अखिलेश यादव ने प्रयागराज में जलभराव की स्थिति को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि 'महाकुंभ के नाम पर जो 1 लाख करोड़ रुपए प्रयागराज के तथाकथित ‘स्मार्ट डेवलपमेंट’ के नाम पर ख़र्च किए गए थे, ये उस महा-भष्ट्राचार का जीता-जागता और बहता-बहाता प्रमाण है. बनाने चले थे ‘दिव्य’, लेकिन हर तरह दिख रहा है ’द्रव्य’! अब क्या इलाहाबाद का नाम फिर से बदलकर प्रयागराज से ‘जलराजनगर’ करेंगे.'
उन्होंने आगे कहा कि भाजपाइयों ने सोचा न था कि उनके महापाप की पोल कभी धार्मिक रूप से खुलेगी, कभी प्राकृतिक रूप से. पाप की सज़ा इसी धरती पर मिलती है. आपको बता दें कि संगम नगरी प्रयागराज में लगातार हो रही बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेकर जनहित याचिका कायम की है.
यह मामला न्यायमूर्ति अजीत कुमार और गरिमा प्रसाद की खंडपीठ के समक्ष आया. मंगलवार को हुई लगातार बारिश के कारण शहर के प्रमुख मार्गों और निचले इलाकों में पानी भर गया, जिससे आम लोगों के साथ-साथ न्यायाधीशों को भी अदालत पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. जलभराव के कारण अदालत की कार्यवाही भी निर्धारित समय से देरी से शुरू हुई.
जिला प्रशासन को किया तलब
इसी स्थिति को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और जिला प्रशासन से जवाब तलब किया है. अदालत ने जिलाधिकारी (डीएम) प्रयागराज और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि शहर के निचले इलाकों में जलभराव रोकने के लिए पहले से प्रभावी और पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए.
जवाबदेही बढ़ने की संभावना
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार के नगर विकास एवं नियोजन विभाग के सचिव को भी परसों तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया है. हलफनामे में यह बताना होगा कि शहर में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए अब तक कौन-कौन सी योजनाएं स्वीकृत की गई हैं, उनकी वर्तमान स्थिति क्या है और भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार की क्या कार्ययोजना है. हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अब जिला प्रशासन और नगर निगम की तैयारियों तथा बारिश से निपटने की व्यवस्थाओं पर जवाबदेही तय होने की संभावना बढ़ गई है.
पंकज श्रीवास्तव