गुजरात के आणंद शहर में खुद को IAS अधिकारी और डिप्टी कलेक्टर बताकर ठगी करने का मामला सामने आया है. आरोप है कि रौनक क्रिश्चियन नाम के व्यक्ति ने सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक दुकानदार और एक अन्य व्यक्ति से लाखों रुपये ऐंठ लिए. आरोपी ने नायब तहसीलदार की सीधी भर्ती में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था. इस दौरान उसने अपनी पहचान साबित करने के लिए असली जैसा दिखने वाला फर्जी सरकारी आईडी कार्ड भी इस्तेमाल किया.
पुलिस के मुताबिक, आरोपी रौनक क्रिश्चियन आणंद के सालेमनगर सोसाइटी का रहने वाला है. उसने बाकरोल रोड स्थित एक जेरॉक्स की दुकान पर अपनी कथित सरकारी पहचान दिखाई थी. आरोपी ने खुद को IAS अधिकारी और डिप्टी कलेक्टर बताया और इसी पहचान के जरिए शिकायतकर्ता का भरोसा जीतने की कोशिश की. पुलिस का कहना है कि आरोपी ने नौकरी लगवाने का लालच देकर दुकानदार नीरज पटेल और एक अन्य व्यक्ति से अलग-अलग किश्तों में कुल 7.70 लाख रुपये नकद लिए.
बताया गया है कि आरोपी ने नायब तहसीलदार की सीधी भर्ती में नौकरी दिलाने का वादा किया था. सरकारी अधिकारी होने का दावा करने के साथ उसने फर्जी आईडी कार्ड भी तैयार कराया था, ताकि उसकी बात पर आसानी से भरोसा किया जा सके. शिकायतकर्ता को उम्मीद थी कि आरोपी के कथित सरकारी संपर्कों की मदद से नौकरी मिल जाएगी. लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी न तो नौकरी मिली और न ही दिए गए पैसे वापस किए गए.
जब लंबे समय तक नौकरी नहीं मिली और रकम वापस करने में भी टालमटोल होने लगी, तब शिकायतकर्ता को धोखाधड़ी का एहसास हुआ. इसके बाद उसने आणंद टाउन पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. पुलिस टीम ने तकनीकी निगरानी और मानवीय स्रोतों की मदद से आरोपी की तलाश की और कुछ ही घंटों में रौनक क्रिश्चियन को पकड़ लिया.
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके पास से कई सामान बरामद किए हैं. इनमें एक लैपटॉप, प्रिंटर, मोबाइल फोन, फर्जी IAS आईडी कार्ड, सरकारी स्टांप और कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज शामिल हैं. पुलिस इन सामानों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी ने फर्जी सरकारी पहचान तैयार करने के लिए इनका इस्तेमाल कैसे किया. मामले में आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
आणंद टाउन पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या रौनक क्रिश्चियन ने इसी तरीके से किसी और व्यक्ति को भी अपना शिकार बनाया है. पुलिस उसके संपर्कों, दस्तावेजों और लेनदेन से जुड़ी जानकारी की जांच कर रही है. साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नौकरी दिलाने के नाम पर उससे किसी अन्य व्यक्ति ने भी पैसे दिए थे या नहीं. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपी से पूछताछ जारी है.
ब्रिजेश दोशी