डोकलाम-गलवान में भारत से भिड़ने वाले चीनी जनरल पर गिरी गाज, जिनपिंग ने सभी पदों से हटाया

डोकलाम और गलवान के दौरान चीन की वेस्टर्न थिएटर कमांड संभालने वाले जनरल झाओ जोंगकी से तीन अहम राजनीतिक जिम्मेदारियां छीन ली गई हैं. चीन ने कार्रवाई की वजह नहीं बताई है.

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जनरल झाओ जोंगकी, जिन्होंने 2020 में गलवान झड़प को दी थी मंजूरी.  (Image: US Army) जनरल झाओ जोंगकी, जिन्होंने 2020 में गलवान झड़प को दी थी मंजूरी. (Image: US Army)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:16 PM IST

भारत और चीन के बीच डोकलाम से लेकर गलवान तक तनाव के दौरान अहम सैन्य जिम्मेदारी संभालने वाले जनरल झाओ जोंगकी पर अब कार्रवाई हुई है. चीन ने उन्हें अपनी शीर्ष राजनीतिक सलाहकार संस्था से हटा दिया है. उनकी सदस्यता भी खत्म कर दी गई है. इसके अलावा एक अहम समिति की जिम्मेदारी भी उनसे छीन ली गई है.

झाओ जोंगकी फरवरी 2016 में चीन की वेस्टर्न थिएटर कमांड के पहले कमांडर बने थे. यह चीन की सेना की ऐसी कमान है, जो तिब्बत, शिनजियांग और भारत से लगी सीमा के बड़े हिस्से में सैन्य गतिविधियों को देखती है.

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2017 में डोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं 72 दिनों तक आमने-सामने रही थीं. यह विवाद तब शुरू हुआ, जब चीन ने ऐसे इलाके में सड़क बनाने की कोशिश की, जिस पर चीन और भूटान दोनों दावा करते हैं. भारत ने वहां पहुंचकर इसका विरोध किया. उस समय झाओ इसी वेस्टर्न थिएटर कमांड के प्रमुख थे.

गलवान के समय भी झाओ कमान में थे

मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच तनाव बढ़ गया. इसके बाद 15 जून 2020 को गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई. इसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए.

बाद में अमेरिकी खुफिया आकलन के हवाले से एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि झाओ ने उस ऑपरेशन को मंजूरी दी थी. रिपोर्ट के मुताबिक, इसका मकसद भारत को 'सबक सिखाना' था. हालांकि यह दावा एक ऐसे सूत्र के हवाले से सामने आया था, जो इस आकलन से परिचित बताया गया था.

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अब झाओ से क्या-क्या छीना गया?

26 अगस्त को चीन की शीर्ष राजनीतिक सलाहकार संस्था ने झाओ को 14वीं नेशनल कमेटी की स्टैंडिंग कमेटी से हटाने का फैसला किया. उनकी CPPCC सदस्यता भी खत्म कर दी गई. इसके साथ ही जातीय और धार्मिक मामलों की समिति के उप निदेशक का पद भी उनसे छीन लिया गया.

यानी मौजूदा कार्रवाई में झाओ से तीन राजनीतिक जिम्मेदारियां गई हैं. चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ ने इन फैसलों की जानकारी दी, लेकिन यह नहीं बताया कि कार्रवाई की वजह क्या है. यह भी साफ नहीं किया गया कि झाओ के खिलाफ किसी मामले में जांच चल रही है या नहीं.

झाओ की सेना वाली कमान पहले ही जा चुकी थी

यहां एक बात समझना जरूरी है. झाओ अब वेस्टर्न थिएटर कमांड के प्रमुख नहीं थे. वह दिसंबर 2020 में इस पद से हट चुके थे. यानी अभी जो कार्रवाई हुई है, वह उनकी पुरानी सैन्य कमान पर नहीं, बल्कि राजनीतिक पदों पर हुई है. यही वजह है कि उनकी मौजूदा कार्रवाई को चीन की सेना में चल रहे बड़े बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है.

चीन की सेना में बड़े अधिकारियों पर शिकंजा

झाओ पर कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब चीन की सेना के कई बड़े अधिकारियों को हटाया जा रहा है. 28 अगस्त को झांग यूक्सिया और लियू जेनली को केंद्रीय सैन्य आयोग से हटाया गया. दोनों के खिलाफ 'गंभीर अनुशासन और कानून के उल्लंघन' की जांच की बात सामने आई. शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन की सेना में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान लंबे समय से चल रहा है. इस दौरान कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को जांच, बर्खास्तगी या पार्टी से निष्कासन का सामना करना पड़ा है.

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भारत के लिए झाओ क्यों अहम हैं?

झाओ ऐसे समय चीन की पश्चिमी कमान में थे, जब भारत के साथ डोकलाम और गलवान जैसे गंभीर सीमा विवाद हुए. इसलिए अब उनके राजनीतिक पद छिने जाने की खबर ने ध्यान खींचा है.

फिलहाल चीन ने झाओ पर कार्रवाई की वजह नहीं बताई है. इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि उनके खिलाफ फैसला डोकलाम, गलवान या किसी दूसरी वजह से लिया गया है.
 

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