रूस-अमेरिका-यूक्रेन के बीच शांति के लिए एक बार फिर बातचीत वाला माहौल बनने की संभावना है. क्रेमलिन ने सोमवार को कहा कि वह तीनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू होने की संभावना से इनकार नहीं करता है. हालांकि, रूस ने साफ किया कि फिलहाल बातचीत की तारीख और जगह के बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. क्रेमलिन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संभावित फोन कॉल को लेकर भी प्रतिक्रिया दी. क्रेमलिन ने कहा कि अमेरिकी दूतों की बैठकों के बाद पुतिन और ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की दिशा में अमेरिकी कोशिशों की रूस ने सराहना भी की है. क्रेमलिन ने कहा, 'हम राष्ट्रपति ट्रंप की शांति के प्रति प्रतिबद्धता के लिए आभारी हैं.' इसके साथ ही रूस ने अमेरिकी दूतों की ओर से किए जा रहे प्रयासों को भी महत्वपूर्ण बताया. क्रेमलिन ने कहा कि वह अमेरिकी दूतों की कोशिशों को बेहद सम्मान की नजर से देखता है.
वहीं, रूस-अमेरिका-यूक्रेन के बीच संभावित त्रिपक्षीय वार्ता को लेकर क्रेमलिन ने कहा कि उसे अभी तक कीव में हुए संपर्कों के बारे में जानकारी नहीं मिली है. क्रेमलिन ने कहा, 'हमें अभी तक कीव में हुए संपर्कों के संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली है.' रूस का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं. हालांकि, संभावित त्रिपक्षीय बातचीत कब और कहां होगी, इसे लेकर फिलहाल कोई औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है.
बता दें कि यूक्रेन में जारी युद्ध को खत्म करने और शांति समझौते की कोशिशों के बीच अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर रविवार को कीव पहुंचे थे. रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद दोनों अमेरिकी दूतों की यह पहली आधिकारिक यूक्रेन यात्रा है. इससे पहले दोनों ने मॉस्को में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत की थी. पुतिन के साथ उनकी बैठक तीन घंटे से ज्यादा समय तक चली थी. मॉस्को में हुई बातचीत के बाद दोनों अमेरिकी दूत यूक्रेनी पक्ष से चर्चा के लिए कीव पहुंचे थे.
अमेरिका की ओर से रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने की कोशिशों में इसे एक नए चरण के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि शांति समझौते की राह में दोनों पक्षों की शर्तों को लेकर अभी भी बड़ा अंतर बना हुआ है. यूक्रेन अब तक रूस की उस मांग को खारिज करता रहा है, जिसमें मॉस्को चाहता है कि यूक्रेनी सेना पूर्वी डोनेट्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों के उन हिस्सों से भी पीछे हट जाए, जो अभी यूक्रेन के नियंत्रण में हैं.
aajtak.in