अरब का एक देश चुपके चुपके अपने राजनीतिक विरोधियों को मौत की सजा दे रहा है. ह्यूमन राइट्स वॉच ने बुधवार को कहा कि अगस्त के आखिर से अब तक लीबिया में मिलिट्री ट्रायल के बाद कम से कम 31 लोगों को मौत की सजा दे दी गई है. 2010 के बाद से देश में मौत की सज़ा दिए जाने का यह पहला सार्वजनिक मामला है. इन्हें फायरिंग स्क्वैड ने गोलियां मारी है.
मानव अधिकारों के लिए काम करने वाले इस ग्रुप ने कहा कि उसने 10 सितंबर तक खुद को 'लीबियन नेशनल आर्मी' (LNA) कहने वाले संगठन की ओर से दी गई मौत की सज़ाओं का रिकॉर्ड रखा है. उसने चेतावनी दी कि गेरनाडा मिलिट्री जेल में बंद कम से कम 50 और लोगों को भी जल्द ही मौत की सज़ा दिए जाने का खतरा है.
LNA, जिसे 'लीबियन अरब आर्म्ड फोर्सेस' के नाम से भी जाना जाता है, पूर्वी लीबिया में स्थित एक मिलिट्री फ़ोर्स है. इसकी कमान जनरल खलीफ़ा हिफ़्टर के हाथों में है और यह पूर्वी और दक्षिणी लीबिया को कंट्रोल करती है.
ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) के मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका के डिप्टी डायरेक्टर बासम ख्वाजा ने एक रिपोर्ट में कहा, "लीबियन अरब आर्म्ड फोर्सेस गुप्त ट्रायल के बाद लोगों को मौत की सज़ा दे रही है. ये ट्रायल ऐसे कबूलनामों पर आधारित होते हैं जो कथित तौर पर टॉर्चर करके हासिल किए जाते हैं. ये ट्रायल ऐसी अदालतों में होते हैं जिनके बारे में लीबिया की अपनी सुप्रीम कोर्ट कह चुकी है कि उन्हें आम नागरिकों का ट्रायल नहीं करना चाहिए." उन्होंने आगे कहा, "ऐसे हालात में दी गई मौत की सजा एक ऐसी नाइंसाफ़ी है जिसे सुधारा नहीं जा सकता."
ह्यूमन राइट्स वॉच ने सेना से कहा कि वह तुरंत फांसी देना बंद करे और मौत की सज़ा पर रोक लगाए.
अधिकारों के लिए काम करने वाले इस ग्रुप के अनुसार LNA के मिलिट्री प्रॉसिक्यूटर ने अगस्त के आखिर में बताया कि हत्या और आतंकवाद से जुड़े आरोपों में दोषी पाए जाने के बाद एक फायरिंग स्क्वाड ने 10 लोगों को गोली मार कर मौत की नींद सुला दिया.
बुधवार की रिपोर्ट के अनुसार, जिन लोगों को फायरिंग स्क्वाड ने गोली मारकर मौत की सजा दी, उनमें से कई को 2014 और 2018 के बीच LNA और विरोधी हथियारबंद गुटों के बीच संघर्ष के दौरान या उसके बाद डर्ना और बेनगाज़ी शहरों में गिरफ्तार किया गया था.
सितंबर में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बताया कि पूर्वी लीबिया में मिलिट्री कोर्ट ने 2018 और 2021 के बीच सैकड़ों आम नागरिकों को गुप्त मुकदमों में दोषी ठहराया; इन मुकदमों में उन लोगों को निशाना बनाया गया जिन पर LNA की आलोचना करने का आरोप था. इस दौरान कम से कम 22 लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई. ग्रुप ने यह भी कहा कि कथित तौर पर उनसे जुर्म कबूल करवाने के लिए टॉर्चर का इस्तेमाल किया गया.
अंतरराष्ट्रीय अधिकार समूहों ने बार-बार लोगों को हिरासत में लेने और कुछ मामलों में अनुचित मुकदमों के बाद उन्हें मौत की सजा देने की आलोचना की है. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि लीबिया में कई तरह के अपराधों के लिए मौत की सज़ा का प्रावधान है, और पूर्व और पश्चिम दोनों जगहों की अदालतें "फर्जी मुकदमों" के बाद हत्या के मामलों में मौत की सज़ा सुना रही हैं.
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