अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयानों में अंतर सामने आया है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चुनावी हार के लिए ईरान के साथ युद्ध को सबसे बड़ी वजह बताया है. उन्होंने कहा कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप और उनका समर्थन करने वाले बड़ी संख्या में मतदाताओं ने इस बार डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट दिया. वेंस के मुताबिक, ईरान युद्ध, बढ़ती महंगाई, 'अमेरिका फर्स्ट' नीति को लेकर नाराजगी और इजरायल के साथ अमेरिकी संबंधों ने मतदाताओं के फैसले को प्रभावित किया.
अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मिडटर्म इलेक्शन में डेमोक्रेटिक पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए संसद के दोनों सदनों, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट पर नियंत्रण हासिल कर लिया है. इस हार के बाद रिपब्लिकन पार्टी के भीतर चुनावी नतीजों को लेकर मंथन शुरू हो गया है.
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा बयान जारी कर रिपब्लिकन पार्टी की हार की वजहों का विश्लेषण किया. उन्होंने कहा कि पार्टी की हार की मुख्य वजह समर्थकों का मतदान के लिए घर से बाहर नहीं निकलना नहीं था, बल्कि बड़ी संख्या में पुराने समर्थकों का डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करना था.
'हमारी हार की वजह ईरान युद्ध है'
जेडी वेंस ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा, 'हमारी हार की वजह युद्ध है.' उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी के डेटा विश्लेषक यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि इस बार मतदान करने वाले लोगों की राजनीतिक प्राथमिकताएं 2024 के राष्ट्रपति चुनाव जैसी हैं या नहीं.
शुरुआती आंकड़ों से संकेत मिल रहे थे कि रिपब्लिकन समर्थक पर्याप्त संख्या में मतदान करने पहुंच रहे हैं. लेकिन एक डेटा विश्लेषक ने उन्हें चेतावनी दी थी कि अधिक मतदान का मतलब यह नहीं है कि ये मतदाता रिपब्लिकन पार्टी को ही वोट देंगे. वेंस के मुताबिक, विश्लेषक ने उन्हें बताया था कि 2024 में ट्रंप-वेंस को वोट देने वाले बहुत से लोग नाराज हैं और इस बार विरोधी पार्टी को वोट देने की तैयारी कर रहे हैं.
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ट्रंप के समर्थकों ने ही डेमोक्रेट्स को दिया वोट
जेडी वेंस ने फ्लोरिडा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां मतदान करने वालों में रिपब्लिकन मतदाताओं का रेशियो डेमोक्रेटिक मतदाताओं के मुकाबले नौ प्रतिशत अंक अधिक था. यह 2024 के राष्ट्रपति चुनाव की तुलना में मामूली अंतर था. उनके मुताबिक, इससे स्पष्ट होता है कि रिपब्लिकन पार्टी की समस्या केवल मतदान प्रतिशत नहीं थी.
वेंस ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या यह रही कि 2024 में ट्रंप और उन्हें वोट देने वाले कई लोगों ने 2026 में डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन किया. उन्होंने बताया कि चुनाव से पहले एक अनुभवी पोलस्टर ने रिपब्लिकन पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य पार्टी वरीयता के सर्वे में 13 प्रतिशत अंकों से पिछड़ने की आशंका जताई थी.
ईरान युद्ध, महंगाई और इजरायल से रिश्ते बने बड़े मुद्दे
जेडी वेंस ने बताया कि चुनाव से पहले उन मतदाताओं की राय जानने की कोशिश की गई थी, जिन्होंने 2024 में ट्रंप को वोट दिया था, लेकिन इस बार डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन करने की योजना बना रहे थे. इन मतदाताओं से पूछा गया कि किन परिस्थितियों में वे दोबारा रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन कर सकते हैं.
उनके जवाबों में चार प्रमुख मुद्दे सामने आए.
1. ईरान के साथ युद्ध समाप्त किया जाए.
2. बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत पर ज्यादा ध्यान दिया जाए.
3. सरकार 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराए.
4. अमेरिका और इजरायल के संबंधों को लेकर नीति में बदलाव किया जाए.
वेंस के मुताबिक, इन मुद्दों को लेकर मतदाताओं में नाराजगी थी, जिसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ा.
डेमोक्रेट्स के हाथ में अमेरिकी कांग्रेस का नियंत्रण
मिडटर्म इलेक्शन में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शेष दो वर्षों में राजनीतिक समीकरण बदल जाएंगे. अमेरिकी संसद के दोनों सदनों पर नियंत्रण मिलने से डेमोक्रेटिक पार्टी को ट्रंप प्रशासन के फैसलों की जांच करने और सरकार की जवाबदेही तय करने के अधिक अधिकार मिलेंगे.
कांग्रेस की समितियां प्रशासनिक अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुला सकेंगी और दस्तावेज तलब कर सकेंगी. इसके अलावा ईरान युद्ध, आव्रजन नीति और अर्थव्यवस्था से जुड़े ट्रंप प्रशासन के फैसलों की समीक्षा भी की जा सकेगी.
ट्रंप बोले- मेरी वजह से नहीं हारी रिपब्लिकन पार्टी
दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी नतीजों को अपने प्रदर्शन के खिलाफ जनादेश मानने से इनकार कर दिया है. फॉक्स न्यूज को दिए एक लाइव फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह इस हार को व्यक्तिगत झटके के तौर पर नहीं देखते. उन्होंने दावा किया कि अर्थव्यवस्था और सरकार के अन्य कामकाज के लिहाज से उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के पिछले दो साल ऐतिहासिक रूप से सफल रहे हैं.
हालांकि, ट्रंप ने यह स्वीकार किया कि ईरान के साथ युद्ध का भी रिपब्लिकन पार्टी की हार में योगदान रहा है. इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के उम्मीदवारों पर मतदाताओं को प्रेरित करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया. ट्रंप ने कहा, 'वे लोगों को मतदान के लिए बाहर निकालने में सफल नहीं हुए. मैं खुद चुनाव मैदान में नहीं था. अगर मैं चुनाव लड़ रहा होता, तो लोग मतदान करने जरूर निकलते.'
रिपब्लिकन पार्टी में चुनावी हार पर मंथन
जेडी वेंस की टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह खुद ट्रंप प्रशासन का हिस्सा हैं और ईरान के साथ संघर्ष को लेकर अमेरिकी नीतियों में उनकी अहम भूमिका रही है. उनका यह स्वीकार करना कि ईरान युद्ध ने रिपब्लिकन पार्टी को चुनावी नुकसान पहुंचाया, ट्रंप प्रशासन के भीतर चुनावी हार के कारणों को लेकर अलग-अलग आकलन सामने आने का संकेत है.
हालांकि, ट्रंप और वेंस दोनों ने युद्ध के चुनावी असर को स्वीकार किया है, लेकिन हार के लिए उनकी ओर से बताई गई प्रमुख वजहें अलग हैं. वेंस ने पुराने रिपब्लिकन समर्थकों की नाराजगी को प्रमुख कारण बताया है, जबकि ट्रंप ने उम्मीदवारों की कमजोर चुनावी अपील और स्वयं मतपत्र पर नहीं होने को भी जिम्मेदार ठहराया है. अब डेमोक्रेटिक पार्टी के कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल करने से ट्रंप प्रशासन को अपने शेष कार्यकाल में अधिक संसदीय निगरानी और राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ेगा.
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