ठगों ने 'मौसा जी' कहकर बुजुर्ग के पैर छुए, बोले- आपके जैसी अंगूठी बनवानी है... बुजुर्ग ने उतारकर दी तो लेकर हो गए फरार

बिजनौर में 70 साल के बुजुर्ग से ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. बाजार में दो लोगों ने बुजुर्ग को 'मौसा जी' कहकर रोका और पैर भी छुए. इसके बाद बुजुर्ग की अंगूठी के डिजाइन की तारीफ करते हुए वैसी ही अंगूठी बनवाने की बात कही. बुजुर्ग ने अंगूठी उतारकर दे दी, जिसके बाद दोनों उसे लेकर फरार हो गए.

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बाजार में सामान खरीदने गए थे 70 साल के बुजुर्ग. (Photo: Screengrab) बाजार में सामान खरीदने गए थे 70 साल के बुजुर्ग. (Photo: Screengrab)

ऋतिक राजपूत

  • बिजनौर,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:22 PM IST

बिजनौर में एक 70 साल के बुजुर्ग बाजार से सामान लेने निकले थे. रोज की तरह बाजार जाना था, घर का कुछ सामान खरीदना था और वापस लौटना था. लेकिन रास्ते में दो ऐसे युवक मिले, जिन्होंने कुछ ही मिनटों में उनसे ऐसी पहचान बना ली कि बुजुर्ग को लगा, सामने वाले कोई अपने ही हैं.

बात सिर्फ इतनी नहीं थी कि युवकों ने उन्हें रिश्तेदार बताया. उन्होंने भरोसा जीतने के लिए पूरा माहौल ही ऐसा बना दिया कि बुजुर्ग को उन पर शक करने की वजह नहीं मिली. पहले उन्हें 'मौसा जी' कहकर बुलाया. फिर उनमें से एक ने अपने साथी से बुजुर्ग के पैर छुआ दिए. बुजुर्ग ने आशीर्वाद दिया. बातचीत आगे बढ़ी और फिर शुरू हुआ वह खेल, जिसमें बुजुर्ग की सोने की अंगूठी ही निशाना थी.

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मामला बिजनौर का है. 70 साल के सुभाष कुमार वर्मा बाजार में सामान खरीदने गए थे. इसी दौरान दो युवकों ने उन्हें रोक लिया. दोनों ने ऐसा व्यवहार किया, जैसे बुजुर्ग से पहले से पहचान हो. एक युवक ने उन्हें 'मौसा जी' कहकर बुलाया. अब किसी अनजान शख्स का अचानक आपको किसी रिश्ते के नाम से बुलाना अपने आप में चौंकाने वाली बात है. लेकिन इससे पहले कि बुजुर्ग कुछ समझ पाते, युवकों ने बातचीत को इस तरह आगे बढ़ाया कि मामला रिश्तेदारी जैसा ही लगने लगा. इसी दौरान एक युवक ने अपने साथी से बुजुर्ग के पैर छूने के लिए कहा.

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साथी ने आगे बढ़कर पैर छुए. सुभाष कुमार वर्मा ने उसे आशीर्वाद दिया. यानी ठगी की कहानी में पहला भरोसा यहीं बनाया गया. पहले रिश्ते का संबोधन, फिर पैर छूना और फिर आशीर्वाद. अब अगला दांव चलना था. पैर छूने के बाद बातचीत चल ही रही थी कि एक युवक ने फोन पर बात करने का नाटक किया. उसने ऐसा जताया जैसे उसे किसी को सोने की अंगूठी गिफ्ट करनी है. इसके बाद उसने अंगूठी खरीदने को लेकर बुजुर्ग से बातचीत शुरू कर दी.

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फिर उसकी नजर सुभाष कुमार वर्मा की अंगूठी पर गई. उसने कहा कि उसे इसी तरह की डिजाइन वाली अंगूठी बनवानी है. बस, यहीं से कहानी उस जगह पहुंच गई, जहां ठगों को जाना था. उसने बुजुर्ग से उनकी अंगूठी दिखाने को कहा. बुजुर्ग ने अंगूठी उतारी और उसे दे दी. और यहां एक चाल और चली गई. युवक ने अंगूठी पहली बार वापस कर दी. यानी जिस चीज को लेकर आगे ठगी करनी थी, उसे कुछ देर के लिए वापस कर दिया गया. शायद इसी वजह से बुजुर्ग को कोई शक नहीं हुआ. अगर कोई आदमी आपकी चीज लेकर वापस कर दे, तो पहली नजर में उसके इरादे पर सवाल उठाना मुश्किल होता है. लेकिन ठगों की कहानी में यह सिर्फ एक पड़ाव था.

दूसरी बार अंगूठी मांगी और खेल हो गया

कुछ देर बाद आरोपियों ने फिर अंगूठी की बात छेड़ी. उन्हें उसी डिजाइन की अंगूठी चाहिए थी. इस बार बुजुर्ग ने फिर अपनी अंगूठी उतारकर उन्हें दे दी. लेकिन इस बार कहानी बदल चुकी थी. अंगूठी उनके हाथ में गई और दोनों युवक उसे लेकर निकल गए. बुजुर्ग को शायद तब भी लगा होगा कि वे अंगूठी लेकर कोई काम करने जा रहे हैं और वापस आ जाएंगे. लेकिन आरोपियों ने जाते-जाते एक और कहानी सुना दी. आरोपी ने कथित तौर पर बुजुर्ग से कहा कि मेरी पत्नी आपके घर पर हैं. आप घर चलिये, हम वहीं आते हैं.

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बुजुर्ग घर पहुंच गए. लेकिन वहां पहुंचते ही पूरी कहानी का सबसे बड़ा झूठ सामने आ गया. घर पर कोई ऐसी महिला नहीं थी. उस व्यक्ति की पत्नी वहां नहीं थीं. तब सुभाष कुमार वर्मा को समझ आया कि बाजार में जिन युवकों को वह अपना रिश्तेदार समझ रहे थे, वे असल में उन्हें ठगकर उनकी अंगूठी ले गए. जिसे वह रिश्तेदारी समझ रहे थे, वह एक जाल था. जिस पैर छूने को उन्होंने सम्मान समझा, वह भरोसा जीतने का तरीका था. और जिस अंगूठी के डिजाइन की तारीफ को उन्होंने सामान्य बातचीत माना, वही पूरी ठगी का असली निशाना थी.

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ठगी का पता चलने के बाद सुभाष कुमार वर्मा ने 13 सितंबर को सिटी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने जांच शुरू की और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विनोद कुमार शर्मा और कालीचरण के रूप में हुई है. विनोद कुमार शर्मा उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर थाना क्षेत्र के गोजानी का रहने वाला है. वहीं कालीचरण बरेली के नवाबगंज थाना क्षेत्र के डोहरिया का निवासी है.

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पुलिस ने आरोपियों के पास से एक पीली धातु की अंगूठी बरामद की है. इसके अलावा वारदात में इस्तेमाल बताई जा रही काले रंग की बिना नंबर की बाइक भी बरामद की गई है. पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर रही है.

इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि ठगी का तरीका बेहद साधारण दिखता है. न कोई फर्जी बैंक कॉल. न OTP. न कोई लिंक. न कोई ऐप डाउनलोड करवाया गया. सिर्फ भरोसा. पहले 'मौसा जी' कहा. फिर पैर छुआ. फिर आशीर्वाद लिया. फिर फोन पर अंगूठी खरीदने की कहानी बनाई. फिर बुजुर्ग की अंगूठी को निशाना बनाया. पहली बार अंगूठी लेकर वापस की. दूसरी बार मांगी और लेकर निकल गए. और जाते-जाते पत्नी के घर पर होने की एक और कहानी सुना दी. यानी कुछ ही मिनट की मुलाकात में भरोसा बनाने से लेकर ठगी करने तक की पूरी स्क्रिप्ट तैयार थी.

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