
Zojila Tunnel Explained: एक सड़क ऐसी है जो हर साल बर्फ के आगे घुटने टेक देती है. एक दर्रा ऐसा है जो सर्दियां आते ही देश-दुनिया से कट जाता है. और एक इलाका ऐसा है जो महीनों तक इंतजार करता है कि कब रास्ते खुले और जिंदगी फिर पटरी पर लौटे. लेकिन अब तस्वीर बदलने वाली है. Zojila Tunnel का ब्रेकथ्रू पूरा हो चुका है और इसके साथ ही कश्मीर से लद्दाख तक सालभर कनेक्टिविटी का सपना हकीकत के और करीब पहुंच गया है. दावा है कि जिस सफर में आज घंटों लग रहे हैं, वह आने वाले समय में महज 30 मिनट में पूरा हो सकेगा.
देश के सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल Zojila Tunnel ने एक बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है. सुरंग का ब्रेकथ्रू पूरा हो गया है, यानी दोनों तरफ से की गई खुदाई अब आपस में जुड़ चुकी है. इसके साथ ही वो समय और भी नजदीक आ गया है, जब कश्मीर और लद्दाख के बीच का सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान, सुरक्षित और तेज हो जाएगा. यह टनल शुरू होने के बाद वह रास्ता भी सालभर खुला रहेगा जो अभी हर साल करीब 5 से 6 महीने तक बर्फबारी के कारण बंद हो जाता है.

Zojila Tunnel जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग को लद्दाख के द्रास और कारगिल क्षेत्र से जोड़ने वाला एशिया की सबसे बड़ा रोड टनल है. इसकी लंबाई करीब 13.15 किलोमीटर है. इसे समुद्र तल से लगभग 11,500 फीट की ऊंचाई पर बनाया जा रहा है. यह दुनिया की सबसे लंबी दो-तरफा यातायात (टू-वे लेन) वाली हाई-एल्टीट्यूड रोड टनल में शामिल होगी. यह सुरंग श्रीनगर-कारगिल-लेह नेशनल हाईवे पर बनाया जा रहा है, जो लद्दाख की जीवनरेखा माना जाता है.
टनल निर्माण में ब्रेकथ्रू वह स्टेज होता है जब दोनों ओर से खोदी जा रही सुरंग बीच में आकर मिल जाती है. यानी एक तरफ से इंजीनियर और दूसरी तरफ से मजदूर जब खुदाई करते हुए आगे बढ़ते हैं और बीच में एक जगह आकर मिल जाते हैं तो इसे ही ब्रेकथ्रू (Breakthrough) कहा जाता है. हाल ही में जोजिला टनल का फाइनल ब्रेकथ्रू पूरा हुआ है. इसका मतलब है कि सुरंग की मुख्य खुदाई का काम समाप्त हो चुका है. अब इसके भीतर सड़क, लाइटिंग, वेंटिलेशन, सेफ्टी डिवाइसेज और अन्य सुविधाओं का काम किया जाएगा. इंजीनियरिंग की नजरिए से इसे प्रोजेक्ट का सबसे अहम स्टेज माना जा रहा है.

जोजिला दर्रा कश्मीर को लद्दाख से जोड़ने वाला सबसे अहम सड़क मार्ग है. लेकिन सर्दियों के दौरान यहां भारी बर्फबारी और हिमस्खलन होता है. कई बार बर्फ की मोटी परत जमने के कारण सड़क पूरी तरह बंद करनी पड़ती है. आमतौर पर नवंबर से अप्रैल या मई तक यह रूट प्रभावित रहता है. कई बार तो तकरीबन 6 महीने तक इस रूट पर आवाजाही बंद करनी पड़ती है. ऐसे में लद्दाख की रोड कनेक्टिविटी काफी हद प्रभावित होती है. यहां तक की रोजमर्रा के जरूरी सामानों को पहुंचाने में भी दिक्कत होती है.
मौजूदा समय में जोजिला दर्रे को पार करने में मौसम और सड़क की स्थिति के आधार पर डेढ़ घंटे या उससे अधिक समय लग सकता है. कई बार ट्रैफिक जाम और खराब मौसम के कारण यह समय और बढ़ जाता है. सरकार का दावा है कि, यह टनल शुरू होने के बाद यही सफर लगभग 15 से 30 मिनट में पूरा किया जा सकेगा. इससे यात्रियों का समय बचेगा और फ्यूल की खपत भी कम होगी.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार Zojila Tunnel प्रोजेक्ट की लागत करीब 6,800 करोड़ रुपये है. इतनी ऊंचाई और कठिन परिस्थितियों में सुरंग बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण काम माना जाता है. निर्माण के दौरान इंजीनियरों को कठोर चट्टानों, बर्फीले मौसम और भूस्खलन जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. यह टनल सिर्फ यात्रा को आसान नहीं बनाएगा बल्कि लोकल इकोनॉमी को भी रफ्तार देने में अहम भूमिका निभाएगा.
कश्मीर से लद्दाख और लद्दाख से कश्मीर तक सामान की आवाजाही पूरे साल जारी रह सकेगी. फल, सब्जियां, दवाइयां, फ्यूल और अन्य जरूरी सामान समय पर पहुंच सकेंगे. इससे ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट कम होगी और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा. स्थानीय कारोबारियों को नए अवसर मिलेंगे और रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे.
लद्दाख देश के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है. लेकिन सर्दियों में सड़क बंद होने से पर्यटकों की संख्या कम हो जाती है. टनल बनने के बाद पूरे साल टूरिस्ट सीधे सड़क मार्ग से लद्दाख पहुंच सकेंगे. इससे होटल, टैक्सी, रेस्टोरेंट और पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसायों को बड़ा फायदा मिलेगा. स्थानीय लोगों की आय बढ़ने की भी उम्मीद है.

Zojila Tunnel का रणनीतिक महत्व भी बहुत बड़ा है. लद्दाख भारत का संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र है. सेना के लिए जवानों, हथियारों, फ्यूल और जरूरी सामग्री को सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचाना बेहद जरूरी होता है. अभी खराब मौसम के कारण कई बार आवाजाही प्रभावित होती है. टनल बनने के बाद सेना पूरे साल तेज और सुरक्षित तरीके से अपनी लॉजिस्टिक जरूरतें पूरी कर सकेगी. इससे राष्ट्रीय सुरक्षा भी मजबूत होगी.
सरकार का कहना है कि, ये टनल आधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे, फायर सेफ्टी सिस्टम, इमरजेंसी कम्युनिकेशन नेटवर्क और अन्य सेफ्टी फेसिलिटी से लैस होगा. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्पेशल अरेंजमेंट किए जाएंगे. ताकि इस टनल से गुजरने वाले को किसी भी तरह की परेशानी न हो. साथ सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी और डिजिटल निगरानी इस टनल को सेफ बनाने में पूरी मदद करेगी.

ब्रेकथ्रू पूरा होने के बाद अब इस प्रोजेक्ट का फिनिशिंग वर्क तेजी से आगे बढ़ेगा. सरकार का लक्ष्य अगले कुछ सालों में इस सुरंग को पूरी तरह तैयार कर आम लोगों के लिए शुरू करना है. इसके शुरू होने के बाद कश्मीर और लद्दाख के बीच कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा. Zojila Tunnel को केवल एक रोड प्रोजेक्ट नहीं बल्कि कश्मीर और लद्दाख की नई ऑल-वेदर लाइफलाइन माना जा रहा है. यह सुरंग उन लाखों लोगों के जीवन को आसान बनाएगी जो हर साल खराब मौसम और बंद रास्तों की परेशानी झेलते हैं. 6 महीने तक बंद रहने वाला मार्ग अब सालभर खुला रहेगा.