सावन का महीना है. हरिद्वार से लेकर देवभूमि की ओर जाने वाले रास्ते भगवा रंग में रंगे हुए हैं. लाखों शिवभक्त गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं. कोई डाक कांवड़ लेकर दौड़ रहा है, कोई परिवार के साथ पैदल चल रहा है, तो कोई अपनी अनोखी कांवड़ की वजह से लोगों का ध्यान खींच रहा है. इन्हीं लाखों कांवड़ियों के बीच बुधवार रात मुजफ्फरनगर में एक ऐसी कांवड़ पहुंची, जिसने राह चलते लोगों के कदम रोक दिए.
221 फीट लंबी... 11 फीट ऊंची... और पूरी तरह तिरंगे के रंग में सजी कांवड़... दिल्ली-देहरादून नेशनल हाइवे-58 पर जैसे ही यह तिरंगा कांवड़ दिखाई दी, लोग उसे देखने के लिए रुकने लगे. किसी ने मोबाइल निकालकर वीडियो बनाया, तो किसी ने तस्वीरें खींचीं. हर तरफ 'हर-हर महादेव' और 'भारत माता की जय' के जयकारे सुनाई देने लगे.
दरअसल, इस अनोखी कांवड़ को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के ग्राम कुरड़ी के 21 शिवभक्त मिलकर लेकर चल रहे हैं. टोली ने 2 अगस्त को हरिद्वार की हर की पौड़ी से गंगाजल भरा था और अब अपने गांव की ओर बढ़ रही है. उनका लक्ष्य 11 अगस्त को गांव पहुंचकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करना है.
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रोजाना यह टोली करीब 20 से 22 किलोमीटर पैदल चलती है. पूरी यात्रा लगभग 190 किलोमीटर की है. कांवड़ टोली के सदस्य हरेंद्र कुमार बताते हैं कि यह तिरंगा कांवड़ देश के शहीदों को समर्पित है. उनका कहना है कि तिरंगा सिर्फ एक झंडा नहीं, बल्कि देश की आन, बान और शान है. इस यात्रा का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाना और लोगों को यह संदेश देना है कि देश के प्रति प्रेम, सम्मान और समर्पण हर नागरिक का कर्तव्य है.
हरेंद्र बताते हैं कि यह उनकी पहली तिरंगा कांवड़ यात्रा है. पूरी टोली ने मिलकर इसे तैयार किया और संकल्प लिया कि इस बार आस्था के साथ देशभक्ति का संदेश भी लेकर चलेंगे. इन दिनों हरिद्वार से जल लेकर करोड़ों शिवभक्त मुजफ्फरनगर के रास्ते दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों की ओर जा रहे हैं. ऐसे में कांवड़ मार्ग पर कई अनोखी कांवड़ देखने को मिल रही हैं. 221 फीट लंबी तिरंगा कांवड़ भी इन्हीं में से एक है.
संदीप सैनी