पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी, पूर्व CM नजरबंद, PTI के कई नेता हिरासत में

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू होने के बाद PTI नेताओं पर कार्रवाई हुई है. इस फैसले के बाद PTI नेताओं पर हुई कार्रवाई ने सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ा दिया है.

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शहबाज सरकार और PTI में टकराव बढ़ा. (Photo: Reuters) शहबाज सरकार और PTI में टकराव बढ़ा. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:09 PM IST

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी लागू होने के कुछ ही घंटे बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेताओं पर कार्रवाई की गई. पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष जुनैद अकबर को हिरासत में ले लिया गया, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर को उनके घर में नजरबंद कर दिया गया. यह वही प्रांत है, जहां इमरान खान की पार्टी PTI की निर्वाचित सरकार थी. इमरजेंसी लागू होने के बाद इस सरकार को निलंबित कर दिया गया है और प्रांत की जिम्मेदारी गवर्नर को सौंप दी गई है. इमरान खान पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री हैं और फिलहाल जेल में हैं. 

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पाकिस्तान की संघीय सरकार ने इमरजेंसी के पीछे सुरक्षा व्यवस्था बिगड़ने को वजह बताया है. दूसरी ओर, PTI इसे चुनी हुई सरकार और प्रांत के अधिकारों पर हमला बता रही है. ऐसे में सवाल है कि क्या यह फैसला सिर्फ आतंकवाद से निपटने के लिए लिया गया है या इसके पीछे इमरान खान की रिहाई को लेकर चल रहा सियासी संघर्ष भी एक वजह है?

इमरजेंसी के बाद PTI नेताओं पर कार्रवाई

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और संघीय कैबिनेट की सलाह के बाद खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी को मंजूरी दी. यह प्रांत PTI के शासन में है. इमरजेंसी लागू होने के कुछ ही समय बाद पूर्व मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर को डेरा इस्माइल खान में उनके घर पर नजरबंद कर दिया गया.

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PTI की खैबर पख्तूनख्वा इकाई ने सोशल मीडिया मंच X पर इसकी जानकारी देते हुए कार्रवाई की निंदा की. पार्टी ने कहा कि ऐसी कार्रवाई से उसे डराया नहीं जा सकता. रविवार को PTI नेता सोहेल अफरीदी और प्रांतीय अध्यक्ष जुनैद अकबर को भी हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई.

सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को बताया वजह

पाकिस्तान की संघीय सरकार का कहना है कि खैबर पख्तूनख्वा के कुछ जिलों में सुरक्षा की स्थिति बेहद खराब हो गई है. अफगानिस्तान की सीमा से लगे इस प्रांत में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) समेत कई हथियारबंद गुटों के हमले होते रहे हैं.

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि कुछ जिलों में हालात इतने खराब हैं कि शाम होने के बाद लोग अपने घरों से बाहर तक नहीं निकलते. प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, संघीय कैबिनेट ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में प्रांतीय सरकार के सहयोग पर भी सवाल उठाए हैं. वहीं, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का कहना है कि सुरक्षा बलों और आम नागरिकों पर हो रहे हमलों को देखते हुए सरकार चुप नहीं बैठ सकती. हालांकि, PTI ने आतंकवादी गुटों का समर्थन करने के आरोपों को खारिज किया है.

PTI बोली- यह लोकतंत्र और प्रांतीय अधिकारों पर हमला

PTI का कहना है कि इमरान खान की रिहाई की मांग और इस्लामाबाद तक मार्च की तैयारी के बीच सरकार पार्टी पर दबाव बना रही है. पार्टी के अध्यक्ष गोहर अली खान ने इमरजेंसी के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि इससे प्रांत के अधिकारों और संविधान से मिले हकों को नुकसान पहुंचेगा. वहीं, इमरान खान के करीबी सहयोगी जुल्फिकार बुखारी ने इस फैसले को इमरजेंसी की आड़ में तख्तापलट जैसा कदम बताया. PTI का कहना है कि लोगों के वोट से चुनी गई सरकार को हटाकर शांति कायम नहीं की जा सकती.

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इमरजेंसी से क्या बदलेगा?

पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार के मुताबिक, प्रांत के गवर्नर सलाहकार परिषद के साथ जिम्मेदारी संभालेंगे. यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर छह महीने के लिए बताई गई है. इससे निर्वाचित प्रांतीय सरकार की भूमिका सीमित हो सकती है.

पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 में खास परिस्थितियों में आपातकाल और प्रांतीय मामलों में संघीय हस्तक्षेप से जुड़े प्रावधान हैं. हालांकि, इमरजेंसी का मतलब यह नहीं है कि सभी मौलिक अधिकार अपने आप खत्म हो गए हैं. ऐसी व्यवस्था के लिए संवैधानिक प्रक्रिया और संसदीय निगरानी भी अहम हैं.

फिलहाल, पाकिस्तान सरकार इसे सुरक्षा से जुड़ा फैसला बता रही है, जबकि PTI इसे अपने राजनीतिक जनादेश को कमजोर करने की कोशिश मान रही है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इमरजेंसी का असर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित रहता है या इससे पाकिस्तान का सियासी टकराव और बढ़ता है.

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