पाकिस्तान की संसद में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को उस वक्त शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा, जब जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने उन पर तंज कसा. उन्होंने नेशनल असेंबली में सवाल उठाया कि जब ईरान में रक्षा समझौते को लेकर बातचीत हो रही है, तो पाकिस्तान के रक्षा मंत्री संसद में क्यों बैठे हैं.
फजलुर रहमान ने आसिफ को निशाने पर लेते हुए कहा, "ईरान में रक्षा समझौता हो रहा है और रक्षा मंत्री यहां बैठे हैं." इसके बाद उन्होंने आसिफ के चर्चित राजनीतिक जुमले को उन्हीं पर पलट दिया और कहा, "कोई शर्म होती है, कोई हया होती है." उनकी इस टिप्पणी पर सदन में ठहाके लगे. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ.
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ईरान में क्या बातचीत हुई थी?
फजलुर रहमान का यह तंज 26 अक्टूबर को तेहरान में हुई एक अहम बैठक के बाद आया. इसमें पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान और तुर्की की खुफिया एजेंसी के प्रमुख इब्राहिम कालिन शामिल हुए थे. इन नेताओं ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की.
यह बातचीत अगस्त में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत हुई थी. इस समझौते में सामूहिक रक्षा का प्रावधान है, यानी किसी एक सदस्य देश पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा. तेहरान में हुई बातचीत का मकसद क्षेत्र में तनाव बढ़ने से रोकना, सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं पर चर्चा करना और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने के रास्ते तलाशना था.
ख्वाजा आसिफ ने क्या जवाब दिया?
पाकिस्तान के अखबार 'डॉन' के मुताबिक, गुरुवार को आसिफ ने संसद में कहा कि तेहरान में किसी रक्षा समझौते पर बातचीत नहीं हो रही थी. यह बैठक उनके मंत्रालय के दायरे में नहीं आती. उन्होंने कहा कि आसिम मुनीर क्षेत्र में शांति और बातचीत को बढ़ावा देने की भूमिका निभा रहे हैं.
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आसिफ ने बताया कि पाकिस्तान ने मक्का रक्षा गठबंधन और बद्र समझौता ज्ञापन (MoU) समेत दो रक्षा समझौते किए हैं और रक्षा मंत्री होने के नाते वह उनमें शामिल थे. उन्होंने रहमान की आलोचना को गलत बताते हुए उन पर राजनीतिक अवसरवाद का आरोप लगाया और संयम बरतने की सलाह दी.
फजलुर रहमान ने अपने भाषण में सरकार के संवैधानिक फैसलों और आतंकवाद से निपटने के तरीकों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि संविधान का इस्तेमाल करने और उसका दुरुपयोग करने में फर्क है. उन्होंने बलोचिस्तान में आतंकवाद से निपटने में नाकामी का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि अगर सुरक्षा के मोर्चे पर विफलता कार्रवाई का आधार है, तो वहां भी ऐसे कदम क्यों नहीं उठाए गए.
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