ब्रिटेन में आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस के पास हुई संदिग्ध घटना की जांच में नई गिरफ्तारी हुई है. आतंकवाद रोधी पुलिस ने लंदन से 27 साल के एक ऐसे व्यक्ति को पकड़ा है, जो ब्रिटेन और ईरान दोनों का नागरिक है. इससे पहले रविवार को पांच ब्रिटिश पुरुष हिरासत में लिए गए थे, जिन्हें बाद में बिना आरोप रिहा कर दिया गया. उनकी वैन में पेट्रोल मिला, लेकिन कोई बम नहीं मिला. पुलिस किसी विदेशी सरकार की भूमिका की भी जांच कर रही है. प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने ईरान से संबंध की आशंका जताई है, जबकि ईरान ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है.
आरएएफ फेयरफोर्ड ब्रिटेन के पश्चिमी इलाके में मौजूद एक सैन्य हवाई अड्डा है. अमेरिका इसका इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अभियानों के लिए करता रहा है. हाल के संघर्ष में यहीं से अमेरिकी बमवर्षक विमानों ने ईरानी ठिकानों पर हमले के लिए उड़ान भरी. इसी वजह से यह मामला संवेदनशील माना जा रहा है.
रविवार तड़के पुलिस को बेस के पास संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिली. एक सूचना स्थानीय किसान ने दी, जिसे तीन वैन में कुछ लोग दिखे थे. द टाइम्स के मुताबिक, गिरफ्तारी से कुछ देर पहले इनमें से एक व्यक्ति ने खुद इमरजेंसी सेवाओं को फोन किया था. पुलिस ने इलाके में बड़ा अभियान चलाया.
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पुलिस ने 20 से 29 साल की उम्र के पांच ब्रिटिश पुरुषों को आतंकवाद और विस्फोटक से जुड़े अपराधों के शक में हिरासत में लिया. बाद में उन्हें बिना आरोप रिहा कर दिया गया, लेकिन वे पुलिस जमानत पर हैं. जांच में सामने आया कि उनकी वैन में पेट्रोल था. हालांकि पुलिस के मुताबिक कोई देसी बम नहीं मिला. यह फर्क अहम है, क्योंकि शुरुआती कार्रवाई विस्फोटक खतरे की आशंका में हुई थी.
अब आतंकवाद रोधी पुलिस ने लंदन से 27 साल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो ब्रिटेन और ईरान दोनों का नागरिक है. 26 साल के एक ब्रिटिश व्यक्ति से चेतावनी के साथ पूछताछ हुई और दो ठिकानों पर तलाशी ली गई. आतंकवाद रोधी पुलिस की वरिष्ठ अधिकारी विकी इवांस ने जांच को जटिल बताया. उन्होंने कहा कि कई पहलुओं पर जांच हो रही है और किसी विदेशी सरकार की भूमिका समेत सभी संभावनाएं देखी जा रही हैं.
प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने कहा कि घटना का ईरान से संबंध हो सकता है और ब्रिटेन इस मामले में अमेरिका के लगातार संपर्क में है. ईरान ने किसी भी भूमिका से इनकार करते हुए आरोपों को बेबुनियाद बताया. विरोध जताने के लिए उसने गुरुवार को ब्रिटेन के राजदूत को तलब किया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह होते तो इन्हें रिहा नहीं करते, जबकि पुलिस ने इन्हें सख्त जमानत शर्तों पर छोड़ा. ट्रंप पहले कह चुके हैं कि ये लोग बड़ा नुकसान पहुंचाने की योजना बना रहे थे.
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