ट्रंप के ‘America First’ से पुराने दोस्त भी हुए परेशान, अमेरिका के साथ रिश्तों में क्यों बढ़ी खटास?

राष्ट्रपति ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का असर अब अमेरिका के पुराने सहयोगी देशों के साथ रिश्तों पर भी दिखने लगा है. दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास, कनाडा के साथ टैरिफ, फ्रांस से विदेश नीति और इजरायल-ब्रिटेन के साथ ईरान व यूक्रेन जैसे मुद्दों पर मतभेद बढ़े हैं. आखिर क्यों अपने ही साझेदारों से उलझ रहे हैं ट्रंप?

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अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप दुश्मन तो दूर खुद के दोस्तों के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं. (Photo- ITG) अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप दुश्मन तो दूर खुद के दोस्तों के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:15 PM IST

जब से ट्रंप दूसरी बार अमेरिका की सत्ता में आए हैं, उनकी डिप्लोमेसी का दूसरा नाम जैसे भूचाल बन गया है. जो ईरान जैसे अमेरिका के दुश्मन मुल्क थे, वो तो जंग के मैदान में हैं ही, लेकिन जो कल तक अमेरिका के साझेदार और दोस्त मुल्क थे, वे भी आज ट्रंप की नीतियों से परेशान नजर आ रहे हैं.

पहले यूरोप के साथ व्यापार और विदेश नीति को लेकर मतभेद सामने आए, फिर पड़ोसी कनाडा के साथ टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ा. अब नंबर आया है एशियाई सहयोगी साउथ कोरिया का. आखिर क्या है ट्रंप की नाराजगी की ताजा वजह और क्यों अमेरिका के पुराने दोस्तों के साथ रिश्तों में खटास बढ़ रही है, आइए जानते हैं.

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दरअसल, अमेरिका दशकों से साउथ कोरिया की सुरक्षा की गारंटी देता आया है और फिलहाल वहां करीब 28,500 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. लेकिन अब ट्रंप ने साउथ कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों को काफी कम करने का आदेश दिया है. ट्रंप ने इन अभ्यासों को महंगा बताया और कहा कि इससे नॉर्थ कोरिया को दुश्मनी भरा संकेत मिल सकता है. साथ ही उन्होंने साउथ कोरिया के ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रयासों में शामिल नहीं होने पर भी नाराजगी जताई. हालांकि, साउथ कोरिया के मुताबिक सैन्य अभ्यास जारी रहेंगे.

मैक्रों की विदेश नीति पर ट्रंप को आपत्ति

अमेरिका की आजादी की लड़ाई में फ्रांस ने उसका साथ दिया था और दोनों देश नाटो के भी अहम सहयोगी हैं. दोनों देश आतंकवाद और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी साथ काम करते रहे हैं. लेकिन ट्रंप के दौर में व्यापार, यूक्रेन और गाजा जैसे मुद्दों पर मतभेद बढ़े. 2025 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फिलिस्तीन को मान्यता देने की दिशा में कदम बढ़ाया, जिस पर ट्रंप ने खुलकर असहमति जताई. दोनों देशों की दोस्ती कायम है, लेकिन कई रणनीतिक मुद्दों पर दूरी बढ़ी है.

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कनाडा के साथ व्यापार को लेकर बढ़ा तनाव

कनाडा और अमेरिका की दोस्ती दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक संबंधों में से एक है. लेकिन ट्रंप के टैरिफ ने इस रिश्ते को बड़ा झटका दिया. कनाडा ने अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाए और दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर तनाव बढ़ता गया. जुलाई 2026 में ट्रंप ने कनाडा के कुछ उत्पादों पर अतिरिक्त 50 फीसदी टैरिफ लगाने का फैसला भी किया. अमेरिका ने इसे अमेरिकी कारोबार और उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी बताया.

आतंकवाद को लेकर आमने-सामने आए अमेरिका और इजरायल

अमेरिका लंबे समय से इजरायल का सबसे बड़ा रणनीतिक साझेदार रहा है. ईरान, सुरक्षा और सैन्य मामलों में दोनों का सहयोग बेहद मजबूत रहा है. लेकिन अब गाजा और ईरान को लेकर दोनों देशों की प्राथमिकताओं में अंतर दिखाई देने लगा है. ट्रंप ने इजरायल को चौंकाते हुए ईरान के साथ बातचीत की पहल की. बाद में गाजा को लेकर भी ट्रंप की योजना और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सोच में अंतर सामने आया. रिश्ता खत्म नहीं हुआ है, लेकिन दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर खींचतान खुलकर सामने आई है.

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यूक्रेन और ईरान को लेकर रिश्तों में आई खटास

ब्रिटेन के साथ अमेरिका का रिश्ता दुनिया के सबसे खास गठबंधनों में गिना जाता है. दोनों देश नाटो, रक्षा, खुफिया जानकारी और व्यापार में दशकों से साथ रहे हैं. लेकिन ट्रंप की वापसी के बाद टैरिफ, यूक्रेन और ईरान को लेकर मतभेद सामने आए. हालांकि, दोनों देश अब भी अपने रिश्ते को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं.

ट्रंप की पुराने दोस्तों से रिश्तों में खटास की कहानी नई नहीं है. उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति में अमेरिकी हित सबसे ऊपर हैं. यही वजह है कि अमेरिका के पारंपरिक साझेदारों से भी व्यापार, रक्षा खर्च और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर मतभेद पहले से ज्यादा खुलकर सामने आ रहे हैं. दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यासों को कम करने का ताजा फैसला इसी बदलती अमेरिकी रणनीति की एक और मिसाल माना जा रहा है. (दीक्षा मिश्रा की रिपोर्ट)

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