पितृपक्ष में संगम पर उमडे़गी भीड़, इस बार विदेश से भी कर सकेंगे ऑनलाइन पिंडदान

प्रयागराज में पितृपक्ष की तैयारियां तेज हो गई हैं. 26 सितंबर से शुरू हो रहे पितृपक्ष में त्रिवेणी संगम पर लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है. यहां लोग स्नान कर पितरों का तर्पण और पिंडदान करेंगे. इस बार खास बात ये है कि जो लोग विदेश में हैं, उनके लिए तीर्थ पुरोहितों ने ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था की है.

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इस बार पितृपक्ष 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक है (photo itg) इस बार पितृपक्ष 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक है (photo itg)

पंकज श्रीवास्तव

  • प्रयागराज,
  • 22 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:29 PM IST

प्रयागराज में पितृ पक्ष पर पवित्र गंगा, यमुना, सरस्वती के संगम पर हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. लोग संगम में स्नान करने के बाद अपने पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं और उनकी आत्मा की शांति तथा परिवार के कल्याण की कामना करते हैं.  इस बार पितृपक्ष 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक है. तीर्थ पुरोहितों ने इस बार विदेश में रहने वाले परिवारों के लिए ऑनलाइन पिंडदान करने की व्यवस्था भी की है. 

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देशभर से लोग यहां श्राद्धों में पिंडदान करने आते हैं और भारी संख्या में प्रयागराज आकर अपने पुरखों और पूर्वजों को पिंडदान कर उन्हें मोक्ष की प्राप्ति कराते हैं और अपने परिवार की सुख शांति की कामना करते हैं. संगम को पितृ कर्म के लिए विशेष श्रद्धा का स्थान माना जाता है. यहां दूर-दूर से लोग अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने आते हैं. कहा जाता है विष्णु मुख प्रयाग, विष्णु नाभि काशी, विष्णु चरण गया, इन तीन जगह पर लोग जाकर अपने पुरखों का पिंडदान करते हैं और शांति बनाये रखने की कामना करते है. 

इस बार प्रयागराज के तीर्थ पुरोहितों ने ऑनलाइन पिंडदान की भी व्यवस्था

पितृ पक्ष हिंदू धर्म में अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर माना जाता है. इस अवधि में लोग अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी तथा अन्य पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं.  पितृ पक्ष का यह अवसर केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि परिवार की पिछली पीढ़ियों को याद करने, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी स्मृतियों को सम्मान देने की परंपरा भी है.

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इस बार प्रयागराज के तीर्थ पुरोहितों ने ऑनलाइन पिंडदान की भी व्यवस्था की है इनका कहना है कि जो लोग देश-विदेश या किसी कारणवश अपने पुरखों का पिंडदान करने नहीं आ सकते वह ऑनलाइन ही पिंडदान कर सकते हैं और ऐसा करके वह लोग अपने पूर्वजों और अपनी परंपराओं से जुड़े रह सकेंगे.

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