योगी सरकार के रडार पर राजस्व विभाग, 4 तहसीलदार समेत 5 अफसरों पर बड़ी कार्रवाई

यूपी में राजस्व न्यायालयों में लंबित केस के निस्तारण को लेकर योगी सरकार ने सख्त कार्रवाई की है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समीक्षा के बाद राजस्व परिषद ने लापरवाही और मामलों के धीमे निस्तारण के आरोप में चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार को निलंबित किया है. पांचों अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है. सरकार ने आगे भी लंबित मामलों की नियमित समीक्षा और लापरवाही पर कार्रवाई के संकेत दिए हैं.

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सीएम योगी की समीक्षा बैठक के बाद अधिकारियों पर एक्शन हुआ (Photo: ITG) सीएम योगी की समीक्षा बैठक के बाद अधिकारियों पर एक्शन हुआ (Photo: ITG)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 04 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:48 AM IST

यूपी में राजस्व अदालतों में सालों से लंबित मामलों को लेकर योगी सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समीक्षा के बाद राजस्व परिषद ने कामकाज में लापरवाही और लंबित वादों के निस्तारण में सुस्ती बरतने वाले चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया है. पांचों अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है.

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सरकार की इस कार्रवाई से राजस्व विभाग में हड़कंप मचा है. अधिकारियों का कहना है कि साफ संदेश दिया गया है कि राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों को लेकर अब केवल निर्देश जारी नहीं होंगे, बल्कि समय पर काम नहीं करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी. राजस्व से जुड़े मामले सीधे तौर पर किसानों, जमीन मालिकों और आम लोगों से जुड़े होते हैं. ऐसे में किसी वाद के लंबे समय तक लंबित रहने का असर संबंधित परिवारों और उनकी संपत्ति पर भी पड़ता है. सरकार ने इसी वजह से राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के जल्द निस्तारण को प्राथमिकता में रखा है.

सीएम योगी की समीक्षा के बाद हुई कार्रवाई

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों की स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की थी. इस दौरान अधिकारियों के सामने लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर स्थिति रखी गई. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि राजस्व वादों का निस्तारण निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाए. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि मामलों को लटकाने या निस्तारण में अनावश्यक देरी करने को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा. समीक्षा के दौरान यह भी संदेश दिया गया कि जिन अधिकारियों के स्तर पर लगातार मामले लंबित पाए जाएंगे, उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी. इसी समीक्षा के बाद राजस्व परिषद ने संबंधित अधिकारियों के कामकाज की विस्तृत जांच कर कार्रवाई की.

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राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रदेश के सभी राजस्व न्यायालयों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-34 के तहत दाखिल वादों की गहन समीक्षा की गई. इस समीक्षा में मामलों को केवल जिले या तहसील के स्तर पर ही नहीं देखा गया, बल्कि न्यायालयवार और अधिकारीवार स्थिति का भी आकलन किया गया. इसमें यह देखा गया कि किस अधिकारी के न्यायालय में कितने मामले लंबित हैं और उनके निस्तारण की गति कैसी है.

समीक्षा में कुछ अधिकारियों के स्तर पर लंबित मामलों के निस्तारण की गति संतोषजनक नहीं पाई गई. शासन की प्राथमिकता के बावजूद मामलों को समयबद्ध तरीके से न निपटाने को गंभीरता से लिया गया. इसके बाद चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार को निलंबित करने का फैसला किया गया.

इन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई

राजस्व परिषद की कार्रवाई की चपेट में आने वाले अधिकारियों में तहसीलदार पवन कुमार सिंह, जो प्रतापगढ़ की पट्टी तहसील में तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार रहे और वर्तमान में प्रयागराज में तहसीलदार हैं, शामिल हैं. इसके अलावा तहसीलदार अतुल हर्ष, तहसील बलिया, तहसीलदार हरेराम यादव, जो धनघटा में तत्कालीन नायब तहसीलदार रहे और वर्तमान में गोंडा में तहसीलदार हैं, तथा तहसीलदार आनंद ओझा, तहसील खलीलाबाद, संतकबीरनगर को भी निलंबित किया गया है. वहीं नायब तहसीलदार विवेक कुमार सिंह, तहसील सरोजनीनगर, लखनऊ पर भी निलंबन की कार्रवाई हुई है. इन अधिकारियों के खिलाफ निलंबन के साथ-साथ नियमानुसार अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.

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सिर्फ निलंबन नहीं, अब जांच भी होगी

सरकार की कार्रवाई यहीं खत्म नहीं हुई है. पांचों अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इसका मतलब है कि संबंधित मामलों में जिम्मेदारी और लापरवाही के बिंदुओं की जांच की जाएगी. जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि किन परिस्थितियों में मामले लंबित रहे, निस्तारण की गति अपेक्षा के अनुरूप क्यों नहीं रही और इसके लिए अधिकारी की क्या जिम्मेदारी बनती है. जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

राजस्व मामलों की देरी से किसे होती है परेशानी

राजस्व न्यायालयों में लंबित मामले आमतौर पर जमीन, नामांतरण और दूसरे राजस्व विवादों से जुड़े होते हैं. इन मामलों का सीधा संबंध आम लोगों की संपत्ति और जमीन से होता है. किसी किसान की जमीन से जुड़ा विवाद लंबे समय तक अदालत में लंबित रहे तो उसका असर खेती-किसानी से लेकर जमीन के इस्तेमाल और पारिवारिक मामलों तक पड़ सकता है. इसी तरह आम नागरिकों के लिए भी जमीन संबंधी विवाद लंबे समय तक परेशानी का कारण बन सकते हैं. सरकार का जोर अब इस बात पर है कि ऐसे मामलों को अनावश्यक रूप से लंबा न खींचा जाए और पात्र लोगों को समय पर राहत मिल सके.

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किसानों और आम लोगों को तुरंत न्याय देने पर जोर

योगी सरकार की इस कार्रवाई का सबसे बड़ा फोकस राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों को कम करना और आम लोगों को समय पर न्याय उपलब्ध कराना है. सरकार का मानना है कि राजस्व विवादों का समयबद्ध निस्तारण होने से किसानों और आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों और न्यायालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. इससे व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. राजस्व परिषद ने अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति जवाबदेह रहने का संदेश दिया है. साथ ही यह भी साफ किया है कि लंबित राजस्व वादों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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