों को अब सड़क से हटा दिया गया है. राज्य सरकार ने साल 2023 में पुरानी गाड़ियों की स्क्रैपेज पॉलिसी को मंजूरी दी थी और पूरे प्रोसेस को टेक्निकली एडवांस बनाया गया था.

प्रदेश में 101 स्क्रैपिंग सेंटर
परिवहन विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अभी तक 101 रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (RVSF) हैं. इनमें से 50 सेंटर पूरी तरह से काम कर रहे हैं. जिन जिलों में अभी स्क्रैपिंग सेंटर नहीं हैं, वहां नए सेंटर खोलने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है. फिलहाल 30 नए स्क्रैपिंग सेंटरों के प्रस्ताव और आवेदन प्रक्रिया में हैं. यानी आने वाले समय में ऐसे स्क्रैपिंग सेंटरों की संख्या और तेजी से बढ़ेगी.
सरकार ने बताया कि स्क्रैपिंग का पूरा प्रोसेस केंद्र सरकार के V-Scrap Portal और VAHAN सिस्टम के जरिए ऑनलाइन किया जाता है. इससे पूरे सिस्टम में ट्रांसपैरेंसी बनी रहती है और वाहन मालिकों को बिना वजह भागदौड़ करने या परेशानी से भी राहत मिलती है. सरकार का कहना है कि, इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन घटेगा और फ्यूल की भी बचत होगी.
किन गाड़ियों को किया जाता है स्क्रैप
इस पॉलिसी के तहत ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर एडवांस कंप्यूटराइज्ड मशीनों से वाहनों की फिटनेस जांच की जाती है. जो वाहन फिटनेस टेस्ट में फेल हो जाते हैं, उन्हें दोबारा जांच का मौका दिया जाता है. अगर वाहन दोबारा भी फिटनेस टेस्ट पास नहीं कर पाता, तो उसे एंड ऑफ लाइफ व्हीकल (ELV) घोषित कर स्क्रैप कर दिया जाता है. यानी पूरी तरह नष्ट कर दिया जाता है.
सरकार इस पॉलिसी के जरिए वाहन मालिकों को कई तरह के फायदे भी दे रही है. जो लोग अपनी पुरानी गाड़ी अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर पर जमा करते हैं, उन्हें सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट दिया जाता है. इस सर्टिफिकेट के आधार पर नई कमर्शियल गाड़ी खरीदने पर रोड टैक्स में 10 प्रतिशत तक और नई कार-बाइक या स्कूटर खरीदने पर 15 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है. इतना ही नहीं, इस सर्टिफिकेट को किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर भी किया जा सकता है.
सरकार का मानना है कि इस स्क्रैपेज पॉलिसी से ऑटोमोबाइल, स्टील, एल्यूमिनियम, कॉपर, प्लास्टिक और रबर रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री को कच्चा माल आसानी से मिलेगा. इससे मैन्युफैक्चरिंग लागत कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही नए स्क्रैपिंग सेंटर खुलने से निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए मौके भी पैदा होंगे.