शोक में डूबे नेपाल को फिलहाल राहत, चीन बॉर्डर के पास बनी झील फटने का खतरा टला

चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से बनी झील के अचानक फटने का खतरा फिलहाल कम हो गया है. दरअसल, झील का पानी धीरे-धीरे बाहर निकल रहा है. इसका आकार घट रहा है. अधिकारी रडार और ड्रोन के जरिए झील पर नजर रख रहे हैं. दूसरी बड़ी झील की भी पहचान हुई है, जिस पर भी नजर रखी जा रही है.

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चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से बनी झील का खतरा कम हो गया है. (File Photo-PTI) चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से बनी झील का खतरा कम हो गया है. (File Photo-PTI)

aajtak.in

  • बीजिंग,
  • 29 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:38 PM IST

चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से बनी झील के अचानक फटने का खतरा फिलहाल घट गया है. चीनी अधिकारियों के मुताबिक झील का पानी धीरे-धीरे बाहर निकल रहा है. इसके चलते झील का आकार भी कम हो रहा है.

दरअसल, यह झील उसी इलाके में बनी है, जहां बुधवार को ग्लेशियर टूटने के बाद भीषण बाढ़ आई थी. इस आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और हजारों लोग अब भी लापता हैं.

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चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने बताया कि गुरुवार से शनिवार सुबह तक मिले सैटेलाइट चित्रों में झील के पानी में लगातार कमी दिखाई दी है. यह झील चीन के तिब्बत क्षेत्र और नेपाल की सीमा पर दो नदियों के मिलने वाली जगह के पास बनी है. शनिवार दोपहर तक झील के कुछ हिस्सों में जमीन भी दिखाई देने लगी थी.

मंत्रालय के अनुसार शनिवार सुबह झील का सतही क्षेत्र करीब 99,000 वर्ग मीटर रह गया था. यह लगभग 14 फुटबॉल मैदानों के बराबर है. गुरुवार के मुकाबले झील का क्षेत्र करीब 21,000 वर्ग मीटर कम हुआ है. झील से पानी प्राकृतिक रूप से बाहर निकल रहा है. इससे अचानक झील फटने की आशंका पहले के मुकाबले कम हुई है. हालांकि अधिकारी अभी भी लगातार निगरानी कर रहे हैं.

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बाढ़ के बाद बढ़ी थी दूसरी आपदा की आशंका

बुधवार को ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूट गया था. इसके बाद चट्टान, बर्फ, कीचड़ और मलबे के साथ पानी तेजी से नीचे की ओर बहा. इसने हिमालयी नदी तंत्र में भारी तबाही मचाई. चीन और नेपाल को जोड़ने वाला एक सीमा बंदरगाह परिसर भी इस आपदा में बह गया.

बाढ़ के बाद अधिकारियों और विशेषज्ञों ने दूसरी आपदा की आशंका जताई थी. ग्लेशियर के मलबे से बनी झील में पानी बढ़ने पर इसके अचानक फटने का खतरा था. ऐसा होने पर नीचे की ओर राहत और बचाव अभियान भी प्रभावित हो सकता था.

विशेषज्ञों के मुताबिक अगर झील में अगले दो से तीन दिनों में इसका जलस्तर पूरी तरह घट गया तो नीचे के इलाकों में बचाव अभियान सुरक्षित तरीके से जारी रखा जा सकता है.

अधिकारियों ने कहा कि झील में किसी तरह की असामान्य स्थिति दिखाई देने पर बचाव दलों को तुरंत इसकी जानकारी दी जाएगी. जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर हटाया जा सकता है. 30 मिनट से ज्यादा पहले चेतावनी देने की व्यवस्था भी की गई है.

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निगरानी के लिए इलाके में रडार और ड्रोन तैनात 

चीन की सरकारी इंजीनियरिंग और बचाव कंपनी चाइना एनेंग ने गुरुवार से झील की निगरानी शुरू कर रखी है. कंपनी ने इलाके में रडार और ड्रोन तैनात किए हैं. इनकी मदद से झील पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है.

शुक्रवार को झील से पानी के शुरुआती बहाव के कारण बचाव अभियान को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा था. बाद में स्थिति का आकलन किया गया. इसके बाद जोखिम को फिलहाल नियंत्रण में माना गया और अभियान दोबारा जारी रखने की अनुमति दी गई.

अधिकारियों ने ग्लेशियर टूटने वाली जगह के नीचे एक और बड़ी झील की पहचान की है. एक इंजीनियर के अनुसार इसका क्षेत्र 1.20 लाख वर्ग मीटर से ज्यादा है. यह झील मौजूदा झील से भी बड़ी है. इसलिए इस पर भी लगातार नजर रखी जा रही है.

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इस बीच चीन में आपदा से मरने वालों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है. सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक 554 लोग अब भी लापता हैं. अधिकारी लगातार हालात पर नजर रख रहे हैं. उनका मुख्य उद्देश्य नीचे के इलाकों में राहत और बचाव कार्य को सुरक्षित रखना है.
 

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