अयोध्या में दीपोत्सव के 10वें संस्करण को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से खास अपील की है, उन्होंने कहा कि जब श्रीराम जन्मभूमि पर दीप जलें, तो सभी लोग अपने-अपने घरों और आंगन में भी दीप जलाएं. मुख्यमंत्री ने दीपोत्सव को आस्था, आत्मगौरव और सनातन चेतना के पुनर्जागरण का महापर्व बताया.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर प्रदेशवासियों को दीपावली और 10वें दीपोत्सव की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने लिखा कि मां सरयू की पावन गोद में बसी अयोध्या नगरी उल्लास, गौरव और भक्ति के महापर्व दिव्य दीपोत्सव के लिए पूरी तरह सज चुकी है. वर्षों की प्रतीक्षा और करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतिफल एक बार फिर लाखों दीपों की स्वर्णिम आभा के रूप में दिखाई देने जा रहा है.
धर्म, मर्यादा और प्रकाश के महापर्व के साक्षी बनें
मुख्यमंत्री ने दीपोत्सव में शामिल होने आ रहे उपराष्ट्रपति, विभिन्न देशों के राजदूतों, उच्चायुक्तों, राजनयिकों, साधु-संतों और देश-विदेश से आने वाले अतिथियों का स्वागत किया, उन्होंने कहा कि समता, समरसता, सांस्कृतिक एकात्मता और वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना से जुड़ा यह आयोजन ऐतिहासिक और यादगार बनने जा रहा है। उन्होंने लोगों से धर्म, मर्यादा और प्रकाश के इस महापर्व का साक्षी बनने की अपील की.
'दीपक केवल मिट्टी का पात्र नहीं, चेतना का जागरण है'
सीएम योगी ने दीपक के महत्व को समझाते हुए कहा कि दीपक केवल मिट्टी का पात्र नहीं, बल्कि चेतना के जागरण का प्रतीक है. यह हमें सदियों से संदेश देता आ रहा है कि अंधकार से लड़ने की जरूरत नहीं होती, बल्कि एक ज्योति जलाने से ही अंधकार दूर हो जाता है. उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की प्राणों से प्रिय नगरी अयोध्या में मां सरयू को साक्षी मानकर 10वां दीपोत्सव मनाया जा रहा है। यह आयोजन प्रभु श्रीराम के आगमन की खुशी और उनके आदर्शों के प्रति लोगों की आस्था का प्रतीक है.
2017 में शुरू हुआ दीपोत्सव आज बना सांस्कृतिक पहचान
मुख्यमंत्री ने दीपोत्सव के पिछले नौ वर्षों के सफर का भी जिक्र किया, उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में सरयू तट पर प्रज्ज्वलित संकल्प की एक लौ ने आज भारतीय संस्कृति और अयोध्या के गौरव को वैश्विक पहचान दिलाई है. दीपोत्सव का यह दशक केवल दीपों की जगमगाहट और विश्व कीर्तिमानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अयोध्या के त्रेतायुगीन वैभव, सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण और देश के सांस्कृतिक आत्मगौरव की पुनर्स्थापना का भी प्रतीक है. उन्होंने कहा कि राम की पैड़ी पर जलने वाले लाखों दीप आस्था के साथ अंत्योदय और स्थानीय स्वावलंबन की भावना को भी आगे बढ़ा रहे हैं. यह आयोजन सदियों की प्रतीक्षा को भव्य वास्तविकता में बदलने और अयोध्या को उसकी सांस्कृतिक पहचान के साथ पुनः प्रतिष्ठित करने का प्रतीक है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव के 10वें संस्करण पर प्रदेशवासियों से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया, उन्होंने कहा कि ऐसा रामराज्य स्थापित करने का संकल्प होना चाहिए, जहां विकास का प्रकाश समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे. आस्था, समरसता और सेवा की यह ज्योति आने वाली पीढ़ियों तक इसी तरह जगमगाती रहे.
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