'बहुत सम्मान करते हैं...', आलोचना सहकर भी भारत ने बांग्लादेश के PM की तारीफ क्यों की?

बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि भारत-बांग्लादेश संबंध सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेंगे. उन्होंने कहा कि यदि दोनों देशों के नेतृत्व सीधे संवाद करें तो कई मुद्दों का समाधान हो सकता है. भारत की ये पहल हाल ही में बांग्लादेश की तीखी टिप्पणी के बाद आई है.

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बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर ने PM तारिक रहमान से मुलाकात की. (Photo: ITG) बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर ने PM तारिक रहमान से मुलाकात की. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:47 PM IST

भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में इन दिनों सब कुछ सामान्य नहीं है. एक तरफ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत में होने और उनके हालिया सार्वजनिक संबोधन को लेकर ढाका ने नई दिल्ली के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है. वहीं ढाका में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 10 अगस्त को भारत के नए हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी के साथ मुलाकात की है. दिनेश त्रिवेदी बीजेपी के नेता भी रह चुके हैं. 

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दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान की तारीफ की और उन्हें जननेता बताया. और कहा कि जब दो नेता मिलते हैं, तो कई समस्याएं हल हो जाती हैं.  मुझे बैठक के ज़रिए समस्या के समाधान को लेकर पूरा भरोसा है. हम सभी बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान का बहुत सम्मान करते हैं. वह लोगों से जुड़े नेता हैं, और हमारे प्रधानमंत्री भी लोगों से जुड़े नेता हैं."

ध्यान रहे दिनेश त्रिवेदी के इस बयान से दिन पहले ही बांग्लादेश ने भारत को लेकर तीखा बयान दिया था. बांग्लादेश का ये बयान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के संबोधन को लेकर था. शेख हसीना ने 5 अगस्त को नई दिल्ली से पहली बार वर्चुअल संबोधन दिया था. 

बांग्लादेश की तीखी प्रतिक्रिया के बावजूद...

बांग्लादेश ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि इस कार्यक्रम ने बांग्लादेश की जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है और भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध सुधारने के प्रयासों पर गलत असर डाल सकता है. बांग्लादेश सरकार ने हसीना को “फरार, दोषी जनसंहारक” करार दिया. बांग्लादेश ने कहा कि हसीना को लौटकर कानून का सामना करना होगा. 

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भारतीय विदेश मंत्रालय ने 7 अगस्त को स्पष्ट किया कि हसीना के मीडिया कार्यक्रम में भारत की कोई भूमिका नहीं थी और बांग्लादेश सरकार के बारे में वहां कही गई किसी भी बात का भारत समर्थन नहीं करता. भारत ने आलोचना सहते हुए भी बांग्लादेश के मौजूदा प्रधानमंत्री के प्रति सकारात्मक रुख अपनाया.

निर्वाचित सरकार के साथ राजनयिक रिश्ते अलग बात

यानी दिल्ली ने एक तरफ हसीना के बयान से खुद को अलग रखा, वहीं दूसरी तरफ उसी समय तारिक रहमान की सरकार के साथ संपर्क बनाए रखा. यह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत है.

भारत यह संदेश देना चाहता है कि किसी एक नेता के साथ उसके पुराने रिश्ते और किसी देश की मौजूदा निर्वाचित सरकार के साथ उसके राजनयिक संबंध अलग-अलग चीजें हैं. 

दिनेश त्रिवेदी ने दिल्ली में हसीना के भाषण के बाद पैदा हुई कूटनीतिक कड़वाहट को कम करने के लिए सौहार्दपूर्ण लहजा अपनाया. रविवार को ढाका में भारतीय वीज़ा आवेदन केंद्र में बच्चों के लिए बनाए गए एक अलग कोने का उद्घाटन करते हुए दिनेश ने कहा, "हम सभी बांग्लादेश के प्रधानमंत्री का बहुत सम्मान करते हैं, मैंने उनके भाषण कई बार सुने हैं, मैंने देखा है कि वे दिल से बोलते हैं. वे जनमानस के नेता हैं. और हमारे प्रधानमंत्री भी आम लोगों से गहराई से जुड़े हुए हैं."

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BRICS सम्मेलन का दांव 

इस बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सितंबर में भारत में आयोजित किया जाएगा. कई बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तारिक रहमान के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली आने की संभावना नहीं है. दरअसल बॉर्डर विवाद, बांग्लादेशी घुसपैठिए और शेख हसीना को लेकर दोनों देशों के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हैं. इसलिए बांग्लादेश अकड़ दिखा रहा है. 

लेकिन भारत चाहता है कि BRICS सम्मेलन सफल हो. 

भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री रहमान को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को यह निमंत्रण दिया था. हालांकि ढाका ने अभी तक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के अपने निर्णय की आधिकारिक घोषणा नहीं की है. लेकिन भारत चाहता है कि शेख हसीना के मसले से इतर बांग्लादेश भारत में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन का हिस्सा बने. 

ब्रिक्स सम्मेलन नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को प्रस्तावित है. 

रविवार को भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से भी मुलाकात की. लेकिन किसी भी पक्ष ने बातचीत के मुद्दों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी.

हाई कमिश्नर और विदेश मंत्री की मुलाकात की जानकारी रखने वाले एक सीनियर अधिकारी ने कहा, "मैं बस इतना बता सकता हूं कि यह पहले से तय मीटिंग थी और मुझे नहीं पता कि उन्होंने क्या बातचीत की."

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तारिक रहमान और शेख हसीना घोर राजनीतिक प्रतिद्वंदी हैं

अगस्त 2024 में छात्रों के हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद हसीना को सत्ता से हटा दिया गया था, जिसके बाद वह भारत आ गईं. नवंबर 2025 में, बांग्लादेश की एक स्पेशल ट्रिब्यूनल ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के दौरान कथित "मानवता के खिलाफ अपराधों" के लिए उन्हें उनकी गैर-मौजूदगी में मौत की सजा सुनाई. तब से ढाका भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है. 

तारिक रहमान और शेख हसीना घोर राजनीतिक प्रतिद्वंदी हैं.यह ताजा राजनयिक तनाव भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक मुश्किल दौर के बाद आया है. फरवरी में रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के सत्ता में आने से पहले, अंतरिम सरकार के समय हसीना के प्रत्यर्पण, सीमा से जुड़े मुद्दों और ढाका की चीन की ओर झुकी विदेश नीति जैसे मामलों को लेकर दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण रहे थे. 

बांग्लादेश की मौजूदा सरकार का कहना है कि अगर हसीना लौटती हैं, तो उन्हें सरेंडर करना होगा और कानून का सामना करना होगा. 
 

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