अमेरिका और ईरान के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव और बढ़ गया है. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने जहाजों और शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जुड़े मामलों में ईरानी संगठनों के साथ कोई जानकारी साझा की, तो उन पर अमेरिकी प्रतिबंध या दूसरी कार्रवाई हो सकती है.
अमेरिकी ट्रेजरी के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल यानी ओएफएसी ने कहा कि ईरानी संस्थाओं की ओर से मांगी गई जानकारी देने पर प्रतिबंधों का खतरा बना रहेगा, भले ही इसके बदले कोई भुगतान न किया गया हो. इससे पहले अमेरिका ईरान को हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए टोल या किसी तरह का शुल्क देने को लेकर भी चेतावनी दे चुका है.
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अमेरिका ने खास तौर पर तीन ईरानी संस्थाओं का नाम लिया है. इनमें पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी, पर्शियन गल्फ मरीन इंश्योरेंस कंपनी और हॉर्मुजसेफ मरीन सर्विसेज अथॉरिटी शामिल हैं.
'इकोनॉमिक डी-डे' के तहत ईरान को चेतावनी
यह चेतावनी अमेरिका की उस मुहिम के बीच आई है, जिसे वॉशिंगटन ने 'इकोनॉमिक डी-डे' नाम दिया है. अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर उसके आर्थिक संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को सीमित करना चाहता है.
वहीं ईरान ने भी हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर दबाव बढ़ा दिया है. ईरानी संस्था ने दावा किया कि 46 जहाजों ने उसके ट्रांजिट प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है. इन जहाजों को भविष्य में जुर्माना, हिरासत या जब्ती जैसी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
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जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट
इस पूरे विवाद का असर दुनिया के अहम समुद्री रास्तों में से एक हॉर्मुज स्ट्रेट पर पड़ रहा है. संघर्ष के दौरान यहां जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है. इससे तेल और एलएनजी की वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.
ईरान ने अमेरिका की कार्रवाई को 'आर्थिक आतंकवाद' बताया है और जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है. यानी हॉर्मुज स्ट्रेट अब सिर्फ समुद्री रास्ते का विवाद नहीं, बल्कि अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक जंग का बड़ा मोर्चा बनता जा रहा है.
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