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गंगा एक्सप्रेसवे

गंगा एक्सप्रेसवे

गंगा एक्सप्रेसवे

गंगा एक्सप्रेसवे, उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे है. इसे नेशनल एक्सप्रेसवे एक्स यानी एनई एक्स के नाम से भी जाना जाता है. यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को आपस में जोड़ने की योजना का हिस्सा है. इसका मुख्य मार्ग मेरठ से प्रयागराज तक बनाया गया है.

गंगा एक्सप्रेसवे के पहले चरण की लंबाई करीब 594 किलोमीटर है. यह छह लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है. इसका मार्ग उत्तर प्रदेश के कई जिलों से होकर गुजरता है. एक्सप्रेसवे की योजना गंगा नदी के आसपास के क्षेत्र से जुडे प्रमुख इलाकों को बेहतर सड़क संपर्क देने के उद्देश्य से तैयार की गई है.

इस परियोजना की शुरुआत का प्रस्ताव वर्ष 2007 में रखा गया था. उस समय उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने ग्रेटर नोएडा से बलिया तक एक्सप्रेसवे बनाने की योजना सामने रखी थी. लंबे समय तक परियोजना पर काम आगे नहीं बढ़ सका. वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में इस परियोजना को फिर से आगे बढ़ाया गया.

परियोजना के पहले चरण के लिए वर्ष 2020 में दो हजार करोड़ रुपये के शुरुआती बजट का प्रावधान किया गया था. उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी यूपीईआईडीए को परियोजना की जिम्मेदारी दी गई. वर्ष 2021 में परियोजना की अनुमानित लागत करीब 37,350 करोड़ रुपये बताई गई थी. इसमें भूमि अधिग्रहण की लागत करीब 9,500 करोड़ रुपये शामिल थी.

गंगा एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया वर्ष 2019 में शुरू हुई और इसका अधिकांश हिस्सा वर्ष 2021 तक पूरा कर लिया गया. इसी वर्ष पर्यावरण संबंधी मंजूरी भी प्राप्त हुई. उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए करीब 36,230 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी.

18 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाहजहांपुर में परियोजना की आधारशिला रखी. इसके बाद अप्रैल 2022 में निर्माण कार्य शुरू हुआ. पहले चरण के निर्माण को 12 पैकेज में बांटा गया. इन पैकेज पर डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट और ट्रांसफर यानी डीबीएफओटी मॉडल के तहत काम किया गया.

गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना को दो चरणों में विकसित करने की योजना है. पहला चरण मेरठ से प्रयागराज तक है. दूसरे चरण में करीब 453 से 455 किलोमीटर के विस्तार की योजना है. इसमें दो प्रमुख स्पर शामिल हैं.

पहला विस्तार मेरठ से हरिद्वार तक प्रस्तावित अपर गंगा कैनाल एक्सप्रेसवे है. इसकी लंबाई करीब 110 किलोमीटर बताई गई है. यह बुलंदशहर, मेरठ और हरिद्वार क्षेत्र को जोड़ने वाली प्रस्तावित कड़ी होगी. हरिद्वार में इसका संपर्क चार धाम हाईवे और चार धाम रेलवे से जोड़ने की योजना है. इस मार्ग का संबंध दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के सहारनपुर-हरिद्वार स्पर से भी प्रस्तावित है.

दूसरा विस्तार प्रयागराज से बलिया तक प्रस्तावित है. इसकी लंबाई करीब 314 किलोमीटर है. यह मार्ग प्रयागराज से आगे मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी, चंदौली और बलिया क्षेत्र से जुड़ने की योजना में शामिल है.

गंगा एक्सप्रेसवे की पूरी परियोजना उत्तर प्रदेश में लंबी दूरी के सड़क संपर्क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार से जुड़ूी है. परियोजना के अलग-अलग चरणों और विस्तार मार्गों पर निर्माण तथा आगे की प्रक्रिया संबंधित सरकारी एजेंसियों की योजनाओं के अनुसार जारी है.

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