नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने अपनी रफ्तार से ही तबाही की भयावह तस्वीर सामने रख दी. नदी का बहाव कुछ जगहों पर करीब 55 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गया. पानी इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि नदी किनारे बसे इलाकों को संभलने और सुरक्षित जगह पहुंचने तक का मौका नहीं मिला.
मौसम विभाग के मुताबिक, रसुवागढ़ी से करीब 13 किलोमीटर दूर स्याफ्रुबेंसी तक बाढ़ की लहर महज 15 मिनट में पहुंच गई. टिमुरे और स्याफ्रुबेंसी में नदी की रफ्तार करीब 15 मीटर प्रति सेकंड, यानी लगभग 54-55 किलोमीटर प्रति घंटे आंकी गई.
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विशेषज्ञों के मुताबिक, सामान्य तौर पर 5 मीटर प्रति सेकंड से ज्यादा की नदी की गति भी बेहद खतरनाक मानी जाती है. ऐसे में 15 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार ने हालात को बेहद भयावह बना दिया.
55 KM की रफ्तार ने मचाई सबसे बड़ी तबाही
बाढ़ की शुरुआती रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बुधवार सुबह करीब 8:40 बजे टिमुरे बाजार में पहुंची बाढ़ ने कुछ ही मिनटों में भारी नुकसान कर दिया. स्याफ्रुबेंसी बाजार के आसपास करीब 18 किलोमीटर सड़क भी बाढ़ में बह गई. इसके बाद बाढ़ बेत्रावती तक पहुंची, जहां पानी की गति करीब 12.92 मीटर प्रति सेकंड, यानी लगभग 46.5 किलोमीटर प्रति घंटे दर्ज की गई. यहां बाजार और आसपास की बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचा.
आगे बढ़ते हुए धादिंग के फुर्केखोला इलाके में नदी की रफ्तार घटकर करीब 5.60 मीटर प्रति सेकंड रह गई. भोटेकोशी के त्रिशूली नदी में मिलने के बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए. कालीखोला तक पानी की गति करीब 4.17 मीटर प्रति सेकंड रही, जबकि देवघाट तक पहुंचते-पहुंचते यह फिर करीब 5 मीटर प्रति सेकंड यानी 18 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई.
पुल, सड़क और बाजार सब बहते चले गए
भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे बसे कई इलाके बाढ़ की चपेट में आए. बेत्रावती, मैलुड, सल्लेटार, शांतिबाजार, पैरेबेंसी, खाल्टीबस्ती, सोले, त्रिशूली और बट्टार समेत कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ. नुवाकोट में बाढ़ तुप्चे, ढुंगे, त्रिशूली बाजार और देवीघाट तक पहुंची, जबकि धादिंग में फुर्केखोला और घाटबेंसी के पुल भी बह गए.
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मौसम विभाग के सूचना अधिकारी दिनकर कायस्थ के मुताबिक, इतनी ऊंचाई और इतनी तेज रफ्तार वाला बहाव पिछले उपलब्ध रिकॉर्ड में देखने को नहीं मिला है. रसुवागढ़ी में बाढ़ की ऊंचाई करीब 15 मीटर, जबकि देवघाट में करीब 5 मीटर दर्ज की गई.
इस आपदा में अब तक 165 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं. भोटेकोशी की करीब 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार ने साफ कर दिया कि यह सिर्फ बाढ़ नहीं थी, बल्कि कुछ ही मिनटों में अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को बहा ले जाने वाली विनाशकारी जलधारा थी.
पंकज दास