इजरायल में नई सरकार के गठन की कवायद शुरू हो गई है. राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने गादी आईजेनकोट को अगली सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है. रविवार को औपचारिक रूप से उन्हें सरकार बनाने का मौका दिया गया. इस दौरान हर्जोग ने ईरान से मिल रहे खतरे को गंभीर बताते हुए कहा कि ईरान ने अपनी धमकियां एक पल के लिए भी बंद नहीं की हैं. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे से तुरंत निपटने की जरूरत है.
हर्जोग ने गाजा के लिए 20 सूत्रीय योजना को आगे बढ़ाने की बात भी कही. साथ ही लेबनान और क्षेत्र के दूसरे पड़ोसी देशों के साथ बातचीत जारी रखने पर जोर दिया. उन्होंने अमेरिका में हाल ही में हुए मिडटर्म चुनावों के बाद बने राजनीतिक हालात का भी जिक्र किया.
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राष्ट्रपति हर्जोग ने यह भी स्वीकार किया कि लिकुड अब भी इजरायल की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है. उन्होंने आईजेनकोट से ऐसी सरकार बनाने की अपील की, जो उन सभी इजरायलियों का प्रतिनिधित्व करे, चाहे उन्होंने पिछली सरकार को वोट दिया हो या उसके विरोधी गठबंधन को. हर्जोग ने कहा कि उनकी दिल से इच्छा है कि जो भी सरकार बने, वह देश के सभी हिस्सों के बीच एकता, जुड़ाव और आपसी भरोसा बहाल करने का काम करे.
आईजेनकोट बोले- इजरायल मुश्किल दौर से गुजर रहा है
सरकार बनाने का न्योता मिलने के बाद आईजेनकोट ने कहा कि इजरायल इस समय बेहद चुनौतीपूर्ण और निर्णायक आपातकालीन दौर से गुजर रहा है. उन्होंने कहा कि देश कई मोर्चों पर जंग का सामना कर रहा है, जबकि सेना के कई लक्ष्य अभी पूरे नहीं हुए हैं. इसके साथ ही इजरायल एक गंभीर कूटनीतिक संकट से भी गुजर रहा है. उन्होंने चिंता जताई कि इजरायल के कुछ सबसे करीबी सहयोगी देश भी अब उसके साथ अपने संबंधों पर दोबारा विचार कर रहे हैं.
आईजेनकोट ने देश के अंदरूनी हालात पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि इजरायली लोकतंत्र इस समय अपने सबसे कमजोर दौर में से एक से गुजर रहा है. लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिशों और सरकारी संस्थाओं पर लोगों के बढ़ते अविश्वास ने देश को बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचा दिया है. उन्होंने ऐलान किया कि उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी के तहत वह राष्ट्रीय आपातकालीन सरकार बनाने की कोशिश करेंगे. इसके लिए राजनीति में नए और असामान्य तरीके अपनाने की जरूरत पड़ सकती है. उन्होंने कहा कि इजरायल के पास समय बर्बाद करने या बार-बार चुनाव कराने का विकल्प नहीं है.
नेतन्याहू के खेमे को भी दिया साथ आने का न्योता
आईजेनकोट ने संसद के सभी दलों और जनप्रतिनिधियों से सरकार बनाने में सहयोग की अपील की. उन्होंने कहा कि जो भी इस समय की गंभीरता को समझता है और देश के लिए साहसिक कदम उठाने को तैयार है, उसके लिए उनके दरवाजे खुले हैं. उन्होंने खास तौर पर नेतन्याहू के खेमे को भी अपनी सरकार का समर्थन करने का न्योता दिया. आईजेनकोट ने कहा कि अगर लिकुड और धार्मिक जायनिज्म पार्टी के नेता वास्तव में राष्ट्रीय एकता चाहते हैं, जैसा कि उन्होंने राष्ट्रपति के सामने कहा है, तो उन्हें उनके नेतृत्व वाली सरकार और उसके चार प्रमुख सिद्धांतों का समर्थन करना चाहिए.
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हालांकि, उन्होंने नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतामार बेन ग्विर की पार्टी ओत्जमा येहुदित का नाम नहीं लिया. यशार पार्टी के दूसरे नंबर के नेता योराम कोहेन पहले ही इस पार्टी के साथ गठबंधन से इनकार कर चुके हैं. आईजेनकोट पहले भी कह चुके हैं कि नेतन्याहू के बिना लिकुड उनकी सरकार में शामिल हो सकती है.
सहयोगी दलों को भी दी चेतावनी
आईजेनकोट ने अपनी संभावित सहयोगी पार्टियों को भी साफ संदेश दिया. उन्होंने कहा कि जो भी नेता व्यक्तिगत फायदे के लिए सरकार गठन में रुकावट डालेगा, उसे इतिहास में ऐसे व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा जिसने आपातकाल के समय इजरायल को बचाने में नाकामी दिखाई. उन्होंने कहा कि कोई भी पार्टी अपने चुनावी वादों को पूरी तरह पूरा नहीं कर पाएगी. ऐसे में सरकार बनाने के लिए सभी दलों को समझौता करना होगा. उन्होंने भरोसा जताया कि वह आने वाली राजनीतिक चुनौतियों का सामना धैर्य, विनम्रता और संयम के साथ करेंगे.
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