पाकिस्तान की लाहौर हाईकोर्ट ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की तीन बहनों की नजरबंदी से जुड़े मामले में कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने इस मामले में दो बड़े सरकारी अधिकारियों को तलब किया है और अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को तय की है.
लाहौर हाईकोर्ट ने ये समंस तब जारी किए जब एक याचिका के जरिए अलीमा खान, नूरीन नियाजी और उज्मा खान की कोट लखपत जेल में लगातार जारी नजरबंदी को चुनौती दी गई.
ये याचिका अलीमा खान के बेटे शहर्रेज खान की ओर से दायर की गई थी, जिसमें पंजाब में सार्वजनिक व्यवस्था अध्यादेश, 1960 के तहत की गई इस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं.
नजरबंदी की अवधि खत्म, फिर भी हिरासत में इमरान की बहनें
याचिकाकर्ता के वकील राणा मुदस्सर उमर ने अदालत को बताया कि तीनों बहनों की 30 दिन की नजरबंदी की अवधि 20 अक्टूबर को ही खत्म हो चुकी है. उन्होंने दलील दी कि तय समय सीमा खत्म होने के बाद भी उन्हें जेल में रखना पूरी तरह से गैरकानूनी है. वकील ने अदालत से अपील की कि वो जेल अधीक्षक को निर्देश दें कि वो नजरबंद महिलाओं को अदालत के सामने पेश करें और उन्हें तुरंत रिहा करें.
इस मामले की सुनवाई करते हुए लाहौर हाईकोर्ट के जस्टिस अभेर गुल खान ने पंजाब के गृह सचिव और कोट लखपत जेल के अधीक्षक को नोटिस जारी किया है. अदालत ने दोनों अधिकारियों को 28 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने और अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.
सितंबर से ही जेल में हैं तीनों
बता दें कि इमरान खान की इन तीनों बहनों को सितंबर महीने में उस वक्त हिरासत में लिया गया था जब उनकी पार्टी PTI ने संस्थापक नेता की रिहाई के लिए देशव्यापी प्रदर्शनों की योजना बनाई थी. पार्टी का आरोप है कि सरकार राजनीतिक बदले की भावना से उनके नेताओं और परिवार के सदस्यों पर कार्रवाई कर रही है.
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पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान साल 2023 से जेल में बंद हैं और उन पर भ्रष्टाचार और हिंसा भड़काने समेत सौ से ज्यादा मामले दर्ज हैं. वो फिलहाल रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं.
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