भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल्स की धाक बढ़ रही है. हालांकि, अभी भी कई सेगमेंट हैं, जहां कन्वेंशनल फ्यूल का ही इस्तेमाल हो रहा है. एग्रीकल्चर ऐसा ही सेक्टर है, जहां डीजल का दबदबा है. वैसे तो मार्केट में कुछ इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर आते हैं, लेकिन इनकी मांग ना के बराबर है.
हाल में ही इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर से जुड़ी एक रिपोर्ट जारी हुई है, जो काफी अलग तरह के फैक्ट्स पेश करती है. इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (आईसीसीटी) ने 11 महीनों की पायलट स्टडी के आधार पर एक रिपोर्ट जारी की है.
रिपोर्ट की मानें, तो इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर एक एकड़ खेत का काम डीजल ट्रैक्टर्स के मुकाबले 64 से 84 परसेंट तक कम एनर्जी खर्च में कर सकते हैं. इस स्टडी में चार मैन्युफैक्चर्र्स के पांच इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया गया है. स्टडी के दौरान इन ट्रैक्टर्स को जुताई, बुआई, बची हुई फसलों के मैनेजमेंट और ट्रांसपोर्ट ऑपरेशन में इस्तेमाल किया गया है.
आईसीसीटी ने बताया कि ये टेस्ट भारत में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर्स को फार्म कंडीशन में इस्तेमाल करने को लेकर रियल वर्ल्ड डेटा इकट्ठा करने की दिशा में पहला कदम है. इस स्टडी में ना सिर्फ एग्रीकल्चर में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर के इस्तेमाल को देखा गया है बल्कि दूसरे इसके दूसरे पहलुओं पर भी फोकस किया गया है.
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डीजल ट्रैक्टर्स का इस्तेमाल इंडस्ट्रियल कामों में भी होता है. इसकी वजह से दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में एयर पॉल्यूशन और बढ़ता है. आईसीसीटी का कहना है कि भारत में मौजूदा नियम 25 से 50 हॉर्सपावर कैटेगरी में ट्रैक्टर्स को ट्रकों के मुकाबले छूट मिलती है. वहीं 2032 से पहले कड़े नियमों के आने की उम्मीद भी नहीं है.
आईसीसीटी ने कमर्शियल यूज वाले इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को भी सब्सिडी के दायरे में शामिल करने की सिफारिश की है. पायलट प्रोजेक्ट में इसका इकोनॉमिक फायदा दिखा है. स्टडी के आधार पर आईसीसीटी ने नगर निगमों के वेस्ट मैनेजमेंट और एयरपोर्ट ग्राउंड लॉजिस्टिक्स के लिए भी इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को बढ़ावा देने की भी बात कही गई है.
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इसके अलावा, आईसीसीटी ने सरकार की अप्रूव्ड एग्रीकल्चरल मशीनरी लिस्ट में सर्टिफाइड इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर मॉडल्स को तेजी से शामिल करने की सिफारिश की है. साथ ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है.इसके तहत अलग-अलग जगहों पर चार्जिंग नेटवर्क तैयार करने, बैटरी स्वैपिंग और फास्ट चार्जिंग के पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का सुझाव दिया गया है.