इलाका उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया का बॉर्डर है. जगह-जगह लैंड माइंस लगे थे. काफी सुरक्षा वाला इलाका था. इसी दौरान एक जगह धमाका हुआ और दक्षिण कोरिया के तीन सैन्य अधिकारी जख्मी हो गए. इसके साथ ही दो पड़ोसियों के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है. सवाल है कि ये धमाका किसने किया. क्या लैंड माइंस से दक्षिण कोरियाई सैनिकों को टारगेट किया गया.
दक्षिण कोरियाई सरकार ने बताया कि यह धमाका 'डिमिलिटराइज़्ड ज़ोन' (DMZ) में एक अज्ञात ऑपरेशन के दौरान हुआ. यह दोनों देशों के बीच सीमा पर बना एक बफ़र ज़ोन है जिसे आम तौर पर DMZ कहा जाता है. मंत्रालय के अनुसार, धमाके की वजह का तुरंत पता नहीं चल सका.
इनमें से दो अधिकारियों को हेलीकॉप्टर से और तीसरे को पहले जमीन के रास्ते और फिर हेलीकॉप्टर से अस्पताल पहुंचाया गया. तीनों का इलाज सियोल के पास स्थित एक सैन्य अस्पताल में चल रहा है.
क्या लैंड माइन की वजह से हुआ धमाका?
दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्रालय ने बताया कि विस्फोट उस समय हुआ जब सेना DMZ के भीतर एक ऑपरेशन को अंजाम दे रही थी. हालांकि, यह ऑपरेशन किस तरह का था, इसकी जानकारी नहीं दी गई है. अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि धमाका किस वजह से हुआ. दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने फिलहाल यह पुष्टि नहीं की है कि विस्फोट उत्तर कोरिया की ओर से बिछाई गई किसी लैंड माइन की वजह से हुआ था.
हालांकि, लैंड माइन की आशंका इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि उत्तर कोरिया हाल के महीनों में सीमा पर अपनी सैन्य तैयारियां लगातार मजबूत कर रहा है. रिपोर्टों के मुताबिक उत्तर कोरियाई सैनिकों ने सीमा के आसपास नई बारूदी सुरंगें, एंटी-टैंक बैरियर और दूसरी सैन्य किलेबंदी तैयार की है. दोनों देशों के बीच रिश्ते लंबे समय से बेहद तनावपूर्ण हैं.
दुनिया की सबसे खतरनाक सीमाओं में शामिल है DMZ
दक्षिण और उत्तर कोरिया को अलग करने वाला DMZ करीब 248 किलोमीटर लंबा और 4 किलोमीटर चौड़ा इलाका है. यह दुनिया की सबसे भारी सुरक्षा वाली सीमाओं में शामिल है. यहां और इसके आसपास करीब 20 लाख लैंड माइन होने का अनुमान है. सीमा पर कंटीले तार, टैंक रोधी अवरोध और दोनों तरफ बड़ी संख्या में सैन्य बल तैनात हैं.
DMZ कोरियाई युद्ध की विरासत है. 1950 से 1953 तक चले युद्ध के बाद दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम तो हुआ, लेकिन औपचारिक शांति संधि नहीं हुई. यही वजह है कि तकनीकी रूप से दोनों देश अब भी युद्ध की स्थिति में माने जाते हैं.
बॉर्डर पर होता रहता है टकराव
हाल के महीनों में सैन्य सीमा रेखा यानी Military Demarcation Line (MDL) के आसपास उत्तर कोरियाई सैनिकों की गतिविधियों को लेकर दक्षिण कोरिया में चिंता बढ़ी है. दक्षिण कोरियाई सेना ने मीडिया की उन रिपोर्टों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, जिनमें दावा किया गया था कि अगस्त में फ्रंटलाइन ऑपरेशन के दौरान उत्तर कोरियाई सैनिक 20 से ज्यादा बार MDL पार कर गए.
इससे पहले अप्रैल 2025 में करीब 10 उत्तर कोरियाई सैनिक पूर्वी DMZ में सैन्य सीमा रेखा पार कर दक्षिण की ओर बढ़ गए थे. दक्षिण कोरियाई सेना ने पहले ऑडियो चेतावनी दी और फिर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं, जिसके बाद उत्तर कोरियाई सैनिक वापस लौट गए थे. जून 2024 में भी उत्तर कोरियाई सैनिकों के तीन बार सीमा पार करने पर दक्षिण कोरिया को चेतावनी फायरिंग करनी पड़ी थी.
उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने हाल के वर्षों में दक्षिण कोरिया के साथ लगभग सभी सहयोग और कूटनीतिक संपर्कों को रोक दिया है. उन्होंने सियोल को अपना सबसे शत्रुतापूर्ण दुश्मन भी घोषित किया है. ऐसे में DMZ में हुआ यह धमाका दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव के बीच नई चिंता बढ़ा रहा है।
उत्तर कोरिया की लैंड माइंस पहले भी दक्षिण कोरिया के लिए खतरा बन चुकी हैं. कई बार भारी बारिश के दौरान बारूदी सुरंगें बहकर दक्षिण कोरियाई इलाके में पहुंच गई हैं, जिससे लोगों की मौत और चोटें हुई हैं. अगस्त 2015 में भी लैंड माइन विस्फोट में दक्षिण कोरिया के दो सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए थे और इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था.
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