बदायूं की राजनीति में पूर्व सांसद संघमित्रा मौर्य का नाम एक बार फिर चर्चा में है. कभी समाजवादी पार्टी के मजबूत गढ़ माने जाने वाले बदायूं में BJP को ऐतिहासिक जीत दिलाने वाली संघमित्रा को 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने दोबारा टिकट नहीं दिया. इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य, पार्टी में भूमिका और संभावित नाराजगी को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे. अब पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के कांग्रेस के साथ आने के बाद उनके अगले कदम को लेकर अटकलें फिर तेज हो गई हैं. चर्चा है कि संघमित्रा BJP छोड़कर कांग्रेस के रास्ते बदायूं जिले की बिल्सी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं. हालांकि, उन्होंने आज तक से बातचीत में BJP छोड़ने की खबरों को खारिज करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने कहा कि वह BJP में हैं. साथ ही यह भी कहा कि 2027 का विधानसभा चुनाव उनका चुनाव नहीं है.
संघमित्रा मौर्य ने 2019 के लोकसभा चुनाव में बदायूं सीट पर समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता धर्मेंद्र यादव को हराया था. इस जीत के साथ BJP ने बदायूं में 21 साल बाद ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. लंबे समय से सपा के प्रभाव वाली इस सीट पर मिली जीत ने संघमित्रा को प्रदेश की राजनीति में पहचान दिलाई. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP ने उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया. टिकट कटने के बाद एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उनके भावुक होने की तस्वीरें सामने आईं और उनकी नाराजगी को लेकर चर्चाएं होने लगीं. सवाल उठे कि क्या पार्टी में उनकी भूमिका बदल गई है और क्या वह आगे कोई दूसरा राजनीतिक रास्ता चुनेंगी.
2019 में धर्मेंद्र यादव को हराकर चर्चा में आई थीं संघमित्रा
हालांकि, टिकट नहीं मिलने के बाद भी संघमित्रा ने BJP से दूरी बनाने का ऐलान नहीं किया. वह संगठनात्मक कार्यक्रमों और स्थानीय गतिविधियों में सक्रिय रही हैं. इसके बावजूद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल बने रहे. घमित्रा के पिता स्वामी प्रसाद मौर्य का राजनीतिक सफर भी कई बदलावों से गुजरा है. वह BJP और समाजवादी पार्टी में रहने के बाद अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बना चुके हैं. अब उनके कांग्रेस के साथ आने से बदायूं की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. सी के बाद संघमित्रा के बिल्सी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की अटकलों ने जोर पकड़ा. स्थानीय राजनीति में मौर्य और शाक्य मतदाताओं की अच्छी संख्या मानी जाती है. ऐसे में संघमित्रा की अपनी राजनीतिक पहचान और परिवार का सामाजिक आधार चुनावी समीकरणों में अहम भूमिका निभा सकता है.
हालांकि, बिल्सी को ऐसा विधानसभा क्षेत्र नहीं कहा जा सकता जहां केवल एक ही दल का दबदबा रहा हो. यहां अलग-अलग दलों को जीत मिलती रही है. 2022 के विधानसभा चुनाव में BJP के हरीश चंद्र शाक्य ने गठबंधन के प्रत्याशी चंद्र प्रकाश मौर्य को हराया था. फिलहाल संघमित्रा के बिल्सी से चुनाव लड़ने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. घमित्रा और BJP के रिश्तों को लेकर चर्चा पहली बार नहीं हो रही है. 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान उनके पिता स्वामी प्रसाद मौर्य ने BJP छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया था. उस समय संघमित्रा BJP की सांसद थीं, जबकि उनके पिता पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे. ऐसे में पिता और बेटी की अलग-अलग राजनीतिक राह चर्चा का विषय बन गई थी.
पिता के चुनाव प्रचार से जुड़े एक घटनाक्रम में संघमित्रा का आक्रामक अंदाज भी सुर्खियों में रहा था. हाथ में डंडा लेकर भीड़ की ओर बढ़ने को लेकर उनकी चर्चा हुई थी. उस समय इस घटनाक्रम को पार्टी अनुशासन के नजरिये से भी देखा गया, क्योंकि उनके पिता BJP के खिलाफ चुनावी मैदान में थे और संघमित्रा BJP की सांसद थीं. उस दौरान संघमित्रा ने पिता-बेटी के रिश्ते को लेकर कहा था, “मैं उनकी बेटी हूं, नाखून को शरीर से अलग नहीं किया जा सकता है.” उनका यह बयान उस स्थिति को दिखाता था, जिसमें पारिवारिक रिश्ता अपनी जगह था, लेकिन राजनीतिक रास्ते अलग थे. पिता के BJP छोड़ने के बावजूद संघमित्रा ने पार्टी में बने रहने की बात कही थी.
क्या 2027 में बिल्सी से चुनाव लड़ेंगी संघमित्रा
अब एक बार फिर वही सवाल उठ रहे हैं. क्या 2024 में टिकट कटने के बाद संघमित्रा BJP में अपनी भूमिका से संतुष्ट हैं. क्या वह भविष्य में विधानसभा चुनाव लड़ेंगी. क्या पिता की बदली हुई राजनीतिक दिशा उनके अगले फैसले को प्रभावित करेगी. और क्या बिल्सी 2027 के विधानसभा चुनाव में उनके लिए नया राजनीतिक ठिकाना बन सकती है. इन सवालों के बीच संघमित्रा ने आज तक से बातचीत में BJP छोड़ने की चर्चाओं को खारिज कर दिया है. उन्होंने साफ कहा कि वह BJP में हैं. साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव को अपना चुनाव नहीं बताया. फिलहाल उनके बयान से इतना स्पष्ट है कि उन्होंने BJP छोड़ने या बिल्सी से चुनाव लड़ने का कोई ऐलान नहीं किया है. टिकट कटने के बाद उनकी भूमिका को लेकर उठे सवाल और पिता के कांग्रेस के साथ आने से बने नए राजनीतिक समीकरण जरूर चर्चा में हैं. अब देखना होगा कि आने वाले समय में संघमित्रा मौर्य अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर क्या फैसला करती हैं.
अंकुर चतुर्वेदी