ग्रीनलैंड पर आर-पार: ट्रंप की टिप्पणी के बाद डेनमार्क जाएंगे मार्को रुबियो, अधिकारियों से करेंगे बात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लेने की कोशिशें तेज कर दी हैं. रक्षा और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ट्रंप प्रशासन अब कूटनीतिक दबाव बना रहा है. इसी सिलसिले में अगले हफ्ते अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और डेनमार्क के अधिकारियों के बीच एक बड़ी बैठक होगी.

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अगले हफ्ते डेनमार्क जाएंगे मार्को रुबियो. (File photo: ITG) अगले हफ्ते डेनमार्क जाएंगे मार्को रुबियो. (File photo: ITG)

aajtak.in

  • वांशिगटन,
  • 07 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:30 PM IST

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को घोषणा की कि वह अगले हफ्ते डेनिश अधिकारियों से मुलाकात करेंगे. बताया जा रहा है कि वह अधिकारियों से ग्रीनलैंड पर चर्चा करेंगे, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण हासिल करने के अपने प्रयास को फिर से तेज कर दिया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड का अमेरिका के पास होना बहुत जरूरी है. इसके लिए जेफ लैंड्री को विशेष दूत भी नियुक्त किया गया है. इसके इतर डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने इंटरनेशनल कानून का हवाला देते हुए अधिग्रहण के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है.

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राष्ट्रपति के पास हैं सभी अधिकार

मीडिया से बातचीत में रूबियो से पूछा गया कि क्या वाशिंगटन नाटो गठबंधन को जोखिम में डालकर सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहा है. रूबियो ने जोर देकर कहा कि ऐसे फैसले लेने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति के पास है.

उन्होंने कहा, 'अगर राष्ट्रपति अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं तो हर राष्ट्रपति के पास सैन्य साधनों से उसे संबोधित करने का विकल्प होता है. लेकिन एक राजनयिक के रूप में हम हमेशा अलग तरीकों से समाधान पसंद करते हैं- जैसा हमने वेनेजुएला में किया.'

रूबियो ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक रूप से किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति के पास सुरक्षा खतरे के मामले में सैन्य विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन प्रशासन की प्राथमिकता राजनयिक माध्यमों से विवाद सुलझाने की है.

सुरक्षा के लिए जरूरी है ग्रीनलैंड

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गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए पिछले कुछ महीनों में बार-बार ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की इच्छा जताई है. ट्रंप ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा, 'हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है. अगर आप ग्रीनलैंड को देखें तो उनके तटों पर आपको रूस और चीनी के जहाज खड़े मिलेंगे. हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इसकी हमें जरूरत है और ये हमें चाहिए, क्योंकि ये हमारे लिए बहुत जरूरी है'

विशेष दूत नियुक्त

ट्रंप प्रशासन ने लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत नियुक्त किया है, जिससे आर्कटिक क्षेत्र पर राजनयिक ध्यान और बढ़ गया है.

एक वरिष्ठ सहयोगी ने प्रशासन के रुख को मजबूत करते हुए कहा, 'राष्ट्रपति महीनों से स्पष्ट हैं कि ग्रीनलैंड अमेरिका की समग्र सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होना चाहिए. ये वर्तमान प्रशासन की शुरुआत से और पिछले ट्रंप प्रशासन से ही अमेरिकी सरकार की औपचारिक स्थिति रही है.'

डेनमार्क की कड़ी आपत्ति

उधर, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने ट्रंप के रुख को पूरी तरह खारिज किया है. डेनमार्क की पीएम मेटे फ्रेडरिक्सन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने संयुक्त बयान में कहा, 'हमने ये बात पहले भी कही थी और फिर इसे दोहराते हैं. राष्ट्रीय सीमाएं और राज्यों की संप्रभुता इंटरनेशनल कानून में निहित हैं. आप किसी दूसरे देश को कब्जा नहीं कर सकते, भले ही इंटरनेशनल सुरक्षा का तर्क दिया जाए.'

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फ्रेडरिक्सन ने अमेरिकी कब्जे की संभावना को खारिज करते हुए कहा, 'अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की जरूरत के बारे में बात करना बिल्कुल बेतुका है. अमेरिका को डेनिश साम्राज्य के तीनों देशों में से किसी पर भी कब्जा करने का कोई अधिकार नहीं है.'

व्हाइट हाउस का रुख

व्हाइट हाउस के वरिष्ठ सहायक के मुताबिक, ग्रीनलैंड को अमेरिकी सुरक्षा तंत्र में शामिल करना सरकार की औपचारिक नीति है. ये रुख ट्रंप के पिछले कार्यकाल से ही कायम है. प्रशासन का मानना है कि द्वीप की भौगोलिक स्थिति अमेरिकी सुरक्षा के लिए बेहद अहम है. अगले हफ्ते होने वाली रुबियो की बैठक कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश है. अमेरिका अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रख रहा है, जबकि डेनमार्क अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए डटा हुआ है.

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