वोट लूट को लेकर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. इतना ही नहीं, उन्होंने पीएम मोदी के विदेशी दौरों और मेलोडी वाले मुद्दे को लेकर भी उन पर करारा तंज कसा. ममता ने कहा कि 'प्रधानमंत्री विदेशों में घूम रहे हैं और इटली में चॉकलेट बांट रहे हैं, जबकि असली चॉकलेट तो देश के बच्चों को मिलनी चाहिए.' इसके साथ ही उन्होंने महंगे पेट्रोल-डीजल और बंगाल में टीएमसी के पार्टी दफ्तरों को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए.
महंगे तेल को लेकर ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा कि बहुत ही कम समय के अंदर पेट्रोल-डीजल के दाम तीन बार बढ़ा दिए गए हैं. इससे आम जनता पर महंगाई का भारी बोझ पड़ा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब चारों तरफ महंगाई बढ़ रही है, तब सरकार लोगों को राहत देने के बजाय आखिर कर क्या रही है? इस दौरान, पीएम मोदी के विदेशी दौरों को घेरते हुए ममता ने कहा कि देश की जनता अब यह जानना चाहती है कि इन हवाई यात्राओं में आखिर कितना ईंधन (फ्यूल) फूंक दिया जाता है.
मेलोडी से बंगाल तक, कई मुद्दों पर बरसीं ममता
तेल की कीमतों के अलावा भाषण के दौरान चुनाव में हुई वोट लूट का मुद्दा भी जमकर गरमाया. ममता का सीधा आरोप है कि चुनाव में वोटों की खुली लूट हुई है. यहां तक कि केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान काउंटिंग सेंटर के अंदर तक घुस गए थे और उन्होंने बिल्कुल बीजेपी एजेंट की तरह काम किया. इसके साथ ही राज्य में टीएमसी के खिलाफ हो रही कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया गया. आरोप है कि अब बंगाल में रैलियां और मीटिंग करने की परमिशन तक नहीं मिल रही है. टीएमसी पार्षदों को लगातार गिरफ्तार किया जा रहा है और पार्टी के करीब 2500 दफ्तरों पर जबरन कब्जा कर उन्हें सील कर दिया गया है. दिल्ली की सत्ता पर बरसते हुए ममता ने कहा कि अगर ये लोग हमारे लोगों को जेल भेजने की बात करते हैं, तो असली जेल तो इन्हें होनी चाहिए, जिनका काम सिर्फ तोड़फोड़ करना रह गया है.
आरोप यह भी है कि बंगाल के लोगों को उनकी कमाई से बनाए गए घरों के लिए परेशान किया जा रहा है. ममता के मुताबिक, कुछ बाहरी गुंडे टीएमसी को देखकर 'चोर-चोर' के नारे लगा रहे हैं और स्थानीय प्रशासन की जगह बाहरी अधिकारी आकर निर्देश दे रहे हैं. इसके अलावा, उन्होंने साल्ट लेक स्टेडियम में लगी मूर्ति को हटाए जाने पर भी गहरा दुख जताया, जिसे खुद ममता ने बनवाया था और कभी फीफा ने भी इसकी तारीफ की थी. इसके साथ ही 'विश्व बांग्ला' ब्रांड को खत्म करने और महिलाओं की 'लक्ष्मी भंडार' योजना को रोकने का मुद्दा भी उठाया गया. अंत में साफ चेतावनी दी गई कि बंगाल के लोग यह जबरदस्ती कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे.
अनुपम मिश्रा