E20 पेट्रोल की एंट्री के बाद से सोशल मीडिया पर एक ही चर्चा हो रही है. 'इस पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज गिर रहा है और मेंटेनेंस बढ़ रहा है.' हालांकि, सरकार का कहना है कि ऐसा कुछ भी नहीं है. ई20 फ्यूल का लोगों की गाड़ियों पर चाहे जैसा असर हो, लेकिन लोगों के मन में एक जैसा असर हो रहा है.
हाल में केंद्रीय पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि E20 पेट्रोल से माइलेज में कुछ गिरावट आ सकती है, लेकिन जैसे इसे सोशल मीडिया पर दिखाया जा रहा है, इसका असर वैसा नहीं है. लगातार उठ रहे सवाल पर तमाम कंपनियों के एग्जीक्यूटिव्स ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की है.
इसमें वर्तिका शुक्ला (पूर्व सीएमडी, ईआईएल), मनप्रीत सिंह (सर्कल हेड, बजाज ऑटो) प्रसाद कृष्णन (वरिष्ठ उपाध्यक्ष, कॉर्प अफेयर्स, टीवीएस), विक्रम गुलाटी (कंट्री हेड, टोयोटा), राहुल भारती (वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी, मारुति सुजुकी), पुनीत आनंद (हुंडई इंडिया) और आशुतोष वर्मा (हीरो मोटोकॉर्प) से शामिल हुए हैं.
सभी इंडस्ट्री एग्जीक्यूटिव्स ने कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग को रातों-रात लागू नहीं किया गया है. इसे दिसंबर 2025 में पूरा कर लिया गया था. इसे कई टेस्ट के बाद लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को कम करना है. कई देशों में ई20 इस्तेमाल हो रहा है. इससे गाड़ियों के माइलेज पर मामूली असर हो रहा है, लेकिन परफॉर्मेंस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है.
इस पूरे मामले में टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट अफेयर्स और गवर्नेंस) विक्रम गुलाटी ने अपनी बात रखी है.
उन्होंने बताया, 'देश में 2023 के बाद बेचे गए सभी वाहन E20 कम्प्लायंट हैं. 2023 से पहले की भी गाड़ियां बिना किसी बड़ी समस्या के E20 फ्यूल पर चल सकती हैं. जैसा मैंने बताया, स्टडी से पता चलता है कि E20 फ्यूल इस्तेमाल करने पर माइलेज में लगभग 4 से 5 परसेंट की मामूली कमी आ सकती है.'
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'इसका कारण ये है कि इथेनॉल का एनर्जी कंटेंट (ऊर्जा क्षमता) पेट्रोल की तुलना में कम होता है, इसलिए माइलेज थोड़ा घट जाता है. हालांकि, वाहन के परफॉर्मेंट पर इसका निगेटिव असर नहीं पड़ता. बल्कि गाड़ियों का एक्सेलेरेशन बेहतर हो जाता है. एथेनॉल का ऑक्टेन नंबर काफी अधिक होता है, जिससे इंजन बेहतर ढंग से काम करता है.'
'शायद आपको ये जानकर हैरानी होगी कि प्योर इथेनॉल का इस्तेमाल फॉर्मूला-1 रेसिंग में भी किया जाता है. इसलिए ये कहना सही नहीं होगा कि E20 से व्हीकल की परफॉर्मेंस खराब होती है. वास्तव में एक्सेलेरेशन, टॉर्क और परफॉर्मेंस में सुधार देखने को मिल सकता है.'
E20 फ्यूल पर माइलेज टेस्ट को लेकर ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के डायरेक्टर डॉ रेजी मैथाई ने बताया, 'E20 की तुलना में E10 फ्यूल का प्रभाव जानने के लिए ये रिसर्च वाहन निर्माताओं के साथ मिलकर की गई है. मैन्युफैक्चर्रस अपने वाहनों को सबसे अच्छी तरह समझते हैं.'
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'हम जानते हैं कि फ्यूल के रूप में इथेनॉल की कैलोरिफिक वैल्यू पेट्रोल की तुलना में थोड़ी कम होती है. इसलिए E20 ब्लेंड प्यूल की कैलोरिफिक वैल्यू भी थोड़ी कम होती है.'
'फ्यूल कंजम्प्शन का आकलन कंट्रोल्ड एनवायरमेंट में किया गया. टेस्ट के दौरान तापमान को कंट्रोल रखा गया और वाहनों को रोलर्स (डायनेमोमीटर) पर चलाकर टेस्ट किया गया, ताकि केवल ईंधन के कारण होने वाले प्रभाव को सटीक रूप से मापा जा सके.'
'हमने वाहन निर्माताओं के साथ मिलकर अलग-अलग उम्र की गाड़ियों का टेस्ट किया. इनमें कुछ वाहन लगभग 10 साल पुराने थे, कुछ करीब 8 साल पुराने और कुछ 3 से 4 साल पुराने थे. रिजल्ट में पाया गया कि इन वाहनों में E20 फ्यूल के यूज से माइलेज में लगभग 2 फीसदी से 6 फीसदी तक की कमी दर्ज हुई है.'