उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की नीलम मलिक उन महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने मुश्किल हालात में भी हिम्मत नहीं हारी. पति की मौत के बाद उन्होंने दो बेटों की परवरिश की जिम्मेदारी खुद संभाली और 13 बीघा जमीन पर गन्ने की खेती करके परिवार का गुजारा किया. खेती से होने वाली कमाई के सहारे उन्होंने छोटे बेटे शुभम को पढ़ाया-लिखाया और उसे यूपी पुलिस में भर्ती कराने में कामयाबी हासिल की, वहीं, बड़ा बेटा गौरव मलिक खेती और पशुपालन में उनका हाथ बंटाता है.
नीलम मलिक की शादी साल 1992 में मुजफ्फरनगर जिले के पिन्ना गांव निवासी भूपेंद्र मलिक से हुई थी, उनके दो बेटे गौरव और शुभम हैं. शादी के करीब 15 साल बाद एक सड़क हादसे में उनके पति भूपेंद्र मलिक की मौत हो गई. इस घटना के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी नीलम के कंधों पर आ गई.
ऐसे मुश्किल समय में उन्होंने हिम्मत जुटाई और गन्ने की खेती के जरिए परिवार चलाने का फैसला किया. नीलम करीब 13 बीघा जमीन पर गन्ने की खेती करती हैं. खेती से सालाना लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये की आमदनी होती है. इसी कमाई से उन्होंने घर का खर्च चलाया और दोनों बेटों की परवरिश की.
गन्ने की खेती से बेटे को बनाया पुलिसकर्मी
नीलम की मेहनत का नतीजा है कि उनका छोटा बेटा शुभम उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती हो गया है. वहीं, बड़ा बेटा गौरव खेती और पशुपालन के काम में मां का सहयोग करता है. नीलम ने सीमित आमदनी के बावजूद परिवार की जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी.
नीलम बताती हैं कि पति के निधन के बाद से वह खुद परिवार से जुड़े फैसले लेती आ रही हैं. गन्ना मिल से मिलने वाले भुगतान के आधार पर वह खेती और घर के खर्च की योजना बनाती हैं. उनके लिए गन्ने की खेती सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि परिवार को आगे बढ़ाने का सहारा भी रही है.
गन्ने का समय पर भुगतान मिलने से मिलती है मदद
नीलम मलिक का कहना है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली 6,000 रुपये सालाना सहायता राशि से भी उन्हें आर्थिक मदद मिलती है. उनका मानना है कि यह राशि खेती और परिवार से जुड़े छोटे-मोटे खर्चों को पूरा करने में काम आती है.
संदीप सैनी