अमेरिका ने सऊदी अरब और कतर में अपने सैन्य सुरक्षा इंतजाम बढ़ा दिए हैं. अमेरिकी सेना ने दोनों देशों में दो अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल बैटरियां भेजी हैं. इनका इस्तेमाल अहम तेल और गैस ठिकानों की सुरक्षा के लिए किया जाएगा. यह जानकारी अमेरिकी अधिकारियों ने दी है.
अमेरिका ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब ईरान के खिलाफ फिर से बड़े सैन्य अभियान की आशंका जताई जा रही है. सऊदी अरब और कतर को डर है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो ईरान जवाबी कार्रवाई कर सकता है. ऐसे में उसके निशाने पर इन देशों के तेल और गैस ठिकाने भी आ सकते हैं.
अमेरिका इन दोनों सहयोगी देशों को भरोसा दिलाना चाहता है कि उनके अहम ऊर्जा ठिकानों की सुरक्षा की जाएगी. इससे पहले दोनों देशों ने ईरान पर बड़े हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने अपनी चिंता जताई थी.
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सऊदी और कतर में एक-एक पैट्रियट बैटरी पहुंची
दरअसल, अमेरिकी सेना ने पिछले महीने सऊदी अरब में एक अतिरिक्त पैट्रियट बैटरी भेजी थी. इसे एक अहम तेल ठिकाने की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया. इसके अलावा कतर में भी एक पैट्रियट बैटरी भेजी गई. इसका मकसद एक अहम प्राकृतिक गैस ठिकाने की सुरक्षा करना है.
अमेरिकी सेना के लिए सऊदी अरब की एयरस्पेस भी अहम है. अगर ईरान के खिलाफ फिर से बड़ा सैन्य अभियान शुरू होता है तो अमेरिका को इसका इस्तेमाल करना पड़ सकता है. ऐसे में सऊदी अरब की ऊर्जा सुविधाओं की सुरक्षा महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
ईरान पर फिर हमले की तैयारी?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि वह आने वाले हफ्तों में ईरान पर फिर से बमबारी शुरू करने पर विचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब ईरान के सामने समझौते का विकल्प है. अगर समझौता नहीं होता तो स्थिति और बिगड़ सकती है. इसी वजह से अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है. क्षेत्र में और युद्धपोत, लड़ाकू विमान और सैनिक भेजे जा रहे हैं.
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अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि US थियोडोर रूजवेल्ट एयरक्राफ्ट कैरियर रविवार को सैन डिएगो से मध्य पूर्व के लिए रवाना हुआ. इसके नवंबर के मध्य तक क्षेत्र में पहुंचने की उम्मीद है.
इसके अलावा US जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश और US जॉर्ज वॉशिंगटन पहले से क्षेत्र में मौजूद हैं. इससे मध्य पूर्व में तीन एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की मौजूदगी हो सकती है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि रूजवेल्ट किसी मौजूदा जहाज की जगह लेगा या अतिरिक्त तैनाती होगी. अमेरिका ने मरीन सैनिकों के एक बड़े समूह को भी मध्य पूर्व भेजना शुरू किया है. इसके नवंबर के अंत तक क्षेत्र में पहुंचने की उम्मीद है.
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