मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 कमरों के ध्वस्तीकरण से जुड़े मामले में यूनिवर्सिटी प्रबंधन को फिलहाल राहत मिली है. सोमवार को मुरादाबाद मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह की अदालत में मामले की सुनवाई हुई. करीब दो घंटे तक चली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने कानूनी तर्क अदालत के सामने रखे और विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से बहस की.
सुनवाई के बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता जुनैद एजाज ने बताया कि मंडलायुक्त न्यायालय ने ध्वस्तीकरण आदेश पर पहले से लगी रोक को जारी रखने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि जब तक न्यायालय में दायर अपील लंबित रहेगी और उस पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक रामपुर विकास प्राधिकरण यूनिवर्सिटी की 38 कमरों के खिलाफ कोई ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं कर सकेगा.
दोनों पक्षों ने कानूनी पहलुओं पर रखे अपने तर्क
अधिवक्ता जुनैद एजाज ने बताया कि सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से मामले के कई कानूनी पहलुओं पर विस्तृत बहस हुई. उन्होंने कहा कि अपील करना प्रत्येक पक्ष का वैधानिक अधिकार है और इस मामले में भी उसी अधिकार का उपयोग किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, जब किसी मामले में अपील लंबित हो, तब तक ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए. इसी आधार पर अदालत ने ध्वस्तीकरण आदेश पर लगी रोक को प्रभावी बनाए रखा है.
ध्वस्तीकरण आदेश पर फिलहाल यथास्थिति बरकरार
अधिवक्ता के अनुसार, अब इस मामले में आगे की सुनवाई की तारीख न्यायालय द्वारा तय की जाएगी. फिलहाल जब तक अपील पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक जौहर यूनिवर्सिटी की 38 कमरों के खिलाफ किसी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं की जाएगी. मंडलायुक्त न्यायालय के इस आदेश के बाद फिलहाल यूनिवर्सिटी की 38 कमरों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रुकी रहेगी. अब सभी की नजरें मामले की अगली सुनवाई और न्यायालय के अंतिम फैसले पर टिकी हैं.
जगत गौतम