होर्मुज पर कंट्रोल खो रहा है ईरान! 80% जहाजों ने बदला रूट, ट्रैकिंग फर्म का दावा

अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर तनाव जारी है. इसी बीच शिपिंग डेटा फर्म केपलर के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में 80% से अधिक कमर्शियल जहाजों ने ईरानी मार्ग छोड़कर अमेरिका द्वारा अधिकृत ओमान रूट का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे ईरान का इस रणनीतिक जलमार्ग पर दबदबा कमजोर होता दिख रहा है.

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80 फीसदी जहाजों ने बदला होर्मुज से रास्ता. (File photo: ITG) 80 फीसदी जहाजों ने बदला होर्मुज से रास्ता. (File photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:54 AM IST

अमेरिका-ईरान युद्ध का सबसे विवादास्पद मोर्चा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है. तेहरान और वाशिंगटन दोनों इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना दबदबा जता रहे हैं, लेकिन शिपिंग डेटा फर्म ने दावा किया है कि होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण कमजोर पड़ रहा है. ट्रैकिंग फर्म केपलर के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में 80 फीसदी से ज्यादा जहाजों ने ईरानी मार्ग को छोड़कर अमेरिका द्वारा अधिकृत ओमान रूट का रुख किया है.

ट्रैकिंग फर्म केपलर (Kpler) के शिपिंग डेटा के अनुसार, होर्मुज से गुजरने वाले 80 फीसदी से अधिक वाणिज्यिक जहाजों ने पिछले दो हफ्तों में ईरान के मार्ग को छोड़कर ओमान की ओर वाले रूट का इस्तेमाल किया है. संयुक्त राष्ट्र द्वारा अधिकृत इस समुद्री रास्ते का ईरान कड़ा विरोध करता रहा है. अमेरिकी नौसेना बलों की मौजूदगी और सुरक्षा के भरोसे जहाज ईरानी हमलों के जोखिम के बावजूद ओमान के तटवर्ती रास्ते से आवाजाही कर रहे हैं. इस बड़े बदलाव से इस रणनीतिक जलमार्ग पर तेहरान का दबदबा आंशिक रूप से कमजोर होता दिख रहा है.

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ओमान रूट पर शिफ्ट हुए जहाज

केपलर के क्रूड ऑयल एनालिसिस प्रमुख हुमायूं फलकशाही के अनुसार, आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि ईरान ने जलडमरूमध्य पर से कम से कम आंशिक नियंत्रण खो दिया है. एक महीने पहले तक ओमान वाले रूट पर न के बराबर शिपिंग गतिविधि देखी जा रही थी. ईरान इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट शुल्क यानी टोल वसूलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन जहाजों द्वारा ईरानी रूट से बचने के कारण तेहरान के लिए टोल लागू करना बेहद मुश्किल हो गया है.

ज्यादातर देश नहीं देना चाहते टैक्स

पिकरिंग एनर्जी पार्टनर्स के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी डैन पिकरिंग के मुताबिक मिडिल ईस्ट के अधिकांश लोग या पक्ष ईरान को टोल टैक्स नहीं देना चाहते हैं और न ही वे ऐसा कर रहे हैं. हालांकि, ईरान अभी-भी जहाजों को धमकाने और शिपिंग को बाधित करने की क्षमता रखता है. इसके बावजूद अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी ने कमर्शियल ट्रैफिक को एक सुरक्षित और वैकल्पिक रास्ता दे दिया है.

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VLCC से ट्रांसफर हो रहा है कच्चा तेल

तनाव के बीच खाड़ी देशों के तेल उत्पादकों ने भी कच्चे तेल के परिवहन का तरीका बदल दिया है. कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने फारस की खाड़ी से होर्मुज के रास्ते तेल निकालने के लिए वेरी लार्ज क्रूड कैरियर्स (VLCCs) किराए पर लिए हैं. इसके बाद कच्चे तेल को ओमान की खाड़ी में खतरे के क्षेत्र से बाहर अन्य टैंकरों में ट्रांसफर किया जा रहा है.

ट्रांसपोंडर बंद करने का जोखिम

ईरानी हमलों के खतरे से बचने के लिए कई तेल टैंकरों ने अतिरिक्त कदम उठाए हैं. इन टैंकरों ने कई हफ्तों तक अपने ट्रांसपोंडर (पहचान सिग्नल) बंद रखे हैं. इससे 'डार्क ट्रैफिक' पैदा हो रहा है, जिससे पारंपरिक शिपिंग ट्रैकर्स के लिए तेल की वास्तविक आवाजाही का सटीक आकलन लगाना चुनौतीपूर्ण हो गया है. हालांकि, सैटेलाइट इमेजरी के जरिए कुछ जहाजों का पता लगाया जा सकता है.

क्या है ट्रंप का दावा

उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना के संचालन के चलते इस जलडमरूमध्य पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण है. ट्रंप ने होर्मुज का नक्शा साझा करते हुए इसे 'नया अमेरिकी क्षेत्र' तक घोषित करने की इच्छा जताई.

वहीं, अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने बताया कि एक हफ्ते में होर्मुज और परिवर्तित मार्गों से तेल की ढुलाई करीब 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन रही जो युद्ध पूर्व के 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन के करीब है. हालांकि, जमीनी हालात दोनों देशों के दावों से अलग हैं. ईरान के लगातार हमले और युद्ध पूर्व स्तर से कम तेल प्रवाह ये साबित करता है कि अमेरिका का भी इस जलमार्ग पर पूरी तरह अनियंत्रित कब्जा नहीं है. वहीं, दूसरी ओर जहाजों का ओमान रूट चुनना ये दर्शाता है कि ईरान भी अपनी शर्तों को मनवाने में संघर्ष कर रहा है.

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ईरान-ओमान की सीधी बातचीत से US नाखुश

बता दें कि तनाव के बीच ईरान और ओमान के बीच नेविगेशन की स्वतंत्रता बहाल करने को लेकर सीधी बातचीत चल रही है. दोनों देश होर्मुज के साथ बॉर्डर साझा करते हैं. ये वार्ता बिना किसी प्रत्यक्ष अमेरिकी भागीदारी के हो रही है, जिससे डोनाल्ड ट्रंप खुश नहीं हैं. मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि न तो ईरान और न ही अमेरिका इस जलमार्ग पर पूर्ण नियंत्रण का दावा कर सकते हैं.

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