सहारनपुर के गांव महरवानी निवासी 71 वर्षीय किसान आदित्य त्यागी ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच नई हो तो गाय का गोबर भी लाखों की कमाई का जरिया बन सकता है. फॉरेस्ट रेंजर के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने देसी गायों का पालन शुरू किया, लेकिन केवल दूध बेचने से अपेक्षित मुनाफा नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने देसी गाय के गोबर का बेहतर उपयोग करने का निर्णय लिया और उससे सम्भरानी कप (धूनी कप) बनाने का काम शुरू किया. आज उनके बनाए गए उत्पाद देशभर में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बिक रहे हैं और उन्हें हर महीने लाखों रुपये की आय हो रही है.
आदित्य त्यागी ने देसी गाय के गोबर में गूगल और लोबान जैसी प्राकृतिक सामग्री मिलाकर ऐसे सम्भरानी कप तैयार किए हैं, जिनका उपयोग घरों में धूनी देने और वातावरण को सुगंधित बनाने के लिए किया जाता है. उनका कहना है कि बाजार में मिलने वाले अधिकांश सम्भरानी कप कोयले से बने होते हैं, जिनके जलने पर कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है. वहीं देसी गाय के गोबर से बने इन कपों को पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में तैयार किया गया है. उनका उद्देश्य केवल व्यवसाय करना नहीं, बल्कि लोगों तक शुद्ध और प्राकृतिक उत्पाद पहुंचाना भी है.
गोबर कप से हो रही है लाखों की कमाई
उन्होंने बताया कि एक सम्भरानी कप बनाने में लगभग 10 ग्राम देसी गाय का गोबर लगता है, जबकि एक कप की कीमत करीब 10 रुपये पड़ती है. इस हिसाब से गोबर का मूल्य 400 रुपये प्रति किलो से भी अधिक हो जाता है. उनके उत्पाद होलसेल में करीब 90 रुपये और ऑनलाइन लगभग 220 रुपये में बिकते हैं. अमेजन समेत विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर देशभर से ऑर्डर मिल रहे हैं, जिनमें दक्षिण भारत से सबसे अधिक मांग आ रही है. इस वर्ष उन्होंने 20 हजार सम्भरानी कप तैयार किए, जिनमें से एक महीने के भीतर ही 7 से 8 हजार कप की बिक्री हो चुकी है.
आदित्य त्यागी का कहना है कि आज उन्हें नौकरी के समय मिलने वाली सैलरी से भी अधिक आमदनी इस व्यवसाय से हो रही है. उन्होंने 5 से 7 लोगों को रोजगार भी दिया है और उनका मानना है कि यदि देसी गाय के गोबर का वैज्ञानिक और व्यावसायिक तरीके से उपयोग किया जाए तो इससे दूध से कई गुना अधिक कमाई की जा सकती है. उनका यह नवाचार उन लोगों के लिए प्रेरणा बन रहा है जो देसी गाय पालन को लाभदायक नहीं मानते. आज उनका मॉडल यह संदेश दे रहा है कि जिस गोबर को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, वही सही सोच और मेहनत से लाखों रुपये का कारोबार बन सकता है.
राहुल कुमार