नेपाल में आई भीषण आपदा के बीच तनकर खड़ा हरे घर की खूब चर्चा हुई. लेकिन नेपाल में वो ऐसा इकलौता घर नहीं है जो इस आपदा में भी डटा हुआ है. ढूंगे बाजार में सैलाब ने जमकर तबाही मचाई है, लेकिन इस तबाही के बीच ऐसे कई चमत्कारी घर अपनों के लिए अब भी सुरक्षित खड़े हैं.
भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के रौद्र रूप ने पूरे इलाके को तहस-नहस कर दिया. जो मकान सीधे नदी की तेज धारा के बीचों-बीच आए, वो इस तबाही को झेल गए. नदी के मुहाने पर 12 से 15 फीट तक मलबा जमा हो गया, इसके बावजूद कई बहुमंजिला इमारतें मजबूती से खड़ी रहीं.
धारा के ठीक पास स्थित कुछ होटलों की पहली और दूसरी मंजिल पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुकी हैं, लेकिन पूरी इमारत ढहने से बच गई. समय रहते लोगों को सुरक्षित निकलने का मौका मिल गया और वो अपनी जान बचाने के लिए छतों की ओर भागे और वहां से रेस्क्यू कर लिए गए.
मजबूत बनावट या वैज्ञानिक तरीका?
भीषण त्रासदी में इन इमारतों का महफूज रहना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है. पहाड़ों पर हुए कुछ निर्माण कार्यों की मजबूती और घरों की वैज्ञानिक बनावट ने सैलाब के भीषण प्रवाह को रोक लिया. जहां एक तरफ ऊंचाई पर स्थित घर ताश के पत्तों की तरह बिखर गए, वहीं दूसरी तरफ सैलाब के सीधे रास्ते में खड़े मकान और कृषि ब्लॉक की इमारतें आपदा के इस थपेड़े को सह गईं.
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हालांकि जो मकान और दुकानें सड़क के किनारे ऊंचाई पर स्थित थीं, वो मलबे और पानी के दबाव को नहीं संभाल सकीं. ऊंची जगहों पर बनी दुकानें और कई मंजिला मकान पूरी तरह से ढह गए. कई इमारतों की ऊपरी मंजिलें और दीवारें भरभराकर गिर गईं.
आशुतोष मिश्रा