योगी सरकार की इस योजना से झांसी की महिलाओं की बदली जिंदगी, प्लांट लगाकर बनीं आत्मनिर्भर, अब परिवार में बढ़ा सम्मान

झांसी की महिलाओं ने स्वयं सहायता समूहों और सरकार की मदद से प्लांट लगाकर आंगनवाड़ी का राशन तैयार करने का काम शुरू किया है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रही हैं.

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योगी सरकार की योजना से आत्मनिर्भर हुईं झांसी की महिलाएं. (Photo: ITG) योगी सरकार की योजना से आत्मनिर्भर हुईं झांसी की महिलाएं. (Photo: ITG)

प्रमोद कुमार गौतम

  • झांसी ,
  • 13 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:01 AM IST

उत्तर प्रदेश के झांसी में जिन महिलाओं को कभी घर से बाहर निकलकर काम करने के लिए परिवार के विरोध का सामना करना पड़ता था, आज वही महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हैं. स्वयं सहायता समूह योजना से जुड़कर उन्होंने सरकारी मदद से टेक होम राशन (THR) प्लांट लगाया है. अब उनकी कमाई से घर का खर्च चल रहा है, बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रही हैं. कभी उनके काम करने का विरोध करने वाले परिवार आज उनका सम्मान करते हैं.

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झांसी की ग्राम पंचायत भोजला में सक्षम प्रेरणा लघु उद्योग के नाम से यह प्लांट चल रहा है. इसे शुरू करने में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने अपनी बचत लगाई. समूह की अध्यक्ष द्रोपदी बताती हैं कि शुरुआत में 10 महिलाएं समूह से जुड़ी थीं. इसके बाद समूह से ग्राम संगठन बना, फिर क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) तैयार हुआ. उनके ग्राम संगठन का नाम नारी शक्ति प्रेरणा संगठन है, जबकि CLF का नाम लक्ष्य प्रेरणा समिति भोजला है.

द्रोपदी के मुताबिक, जब उन्हें THR प्लांट लगाने के बारे में बताया गया, तो हर महिला को अपने समूह से 30 हजार रुपये जमा करने थे. महिलाओं ने यह रकम जुटाई, जिसके बाद प्लांट लगा. अब यहां काम करके उन्हें समय पर वेतन मिलता है. इससे घर की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है.

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रकारी मदद से बदली ग्रामीण महिलाओं की तकदीर. (Photo: ITG)

पहले सिलाई और खेतों में मजदूरी, अब हर महीने कमाई

द्रोपदी बताती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले वह सिलाई करती थीं. खेतों में भी काम करना पड़ता था. आमदनी इतनी नहीं थी कि बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा सकें. कई बार घर में खाने तक की परेशानी होती थी. समूह से जुड़ने के बाद हालात बदलने लगे. अब उनकी कमाई से घर चलाने में मदद मिलती है. बच्चों की पढ़ाई पर भी खर्च कर पा रही हैं.

वह योगी सरकार की पहल को अपने जीवन में आए बदलाव की वजह मानती हैं. द्रोपदी का कहना है कि इस काम से महिलाओं को रोजगार मिला है. अब घर में उनकी बात सुनी जाती है और सम्मान भी बढ़ा है.

आंगनवाड़ी के बच्चों के लिए तैयार होता है पोषण आहार

इस प्लांट में आंगनवाड़ी के बच्चों को दिए जाने वाले पोषण आहार की तैयारी होती है. यहां आटे और बेसन से बनी बर्फी, हलवा, दलिया तथा मूंग दाल जैसे खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं. प्लांट में काम करने वाली सरोज भी इस बदलाव को महसूस करती हैं. सरोज ग्राम बेहटा की रहने वाली हैं. वह जय मां रतन वाली समूह की अध्यक्ष हैं. उनका कहना है कि समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं ने धीरे-धीरे बचत की. सरकारी मदद से प्लांट लगा तो कमाई का रास्ता खुला. पहले उनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते थे, लेकिन अब वह उन्हें प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रही हैं. उनके मुताबिक, सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब महिलाएं अपनी कमाई के दम पर परिवार की जरूरतों में हाथ बंटा रही हैं.

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प्लांट में आंगनवाड़ी का राशन तैयार करतीं महिलाएं. (Photo: ITG)

शुरुआत में परिवार ने रोका, अब मिल रहा सम्मान

प्लांट में काम करने वाली विनीता बताती हैं कि शुरुआत में समूह से जुड़ने को लेकर परिवार के लोग तैयार नहीं थे. उन्हें भी कई बार मना किया गया, लेकिन उन्होंने काम जारी रखा. आज वह कमाती हैं तो पति की आर्थिक मदद भी करती हैं. उनके मुताबिक, समूह से जुड़ने के बाद महिलाएं पहले के मुकाबले ज्यादा आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रख पाती हैं.

विनीता बताती हैं कि यहां 17 समूह जुड़े हैं. हर समूह में करीब 10 महिलाएं होती हैं. ये महिलाएं अलग-अलग कामों से जुड़ी हैं. समूह ने उन्हें कमाई का मौका दिया, जिससे परिवार में उनकी भूमिका बदली है.

महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश करता झांसी का प्लांट. (Photo: ITG)

सरकारी मदद से रोजगार, परिवार में बढ़ा भरोसा

भोजला का यह THR प्लांट दिखाता है कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं को एक साथ जोड़कर रोजगार का रास्ता खोल सकते हैं. यहां महिलाओं ने अपनी बचत लगाई, सरकारी मदद से प्लांट शुरू किया और अब नियमित काम से परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने में योगदान दे रही हैं.

द्रोपदी, सरोज और विनीता की कहानी में बदलाव सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं है. अब वे बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर पा रही हैं, पति की मदद कर रही हैं और परिवार में पहले से ज्यादा सम्मान महसूस करती हैं. जिन महिलाओं के काम करने को लेकर कभी घरों में विरोध होता था, आज उन्हीं की मेहनत परिवार के लिए सहारा बन रही है.

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